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Google ने Doodle बनाकर डेनिश माइक्रोबायोलॉजिस्ट हंस क्रिश्चियन ग्राम को ऐसे किया याद

Hans Christian Gram: हंस क्रिस्चियन ग्राम का जन्म 13 सितम्बर 1853 को हुआ था. उन्हें बैक्टीरिया की प्रारंभिक पहचान के लिए ग्राम स्टेन (Gram Stain) के लिए जाना जाता है. 

Google ने Doodle बनाकर डेनिश माइक्रोबायोलॉजिस्ट हंस क्रिश्चियन ग्राम को ऐसे किया याद
GOOGLE ने हंस क्रिश्चियन ग्राम को उनके 166 वें जन्मदिन पर याद किया.

नई दिल्ली: गूगल (Google) आज खास डूडल (Doodle) के साथ डेनिश माइक्रोबायोलॉजिस्ट (Microbiologist) हंस क्रिश्चियन ग्राम ( Hans Christian Gram) का 166 वां जन्मदिन (Birthday) मना रहा है. यह कला डेनिश अतिथि कलाकार मिकेल सोमर द्वारा खूबसूरती से डिजाइन और चित्रित की गई है. उन्हें बैक्टीरिया की प्रारंभिक पहचान के लिए ग्राम स्टेन (Gram Stain) के लिए जाना जाता है. हंस क्रिस्चियन ग्राम का जन्म 13 सितम्बर 1853 को हुआ था. ये मूल रूप से डेनमार्क के निवासी थे.

ग्राम स्टेन (Gram stain) एक ऐसा तरीका है, जिसकी सहायता से जीवाणु को अलग-अलग प्रजातियों में बांटा जा सकता है. हंस क्रिस्चियन ग्राम ने बैक्टीरिया को दो प्रमुख प्रजातियों में बांटा अर्थात इन्होंने बैक्टीरिया को ग्राम-धनात्मक और ग्राम-ऋणात्मक वर्गों में विभक्त किया. इन दो तरीको से इन्होंने बैक्टीरिया को अलग-अलग बांट दिया. 

गूगल ने डूडल के जरिए ग्राम के प्रयोग से लेकर माइक्रोस्कोप और बैक्टीरिया के नमूनों की बारीकी से सब कुछ दिखाया गया है. साल 1878 में कोपेनहेगन विश्वविद्यालय से अपने एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) अर्जित करने के बाद, ग्राम ने यूरोप में जीवाणु विज्ञान और फार्माकोलॉजी का अध्ययन किया. 

हंस क्रिस्चियन ग्राम ने बैक्टीरिया को उनके रासायनिक और भौतिक गुणों के आधार पर वर्गीकृत किया. बैक्टीरिया की भीतरी झिल्ली के आधार पर और इसके भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर हंस ने इनको अलग-अलग प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया.

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साल 1878 से लेकर 1885 में इन्होंने यूरोप की यात्रा की इसके बाद बर्लिन में 1884 में बैक्टीरिया के वर्गीकरण करने का तरीका निजात किया. उनके इसी काम के लिए उन्हें आज भी विश्वभर में याद किया जाता है. 14 नवंबर 1938 में इन्होंने संसार को अलविदा कहा और निरनिद्रा में लीन हो गए.