गुजरात: कबाड़ में पड़ी साइकिलों को Recycle करके दोबारा इस्तेमाल करने का अनोखा प्रोजेक्ट

शहर की वेस्ट साइकिल को रिसायकल कर उन्हें जरुरतमंदों को दिया जाएगा.

गुजरात: कबाड़ में पड़ी साइकिलों को Recycle करके दोबारा इस्तेमाल करने का अनोखा प्रोजेक्ट
पर्यावरण के संरक्षण के उद्देश्य से इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है.

अहमदाबाद: नॉन मोटर व्हीकल को प्रमोट करने के लिए सूरत में शुरू किये गए प्रोजेक्ट को अंतराष्ट्रीय अध्ययन के लिए भेजा जाएगा. शहर की वेस्ट साइकिल को रिसायकल कर उन्हें जरुरतमंदों को दिया जाएगा. पर्यावरण के संरक्षण के उद्देश्य से इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है. वर्ष 2020 में होने वाले अंतराष्ट्रीय बाइसिकल मेयर कौंसिल में इस प्रोजेक्ट के लाभों के बारे में चर्चा की जाएगी.

सूरत के सरदार वल्लभ भाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के परिसर में धूल खा रही पुरानी सायकिलों की संख्या हज़ारों में है और इसका फिलहाल कोई उपयोग नहीं है और ऐसे ही शहर के अन्य इलाकों में भी हजारों की संख्या में साइकिल धूल खा रही है. ऐसी सायकिलों को रिसायकल कर के जरुरतमंदों को देने का ये प्रोजेक्ट सूरत के साइकिल मेयर सुनील जैन द्वारा शुरू किया गया है.

इस प्रोजेक्ट का मुख्या हेतु पर्यावरण की रक्षा करना है. संयुक्त राष्ट्र दुनियाभर में नॉन मोटर व्हीकल को प्रमोट करने के लिए विविध स्टार पर अभियान चला रहा है. जिसके लिए 2035 तक का समय दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र अभियान में भारत ने भी प्रतिबद्धता दिखाई है. सूरत भी इस दिशा में काम कर रहा है. यूरोप में इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा होगी.

सूरत के बाइसिकल मेयर सुनील जैन साइकिल पर काम कर रहे हैं. उनका मुख्य उद्देश्य है कि लोग मोटर व्हीकल से साइकिल पर शिफ्ट करवाना है. जो साइकिल को लोग उपयोग नहीं कर रहे हैं और पड़ी-पड़ी धूल खा रही है उन्हें रिपेयर कर के जरुरत मंद लोगों को देने पर फोकस किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट को यूरोप में होने वाले अध्यन किया जायगा. वर्ष 2020 में प्रस्तावित अंतराष्ट्रीय मेयर कौंसिल में इस प्रोजेक्ट का अध्यन किया जायगा. रिसर्च के बाद ये प्रोजेक्ट दुनिया भर के शहरों में लागू करने की संभावना के ऊपर विचार भी किया जाएगा.

बाइसिकल कैपिटल के रूप में अपनी पहचान बना चुकी नेधरलैंड की संस्था बी.वाय.इ.एस संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोयल 2030 के ऊपर काम कर रहा है. जिसका लक्ष्य 50 बाय 30 का है जिसका अर्थ 2030 तक आधी जनसंख्या साइकिल का उपयोग करेगा. संस्था ने दुनिया भर में साइकिल प्रमोट करने के लिए बाइसिकल मेयर नियुक्ति की है. सूरत के बाइसिकल मेयर सूरत जैन है.

एक समय में बैंकर रह चुके सुनील जैन शहर भर में यूज़लेस हो चुकी साइकलों को एकत्रित कर रहे हैं और उन्हें एक साथ वर्कशॉप में भेज कर रिपेयर किया जायगा. इसका खर्च भी उनकी टीम द्वारा ही उठाया जाएगा. रिपेयर की गई साइकिल जरुरतमंद लोगों और छात्रों को दी जाएगी, लेकिन उन्हें ये साइकिल ऐसे ही नहीं दी जाएगी. ये साइकिल उन्हें तब मिलेगी जब वे पांच वृक्षों का रोपण करेंगे और उसकी तस्वीर संस्था को देंगे. ये साइकिल का वे अपनी जरुरत के हिसाब से उपयोग कर रहे है या नहीं ? इसकी भी संस्था भविष्य में ध्यान रखेगा. पहले चरण में सुनील जैन के पास 500 यूज़लेस साइकिल है. जिसे कुछ ही समय में रिपेयर कर के लोगों को दी जाएगी. इस प्रोजेक्ट के तहत शहर के उद्योगपतियों को भी साइकिल उसे करने के लिए जागरूक किया जाएगा.