हार्दिक पटेल को राहत, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप रद्द लेकिन देशद्रोह का बरकरार

  पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को कुछ राहत देते हुए गुजरात उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ लगाया गया ‘‘सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने ’ का आरोप रद्द कर दिया लेकिन देशद्रोह के आरोप को बरकरार रखा। साथ ही, देश की तरक्की के रास्ते में बाधक के तौर पर आरक्षण व्यवस्था की आलोचना की।

हार्दिक पटेल को राहत, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप रद्द लेकिन देशद्रोह का बरकरार
फाइल फोटो

अहमदाबाद:  पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को कुछ राहत देते हुए गुजरात उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ लगाया गया ‘‘सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने ’ का आरोप रद्द कर दिया लेकिन देशद्रोह के आरोप को बरकरार रखा। साथ ही, देश की तरक्की के रास्ते में बाधक के तौर पर आरक्षण व्यवस्था की आलोचना की।

सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में संभावित मौत की सजा का प्रावधान है जबकि देशद्रोह में आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है । न्यायमूर्ति जे एस पारदीवाला ने अपने आदेश में हार्दिक तथा उनके पांच साथियों के खिलाफ प्राथमिकी में से देशद्रोह के आरोप को हटाने से इंकार करते हुए कहा, ‘ यदि कोई मुझसे पूछे कि दो ऐसी चीजों के नाम बताओ जिन्होंने इस देश को तबाह किया है या देश को सही दिशा में तरक्की करने से रोका है तो यह है आरक्षण और भ्रष्टाचार ।’ उन्होंने अपने आदेश में कहा, ‘ बरसों की आजादी के बाद भी आरक्षण की मांग करना इस देश के किसी भी नागरिक के लिए बेहद शर्मनाक है ।

जब हमारा संविधान बनाया गया था , तो यह समझा गया था कि आरक्षण दस साल के लिए रहेगा लेकिन दुर्भाग्य से यह आजादी के 65 साल बाद भी जारी है ।’ अदालत ने कहा, ‘ आरक्षण केवल एक सुरसा की तरह अपना मुंह फैलाकर लोगों के बीच वैमनस्य के बीज बो रहा है । किसी भी समाज में मैरिट के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता । मैरिट एक सकारात्मक लक्ष्य के लिए होती है..जो उन्हें पुरस्कृत करने के लिए होती है जिन कार्यो को अच्छा माना जाता है ।’ आदेश में कहा गया, ‘ हास्यास्पद स्थिति यह है कि भारत ही केवल एक ऐसा देश होगा जहां कुछ नागरिक पिछड़ा कहलाए जाने की कामना करते हैं ।’ न्यायाधीश ने पटेल कोटा आंदोलन के नेताओं से आरक्षण के लिए हिंसा में शामिल होने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने को कहा।