9वें ZEE जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का हुआ भव्‍य आगाज, सीएम वसुंधरा राजे ने किया उद्घाटन

राजस्‍थान की राजधानी और 'गुलाबी नगरी' जयपुर में 9वें ज़ी लिटरेचर फेस्टिवल का गुरुवार सुबह भव्‍य आगाज हुआ। राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे ने दीप प्रज्‍जवलित कर इस फेस्टिवल का आज उद्घाटन किया। इस अवसर पर देश-विदेश के कई दिग्‍गज लेखक व अन्‍य गणमान्‍य अतिथि उपस्थित थे।

9वें ZEE जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का हुआ भव्‍य आगाज, सीएम वसुंधरा राजे ने किया उद्घाटन
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जयपुर: राजस्‍थान की राजधानी और 'गुलाबी नगरी' जयपुर में 9वें ज़ी लिटरेचर फेस्टिवल का गुरुवार सुबह भव्‍य आगाज हुआ। राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे ने दीप प्रज्‍जवलित कर इस फेस्टिवल का आज उद्घाटन किया। इस अवसर पर देश-विदेश के कई दिग्‍गज लेखक व अन्‍य गणमान्‍य अतिथि उपस्थित थे।

शास्त्रीय संगीत और कड़ाके की ठंड में चाय के प्यालों से उठती सकून भरी गर्माहट के साथ यहां दिग्गी पैलेस परिसर में ‘शब्दों का जश्न’ ज़ी जयपुर साहित्योत्सव शुरू हुआ। इस समारोह को शब्दों का जश्न करार देते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पारंपरिक दीप जलाकर समारोह का उद्घाटन किया और बचपन की यादों को साझा किया कि कैसे वह छुपछुप कर किताबें पढ़ा करती थीं। राजे ने कहा कि मेरे लिए यह बचपन में लौटने जैसा है। यहां बैठे बैठे एक जादुई दुनिया में पहुंच जाना, मैं सपने रचने वाले उन सभी लोगों का आभार जताना चाहती हूं जिन्होंने अपने विचारों और ख्यालों को बुनकर हमें यह सुखद अनुभव दिया। उन्होंने कहा कि यह एक शानदार अनुभव है जिसका आकार हर दिन बड़ा हो रहा है। मैं दिग्गी पैलेस को हर साल ऐसे ही गूंजते हुए देखना चाहती हूं और मैं चाहती हूं कि जयपुर ऐसे ही बेताबी के साथ हर साल इसका आयोजन करे।

 

 

बुकर पुरस्कार विजेता मार्ग्रेट एटवुड का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए राजे ने कहा कि यह समारोह उन्हें ऐसे लेखकों से मिलने का अवसर मुहैया कराता है जिनकी किताबें उन्होंने बीते सालों में पढ़ी हैं। कनाडाई कवयित्री और आलोचक एटवुड जयपुर फिल्मोत्सव में मुख्य अतिथि हैं। मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में एटवुड ने कहा कि पिछली बार वह 27 साल पहले भारत आई थीं और उस जमाने में देश में साहित्य उत्सव जैसी कोई चीज नहीं थी। एटवुड ने मजाकिया लहजे में कहा कि काफी समय बीत चुका है। यहां शामिल होने का आमंत्रण मिलने से मुझे लगता है कि मैं या तो बेहद महत्वपूर्ण हूं या बहुत बुजुर्ग और मेरा अंदाजा है कि यह बाद वाली बात होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय साहित्य परिदृश्य को विशाल और पेचीदा बताया तथा कहा कि इंटरनेट के प्रसार के साथ पाठकों की संख्या बढ़ रही है और किताबें अब कहीं अधिक आम आदमी तक पहुंच रही हैं।

एटवुड ने कहा कि ऐसी जगहों पर जहां लाइब्रेरी नहीं हैं या जहां लोग किताबें नहीं जुटा सकते वहां सेलफोन है जो न केवल पढ़ने बल्कि लिखने के लिए भी है। साहित्य तक अब अधिक पहुंच है। उत्सव की शुरूआत शास्त्रीय गायक गायत्री कौंडिन्या तथा राजस्थानी संगीतकारों नाथू लाल सोलंकी और छुग्गे खान के संगीत से हुई जिसमें साहित्य, इतिहास, राजनीति, अर्थव्यवस्था, कला तथा साहित्य जगत की 360 से अधिक हस्तियां एक मंच पर एकत्र होकर अगले पांच दिनों तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगी। नौंवे जयपुर साहित्योत्सव में इस बार विश्व साहित्य पर अधिक फोकस रहेगा।

समारेाह में भाग ले रहे लेखकों में कोल्म तोइबिन, मालरेन जेम्स, जैमेकाई कवि और लेखक केई मिलर, कामेडियन और अभिनेता स्टीफन फ्राई, स्लोवेनियाई लेखिका आंद्रेज बलात्निक, पत्रकार क्रिस्टीना लैम्ब और कई अन्य शामिल हैं। जेम्स को उनके उपन्यास ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री आफ सेवन किलिंग’ के लिए वर्ष 2015 का मैन बुकर पुरस्कार प्रदान किया गया था।

इस फेस्टिवल में 20 देशों के 25 भाषाओं के 222 से ज्‍यादा स्‍पीकर (वक्‍ता) शामिल हो रहे हैं। साहित्‍य के इस महाकुंभ में और भी कई दिग्‍गज शिरकत करेंगे। इस लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान विभिन्‍न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर 'मंथन' किया जाएगा। गौरतलब है कि ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत साल 2006 में हुई थी। यह दुनिया का सबसे बड़ा फ्री लिटरेचर फेस्टिवल है। इस वर्ष समारोह की सुरक्षा के लिए कड़े बंदोबस्त किए गए हैं।