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सूरत अग्निकांड के बाद अवैध ढांचों पर कार्रवाई करेगी सरकार, आदेश जारी

गुजरात में अवैध ढांचे पर कार्रवाई के लिए 9,965 संपत्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं, और इसके लिए 713 टीमें तैनात की गई हैं  

सूरत अग्निकांड के बाद अवैध ढांचों पर कार्रवाई करेगी सरकार, आदेश जारी
सूरत में अग्निकांड के बाद सरकार अवैध ढांचों पर कार्रवाई करेगी. (फाइल फोटो)

गांधीनगरः सूरत में एक अवैध ढांचे में आग लगने के कारण 22 विद्यार्थियों की मौत हो जाने के बाद गुजरात सरकार ने रविवार को राज्य में 9,000 से अधिक संपत्तियों के बिल्डरों से कहा कि वे तीन दिनों के भीतर अग्नि सुरक्षा के उपकरण स्थापित करें, अन्यथा कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें. इनमें से 1,100 संपत्तियां सूरत में हैं.

गुजरात के मुख्यसचिव जेएन सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, "यह एक बुरा सबक है, लेकिन हम यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई शुरू करेंगे कि इस तरह की घटना कहीं दोबारा न घटे. सूरत में आग से हम बहुत दुखी हैं."

उन्होंने कहा कि गुजरात में 9,965 संपत्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं, और इसके लिए 713 टीमें तैनात की गई हैं.

सिंह ने कहा कि शनिवार और रविवार के बीच प्रशासन ने अग्नि सुरक्षा नियमों के विभिन्न उल्लंघनों के लिए सूरत में कम से कम 50 संपत्तियों को सील कर दिया है. सूरत में 1,123 संपत्तियों को अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं.

सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी बहुत परेशान हैं और सख्त कार्रवाई चाहते हैं. रूपाणी अग्निकांड के बाद तत्काल सूरत पहुंचे थे.

सूरत के सरथना इलाके में स्थित तीन मंजिला इमारत तक्षशिला की छत पर चौथी मंजिल के रूप में बने एक ढाचे में चल रहे एक कोचिंग सेंटर में पढ़ रहे 22 विद्यार्थियों की जान शुक्रवार को इस अग्निकांड में चली गई. इन विद्यार्थियों की उम्र 14 से 17 साल थी.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अग्निकांड में झुलसे 14 विद्यार्थियों का इलाज अभी भी सूरत के चार विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है. इनमें से तीन को गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया है.

राज्य के मुख्य सचिव ने कहा कि सूरत नगर निगम ने इमारत की चौथी मंजिल पर बने ढाचे में अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने के लिए उप अग्निशमन अधिकारी एस.के. आचार्य और अग्निशमन अधिकारी को पहले ही निलंबित कर दिया है. इमारत को अग्निशमन विभाग की ओर से कोई अनापत्ति प्रमाण नहीं मिला था.