गोवा नाइट क्लब में 25 लोगों की मौत हो चुकी थी, पुलिस सोच रही थी कि सुबह होने से पहले 5.30 बजे इंडिगो की फ्लाइट 6E 1073 लेकर गोवा क्लब के मालिक लूथरा बंधु देश से बाहर निकल गए. कहां तो वे क्रांति लाने वाले आइकन कहे जा रहे थे लेकिन जब नियमों की धज्जियां उड़ाने की पोल खुली तो अपनी जान बचाने में लग गए.
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इसे अपने देश के सिस्टम की विडंबना ही कहेंगे कि जिसे जब भागना होता है, वो भाग जाता है. अधेड़ उम्र के लोगों को याद होगा कि दिसंबर के महीने में ही 1984 में भोपाल गैस त्रासदी का गुनहगार वॉरेन एंडरसन भाग गया था. या कहिए भागने दिया गया. बैंकों का 9000 करोड़ रुपये कर्ज लेकर विजय माल्या मार्च 2016 में भाग निकला. बताया गया कि वह जाने से पहले एक मिनिस्टर से मिला था. अब 25 लोगों की मौत का आरोपी गोवा क्लब का मालिक भी बड़े आराम से निकल गया है. हैरत की बात है कि आग 6 दिसंबर की रात में लगी थी. सुबह होते ही रोमियो नाइट क्लब के मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा देश छोड़कर रफूचक्कर हो गए और पुलिस शायद इन्हें नादान समझती रही. उसे समझ में ही नहीं आया कि इतना गंभीर मामला होने पर वे घर में बैठकर पुलिस के आने का इंतजार करेंगे.
20 कर्मचारियों समेत 25 लोगों की मौत के आरोपी दोनों भाई अपनी बात रखते, सफाई देते, पुलिस के सवालों का सामना करते लेकिन जब आप गलत किए होते हैं तो पैर कांपने लगते हैं. ऐसे में इन्होंने सुबह होने से पहले दिल्ली एयरपोर्ट से थाईलैंड की फ्लाइट पकड़ ली. जबकि इनके नाइट क्लब में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. न फायर सेफ्टी था, न देखरेख, न अलार्म और न पानी की बौछार का कोई सिस्टम. नतीजा यह हुआ कि जब डांस के दौरान इलेक्ट्रॉनिक अनार की आग छत को छूकर जलाने लगी तो इसे बुझाने का कोई मौका ही नहीं मिला.
पुलिस से हमेशा देर क्यों हो जाती है?
अब जरा सिस्टम पर नजर डालिए. रात में आग लगती है. अगले दिन आराम से गोवा पुलिस दोनों को ढूंढने निकलती है. एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस शायद दिल्ली भी आई थी लेकिन वे घर पर कहां मिलने वाले थे. दिल्ली के रहने वाले दोनों कारोबारी समझ चुके थे कि पुलिस आ रही होगी. रविवार यानी 7 दिसंबर की शाम को गोवा अग्निकांड के भगोड़े भाइयों के लिए लुकआउट नोटिस जारी होता है जबकि वे उसी दिन सुबह देश छोड़ चुके थे. सवाल तो यह भी पूछा जा रहा है कि क्या इंडिगो और क्लब के मालिक भाई-भाई हैं. हां, क्योंकि पब्लिक के लिए प्लेन नहीं है लेकिन लूथरा भाइयों को इंडिगो उड़ाकर देश से बाहर ले गई.
शायद हमारी पुलिस यह मानकर चलती है कि जिसके ऊपर आरोप लगेगा वो बहुत ही ईमानदारी के साथ आगे आएगा और कहेगा - जी, बताइए मैं ही हूं जिसे आप गुनहगार बता रहे हैं. पुलिस को इस मामले में लूथरा बंधुओं से ज्यादा तेजी दिखानी चाहिए थी. ऐसे सभी केसेज में पुलिस से देर क्यों हो जाती है? काश! इस केस में गोवा पुलिस ने दिल्ली पुलिस से फौरन मदद ली होती, जैसा अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस विभाग करता है लेकिन बिजनसमैन पर हाथ डालने से ये शायद झिझकते होंगे.
