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क्या राहुल गांधी और हार्दिक पटेल की 'दोस्ती' में आ गई दरार? ये तस्वीर बयां कर रही नई कहानी

हार्दिक पटेल ने बुधवार को अपने ट्विटर अकाउंट से एक तस्वीर ट्वीट की है. इसमें हार्दिक पटेल एनसीपी के बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल के साथ बैठे हुए हैं.

क्या राहुल गांधी और हार्दिक पटेल की 'दोस्ती' में आ गई दरार? ये तस्वीर बयां कर रही नई कहानी
गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के साथ एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल. तस्वीर साभार ट्विटर

नई दिल्ली: गुजरात विधानसभा चुनाव में जारी खेमेबाजी के बीच एक तस्वीर के सोशल मीडिया पर आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है. अब तक अटकलें लगती रही हैं कि मौजूदा समय में पाटीदार समाज के सबसे बड़े नेता हार्दिक पटेल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच दोस्ती हो गई है. पिछले दिनों मीडिया में आए एक सीसीटीवी वीडियो में दावा किया गया कि राहुल गांधी और हार्दिक पटेल होटल के कमरे में गुपचुप तरीके से मिले. हालांकि हार्दिक लगातार इस वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाते रहे. वे लगातार कहते रहे कि वे जब भी राहुल से मिलेंगे तो छुपाएंगे नहीं. इसी बीच हार्दिक पटेल ने बुधवार को अपने ट्विटर अकाउंट से एक तस्वीर ट्वीट की है. इसमें हार्दिक पटेल एनसीपी के बड़े नेता प्रफुल्ल पटेल के साथ बैठे हुए हैं. तस्वीर पोस्ट करते हुए हार्दिक ने लिखा है कि वे दिवाली की शुभकामना देने के लिए प्रफुल्ल पटेल से मिले थे. इस तस्वीर के आते ही गुजरात की राजनीति में नए तरीके से चर्चाएं शुरू हो गई हैं. आइए जानें इस तस्वीर के क्या मायने निकाले जा रहे हैं?

कहीं NCP में तो नहीं जा रहे हैं हार्दिक: पहली नजर में इस तस्वीर को देखकर अटकलें लगाई जा रही है कि हार्दिक पटेल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हो सकते हैं. कहा जा रहा है कि एनसीपी हार्दिक के सहारे गुजरात में पार्टी को खड़ा करने की कोशिश में है. दरअसल, महाराष्ट्र में एनसीपी काफी कमजोर हो गई है. इसके अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी शरद पवार की पार्टी की हालत बेहद खराब है. ऐसे कहा जा रहा है कि गुजरात में बीजेपी और कांग्रेस संघर्ष के बीच एनसीपी तीसरे विकल्प के रूप में खुद को पेश करने का प्रयास कर रही है. उम्र की बाध्यता के चलते इस बार हार्दिक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. ऐसे एनसीपी का प्लान हो सकता है कि वह 2019 के लोकसभा चुनाव में हार्दिक का लाभ ले सके.

कहीं इस मुलाकात में BJP का हाथ तो नहीं: राजनीतिक गलियारे में ये भी चर्चा है कि इस मुलाकात के पीछे बीजेपी का भी हाथ हो सकता है. महाराष्ट्र में शिवसेना के समर्थन खींचने की धमकी के बीच एनसीपी लगातार कहती रही है कि वह बीजेपी को बाहर से समर्थन कर देगी. इसके अलावा नरेंद्र मोदी सरकार में ही एनसीपी प्रमुख शरद पवार को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं. ये दोनों घटनाएं बताने के लिए नाकाफी हैं कि एनसीपी और बीजेपी के बीच कैसे राजनीतिक रिश्ते हैं. 

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कहा जा रहा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का हमेशा प्रयास रहता है कि भले ही किसी छोटे दल को लाभ पहुंच जाए, लेकिन किसी भी कीमत पर कांग्रेस को लाभ न हो. इसी रणनीति के तहत हो सकता है कि बीजेपी के इशारे पर एनसीपी ने हार्दिक पटेल को साथ लाने की कोशिश की हो.

हार्दिक पटेल के लिए NCP में ज्यादा मौके: राजनीति में हमेशा से कहा जाता है कि किसी बड़ी पार्टी में जाने से अच्छा है कि किसी क्षेत्रीय दल में अगर बड़े मौके मिले तो वे दूरगामी लाभ देते हैं. इस देश में कई ऐसे नेता हैं जो क्षेत्रीय दलों में रहते हुए खास रुतबा बनाने के बाद बड़े दलों का हिस्सा बने हैं. हार्दिक पटेल को लेकर भी कुछ ऐसी ही बातें सामने आ रही हैं. हार्दिक पटेल बीजेपी का विरोध कर अपनी छवि को स्थापित कर पाए हैं. ऐसे में वहां के लिए उनके दरवाजे नैतिक रूप से बंद हैं. 

वहीं कांग्रेस की गुजरात ईकाई में पहले से कई बड़े नेता हैं, जिनके बीच हार्दिक को अपनी पहचान बनाए रखना थोड़ा मुश्किल है. ऐसे हालात में अगर वे एनसीपी या किसी दूसरे दलों का हिस्सा बनकर अपनी राजनीतिक हैसियत चुनाव में साबित कर पाते हैं तो शायद कांग्रेस में लौटने पर उनका रुतबा और भी बढ़ जाए. गुजरात के पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में संजय निरुपम, नारायण राणे जैसे कई नेता हैं जिन्होंने छोटे दलों से करियर शुरू करने के बाद बीजेपी और कांग्रेस जैसे दलों में रुतबे साथ आए.