भागवत गीता पर लिखी किताब 'गीता: द बैटल आफ द वर्ल्ड्स' से बच्चों को मिलेगी नई ताकत

सोनल और जेमा की किताब 'गीता: द बैटल आफ द वर्ल्ड्स' जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षाओं के बारे में बात करती है.

भागवत गीता पर लिखी किताब 'गीता: द बैटल आफ द वर्ल्ड्स' से बच्चों को मिलेगी नई ताकत
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

नई दिल्ली: छोटे बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करने की कोशिश के तहत ब्रिटेन में जन्मीं सोनल सचदेव पटेल और जेमा वायने-कट्टन ने गीता की शिक्षाओं पर आधारित अपनी पुस्तक के जरिए बच्चों में शुरू से ही व्यापक धार्मिक समझ और सहिष्णुता को बढ़ावा देने की की कोशिश की है. सोनल और जेमा की किताब 'गीता: द बैटल आफ द वर्ल्ड्स' जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षाओं के बारे में बात करती है और इसके केंद्र में उन्होंने ध्यान (मेडिटेशन) को रखा है. वे अपनी किताब के जरिए भगवद् गीता की सार्वभौमिकता पर जोर देती हैं और इसे आठ से 14 साल की आयु के बच्चों के लिए एक कहानी में तब्दील करती हैं, जिसका लक्ष्य शुरूआत से ही व्यापक धार्मिक समझ और सहिष्णुता को बढ़ावा देना है. 

मेडिटेशन से बच्चों को मिलेगी ताकत
सोनल ने कहा कि ध्यान (मेडिटेशन) को सभी बच्चे शांति के एक औजार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं. आत्मावलोकन और कर्म के विचार बच्चों को अपनी गतिविधियों एवं अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया का चयन करने में सशक्त करने में मदद कर सकते हैं. उन्होंने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में हर घंटे एक छात्र आत्महत्या करता है. इसलिए, इस तरह की एक किताब की जरूरत है.

(इनपुट भाषा से)