‘गुजरात के 6,000 गांव खुले में शौच से मुक्त हुए’

गुजरात सरकार ने आज कहा कि राज्य में 6,000 गांव खुले में शौच से मुक्त बन गए हैं। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जयंती कावड़िया ने यहां एक कार्यक्रम में दावा किया कि राज्य में सभी 18,000 गांव 2019 से पहले ही खुले में शौच से मुक्त हो जाएंगे। केन्द्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत 2019 तक पूर्ण स्वच्छता का लक्ष्य रखा है।

गांधीनगर: गुजरात सरकार ने आज कहा कि राज्य में 6,000 गांव खुले में शौच से मुक्त बन गए हैं। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जयंती कावड़िया ने यहां एक कार्यक्रम में दावा किया कि राज्य में सभी 18,000 गांव 2019 से पहले ही खुले में शौच से मुक्त हो जाएंगे। केन्द्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत 2019 तक पूर्ण स्वच्छता का लक्ष्य रखा है।

मंत्री ने कहा, ‘पिछले दो साल में हमने पूरे गुजरात में 12.50 लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया है। इसके परिणाम स्वरूप 6,000 गांव अब खुले में शौच से मुक्त हैं। फिलहाल, राज्य में 30 तालुकाओं में 100 प्रतिशत शौचालय सुविधा है।’ कावड़िया ने कहा, ‘केन्द्र सरकार चाहती है कि प्रत्येक राज्य 2019 तक 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करे। वर्ष 2019 में राष्ट्र महात्मा गांधी की 125वीं जयंती मना रहा होगा। मेरा पूरा विश्वास है कि गुजरात 2019 से काफी पहले ही यह लक्ष्य हासिल कर लेगा।’ मुख्यमंत्री आनंदबेन पटेल ने 1960 से 1995 के बीच सत्ता में रहते इस मुद्दे का समाधान नहीं करने के लिए राज्य में कांग्रेस नीत सरकार की आलोचना की।

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस गुजरात में करीब 40 साल सत्ता में रही। हालांकि, उन्होंने इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। हमारी सरकार एक शौचालय का निर्माण कराने के लिए 12,000 रपये की वित्तीय मदद दे रही है। मुझे विश्वास है कि हम 2019 से पहले ही यह लक्ष्य हासिल कर लेंगे।’ पटेल ने राज्य सरकार की ‘स्मार्ट विलेज’ पहल की भी घोषणा की जिसके तहत पहले चरण में 300 गांवों का चयन किया जाएगा। इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों को एक विजन दस्तावेज के साथ एक आवेदन जमा करना होगा। विजन दस्तावेज में उन्हें यह रूपरेखा प्रस्तुत करनी होगी कि कैसे वे अपने गांव को एक स्मार्ट गांव में तब्दील करेंगे। इस कार्यक्रम में 6,000 गांवों के करीब 3,000 सरपंचों को सम्मानित किया गया।