गुमनामी बाबा ही थे नेताजी? बक्से से मिली चीजों के आधार पर लोग कर रहे दावा, देखें तस्वीरें

नेताजी सुभाषचंद्र बोस होने के दावे के बीच गुमनामी बाबा एक बार फिर सुर्खियों में है। यूपी के फैजाबाद जिला प्रशासन ट्रेजरी में बंद उनके सामानों को बाहर निकाला जा रहा है। इन दिनों फैजाबाद ट्रेजरी में बंद उनका बक्सा खोला जा रहा है। इनमें से कुछ ऐसी चीजें मिली हैं जिसके आधार पर वहां के लोग एक बार फिर यह दावा कर रहे हैं कि गुमनामी बाबा ही नेताजी थे।

गुमनामी बाबा ही थे नेताजी? बक्से से मिली चीजों के आधार पर लोग कर रहे दावा, देखें तस्वीरें

नई दिल्ली: नेताजी सुभाषचंद्र बोस होने के दावे के बीच गुमनामी बाबा एक बार फिर सुर्खियों में है। यूपी के फैजाबाद जिला प्रशासन ट्रेजरी में बंद उनके सामानों को बाहर निकाला जा रहा है। इन दिनों फैजाबाद ट्रेजरी में बंद उनका बक्सा खोला जा रहा है। इनमें से कुछ ऐसी चीजें मिली हैं जिसके आधार पर वहां के लोग एक बार फिर यह दावा कर रहे हैं कि गुमनामी बाबा ही नेताजी थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गुमनामी बाबा से जुड़ी वस्तुओं के पिटारे से मिली टाइप राइटर और दूसरी कई चीजों ने उनके रहस्य को कई गुना बढ़ा दिया है। जापानी क्राकरी का सेट भी बक्से निकला है। निकले सामानों से यह साबित होता है कि शायद गुमनामी बाबा ही नेताजी थे। बक्से से बहुत सारी किताबें भी मिली हैं जो नेताजी से जुडी हुई दिख रही हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वो किताबें हैं जब भारत हिन्द फौज की स्थापना हुई थी और वे जर्मनी में रह रहे थे।

22वें बक्से से 350 किताबें और 100 दूसरी वस्तुएं मिलीं। किताबों से गुमनामी बाबा की राजनीतिक जिज्ञासा का अंदाजा भी लगाया जा सकता है। योग, सम्मोहन, तंत्र, हस्तेरखा, चिकित्सा व देश के मौजूदा हालात सभी क्षेत्रों में उनकी खास दखलंदाजी थी। जर्मनी की बनी दूरबीन को उन्हें किसी और ने क्यों भेंट की, यह गूढ़ रहस्य है।

गौर हो कि सरकारी दस्तावेज के मुताबिक नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में हुई थी हालांकि इस बात के अभी तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी 23 जनवरी को उनसे जुड़े सभी दस्तावेज को सार्वजानिक कर दिया था।

गुमनामी बाबा के बक्से और झोले से मिले सामानों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी होगी, फिर उनकी इन्वेंट्री बनाई जाएगी। फिर टेक्नोलॉजी कमेटी इन सामानों को टेस्ट करेगी। इसके बाद इन्हें अयोध्या में बने इंटरनेशनल रामकथा म्यूजियम में रखा जाएगा। पूरी कवायद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के तहत की जा रही है।