लद्दाख विवाद: चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए भारत ने लिया यह फैसला

सीमा विवाद को तूल देकर चीन ने अपने लिए मुश्किलें खड़ी कर लीं हैं. लद्दाख की घटना के बाद भारत ने बीजिंग को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने के लिए कदम आगे बढ़ाया है.

लद्दाख विवाद: चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए भारत ने लिया यह फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: सीमा विवाद को तूल देकर चीन ने अपने लिए मुश्किलें खड़ी कर लीं हैं. लद्दाख की घटना के बाद भारत ने बीजिंग को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने के लिए कदम आगे बढ़ाया है. मोदी सरकार ने दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के Huawei सहित चीनी कंपनियों से अपग्रेडेशन गियर प्राप्त करने पर रोक लगा दी है. 

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एक अधिकारी के मुताबिक, दूरसंचार विभाग जल्द ही बीएसएनएल और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) द्वारा 4G टेक्नोलॉजी की स्थापना के लिए जारी टेंडर रद्द करेगा और चीनी कंपनियों को इससे बाहर करने के लिए नियमों में बदलाव किया जाएगा. यह Huawei और ZTE जैसी चीनी कंपनियों के लिए बड़े झटके की तरह है. क्योंकि इससे यह साफ हो जाएगा कि चीनी कंपनियां देश में 5G नेटवर्क से जुड़े प्रोजेक्ट्स से बाहर रहेंगी. 

जानकारी के अनुसार, सरकार अब मोबाइल क्षेत्र में चीनी निर्भरता को कम करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है. इसलिए BSNL के साथ ही निजी कंपनियों को भी चीन द्वारा निर्मित उत्पादों के इस्तेमाल में कमी लाने को कहा गया है. एक अनुमान के मुताबिक वर्तमान में भारतीय दूरसंचार उपकरणों का वार्षिक बाजार लगभग 12,000 करोड़ का है, जिसमें चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग एक चौथाई है. जबकि शेष बाजार में मुख्य रूप से स्वीडन की एरिक्सन, फिनलैंड की नोकिया और कोरिया की सैमसंग शामिल हैं. भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया यूरोपीय विक्रेताओं के अलावा Huawei और ZTE के साथ काम करती हैं, और रिलायंस जियो सैमसंग के साथ काम करती है.

दूरसंचार मंत्रालय ने बीएसएनएल, एमटीएनएल और अन्य सहायक कंपनियों को अपग्रेडेशन में चीनी उपकरणों से बचने के लिए कहा है. इसके अलावा, मंत्रालय ने सभी संबंधित विभागों को यह निर्देश भी दिया है कि वे भारत में निर्मित सामानों की खरीद को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता दें ताकि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम आगे बढ़ाया जा सके. इस तरह से देखें तो भारत ने चीन की कारगुजारियों का जवाब देने की शुरुआत कर दी है. जाहिर है ऐसे फैसलों से आने वाले दिनों में चीन को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. 

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