डॉक्टरों और नर्सों से मारपीट करने वालों की अब खैर नहीं, सरकार ला रही है कड़ा कानून

डॉक्टरों और नर्सों पर लगातार मारपीट और हमले की घटनाओं से चिंतित सरकार अब इसको लेकर नया कानून लाने जा रही है. नए कानून के तहत डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े किसी भी कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना को संज्ञेय अपराध माना जाएगा और ये गैर जमानती होगा. 

डॉक्टरों और नर्सों से मारपीट करने वालों की अब खैर नहीं, सरकार ला रही है कड़ा कानून
(प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: डॉक्टरों और नर्सों पर लगातार मारपीट और हमले की घटनाओं से चिंतित सरकार अब इसको लेकर नया कानून लाने जा रही है. नए कानून के तहत डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े किसी भी कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना को संज्ञेय अपराध माना जाएगा और ये गैर जमानती होगा. 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इस पर जनता से सुझाव और आपत्ति मांगी गई है. इसका नाम द हेल्थकेयर सर्विस पर्सनल और क्लिनिकल इस्टेबलिशमेंट (प्रोहिबिह्शन ऑफ वायलेंस और डेमेज टू प्रॉपर्टी) बिल 2019. 'The healthcare service personnel and clinical establishments(prohibition of violence and damage to property) Bill 2019'

प्रस्तावित कानून की प्रमुख बातें- 
नए कानून के तहत निजी तौर पर प्रेक्टस करने वाले डॉक्टरों को भी सरंक्षण. डॉक्टरों, नर्सों या फिर स्वास्थ्य सेवा से जुड़े किसी भी तरह के स्टॉप के साथ मारपीट करना गंभीर अपराध की श्रेणी में होगा और ये गैर जमानती अपराध होगा.

नए कानून में डॉक्टरों, नर्सो और स्वास्थ्य कर्मी के साथ किसी तरह की अपशब्दों का इस्तेमाल भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगी. नए कानून के तहत स्वास्थ्य कर्मी के साथ ऐसे किसी भी तरह के अपराध में शामिल व्यक्ति को कम से कम छह माह से लेकर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है और जुर्माना लगेगा वो अलग से.

जुर्माने की राशि कम से कम 50 हजार होगी और अधिकतम 5 लाख जबकि ऐसी हेल्थकेयर स्टॉफ के साथ ऐसी हिंसा जो भारतीय दंड संहिता 320 के तहत कवर होती है ऐसे मामलों में नए कानून में कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान होगा और 2 लाख से लेकर 10 लाख तक जुर्माना ऐसे मामलों की जांच डिप्टी सुपरीडेंट आफ पुलिस के स्तर का अधिकारी या उसके ऊपर का अधिकारी ही जांच कर पाएगा.

सरकार ने नए ड्राफ्ट का नोटिस जारी कर दिया है और 30 दिन के भीतर कोई भी इस ड्रॉफ्ट को लेकर सुझाव और आपत्तियां दे सकता है. इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि ऐसी घटनाएं या हरकत जिससे किसी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कर्मचारी को चोट पहुंचती है, उसकी जान-माल का नुकसान करती है या फिर संस्थान को क्षति पहुचाती हैं. इस कानून के दायरे में होगी. ऐसी घटनाएं अपराधिक की श्रेणी में आएगी और ऐसा करना गैर जमानती होगा. जो डॉक्टर, नर्स या फिर कोई कर्मचारी घायल होता है या उसकी जानमाल का नुकसान होता है तो उसको क्षतिपूर्ति का प्रावधान भी नए कानून में होगा.

महत्तपूर्ण बात ये है कि नये कानून में अस्पताल,नर्सिंग होम, डिस्पेंसरी, डायग्नोस्टिक सेंटर के अलावा वे सारे इस्टेबलिशमेंट कवर होंगे जहा किसी तरह की स्वास्थ्य सेवा का संचालन किया जाता है. कोई भी सरकारी डिपार्टमेंट के अलावा कोई भी ट्रस्ट वह चाहे पब्लिक हो या प्राइवेट, लोकल अथारिटी का हो या फिर सिंगल डॉक्टर सभी को इस नए कानून में सरंक्षण दिया गया है.

ड्राफ्ट से साफ है कि नजी तौर पर प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टर से भी यदि किसी ने मारपीट की घटना की तो उस पर भी इसी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी. मेडीकल और नर्सिंग स्टूडेंट से लेकर एंबूलेंस के नर्स और ड्राईवर और हेल्पर को भी इस कानून के तहत सरंक्षण मिलेगा.