शायद वीडियो आए- मीटिंग में आया हूं
श्रीमान सौरभ और गौरव 7 दिसंबर की सुबह 5:30 बजे दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़कर फुकेट के लिए निकल गए क्योंकि उस समय कोई लुकआउट नोटिस नहीं था. ऐसे में एयरपोर्ट पर उन्हें पकड़ने का सवाल ही नहीं उठता. वह भी माल्या की तरह शायद जरूरी मीटिंग करने गए होंगे. शायद अब बयान भी आ जाए कि बहुत जरूरी काम से निकलना पड़ा. जल्द ही वो आएंगे लेकिन सब जानते हैं कि एक बार देश से बाहर होने के बाद कौन आता है. माल्या का इंतजार लंबा ही खिंचता जा रहा है. वह आराम से मैच देखते हैं, पार्टी करते हैं और उनकी तरफ से कोर्ट में दलील भी रखी जाती है.
हैरानी की बात है कि इंडिगो की फ्लाइट्स को लेकर हंगामा मचा हुआ है लेकिन लूथरा बंधु इंडिगो में ही बैठकर थाईलैंड के लिए उड़ गए. यह पूरा नाइटक्लब अवैध था. एंट्री और एग्जिट एकदम गलीनुमा और संकरा था. आग लगी तो क्षमता से करीब दोगुना लोग वहां जमा थे. लोग बेसमेंट की ओर भागे जहां पहले से लोग थे. अफरातफरी में दम घुटने से 25 लोगों की मौत हो गई.
अब पुलिस क्या करेगी?
करेगी ना. जैसे रात में गोवा क्लब में आग लगने पर पूरे देश की पुलिस जाग गई है, आप लखनऊ और यहां-वहां से आ रहे वीडियो और तस्वीरें देख लीजिए, पुलिस क्लबों में जाकर कुछ कागज पर नोट करती प्रतिबिंबित हो रही है. जैसे अब सारा चीज सुधर जाएगा. यह दिखावटी अभ्यास 24 घंटे चलता है जबतक कि पीड़ितों के आंसू सूख नहीं जाते. अपने देश में जान कितनी सस्ती है, हर घटना के बाद हमारे देश में अभ्यास होता है लेकिन व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कोई फिक्रमंद नहीं होता है. जहां तक गोवा क्लब के मालिकों की बात है तो गोवा पुलिस के तेजतर्रार अफसरों ने बताया है कि वे सीबीआई के इंटरपोल डिवीजन के साथ मिलकर लूथरा भाइयों को जल्द से जल्द पकड़ने की योजना बना रहे हैं.
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उम्मीद है कि योजना जल्दी एक्शन में बदलेगी. गलत काम करने वालों को कम से कम सजा तो दिला सकें. उन 25 लोगों को तो अब वापस नहीं लाया जा सकता. उनके परिवार का दर्द कोई दूसरा समझ भी नहीं पाएगा. सरकारें बस मुआवजा देकर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती हैं.
लुकआउट नोटिस फौरन जारी होता तो...
लुकआउट नोटिस एक कानूनी दस्तावेज होता है जो इमिग्रेशन अधिकारियों को उस व्यक्ति को देश छोड़ने से रोक देता है जिसके खिलाफ जांच चल रही होती है या वह आपराधिक मामले में वांटेड होता है. यह देश के हवाई अड्डों, पोर्ट और जमीनी सीमाओं पर काम करता है. इससे कोई भी शख्स देश की बाउंड्री के बाहर नहीं जा सकता.
सौरभ लूथरा कौन हैं?
सौरभ और गौरव लूथरा दोनों भाई हैं. सौरभ इंजीनियरिंग छोड़कर हॉस्पिटैलिटी के बिजनस में आए. वह बीइंग भारत रोमियो लेन हॉस्पिटैलिटी के चेयरमैन हैं. इस समय इनके देश के 22 शहरों और 4 देशों में भी रोमियो लेन के नाम से रेत्रां, बार और रिजॉर्ट हैं. इन्हें हॉस्पिटैलिटी आइकंस 2023 का अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनकी नेटवर्थ 300 करोड़ रुपये के करीब बताई जाती है. फोर्ब्स इंडिया ने हाल ही में सौरभ लूथरा को नाइटलाइफ कल्चर में धमाकेदार क्रांति लाने वाला शख्स बताते हुए एक पन्ने का प्रोफाइल छापा था.
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