तो कांग्रेस के लिए शिवसेना अब सेक्युलर हो गई? कुर्सी के लिए विचारधारा कुर्बान?

भगवा विचारधारा पर गर्व  करने वाली शिवसेना भी अब कुर्सी के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करती नजर आ रही है. 

तो कांग्रेस के लिए शिवसेना अब सेक्युलर हो गई? कुर्सी के लिए विचारधारा कुर्बान?
एनसीपी, शिवसेना, कांग्रेस एक साथ सरकार बनाने पर सहमत हो गई हैं.

नई दिल्ली/मुंबई: सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र (Maharashtra) में कल गठबंधन सरकार का ऐलान हो सकता है. एनसीपी, शिवसेना, कांग्रेस (NCP-Congress-Shiv Sena) एक साथ सरकार बनाने पर सहमत हो गई हैं. ये वही शिवसेना (Shiv Sena) है जिसे सांप्रदायिक पार्टी बताकर कांग्रेस ने कभी बैन लगाने की मांग की थी. शरद पवार (Sharad Pawar) ने भी शिवसेना से हमेशा राजनीतिक दूरियां बनाकर रखीं. वहीं भगवा विचारधारा पर गर्व  करने वाली शिवसेना भी अब कुर्सी के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करती नजर आ रही है. कांग्रेस- एनसीपी ने बीजेपी-शिवसेना को सांप्रदायिक पार्टी बताकर महाराष्ट्र की जनता से वोट मांगा था. अब महाराष्ट्र के मुस्लिम कह रहे हैं कि कांग्रेस उनके साथ धोखा कर रही है. महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार की कोशिशों पर कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने ये कहकर सवाल उठाए हैं कि ये सरकार लंबे समय तक नहीं चलेगी. निरुपम ने कहा कि ये कांग्रेस के लिए घातक होगा. 

सवाल ये कि महाराष्ट्र में सत्ता के लिए सबसे बड़ा समझौता? कांग्रेस का मुस्लिमों से सबसे बड़ा 'विश्वासघात'? शिवसेना ने कुर्सी के लिए विचारधारा को कुर्बान किया? कांग्रेस-NCP के लिए सिद्धांत नहीं सत्ता ही सत्य ? सीएम पद के लिए शिवसेना को सेक्युलर होना मंज़ूर? सियासत का सबसे बड़ा 'सांप्रदायिक सौदागर' कौन?

उद्धव ठाकरे बन सकते हैं मुख्यमंत्री
महाराष्ट्र सरकार पर NCP-कांग्रेस की बैठक हुई. सभी मुद्दों पर सहमति का दावा किया गया. शिवसेना-एनसीपी में से कौन बनेगा पहले ढाई साल मुख्यमंत्री अब तक तय नहीं. उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन सकते हैं. NCP के अजीत पवार डिप्टी सीएम और कांग्रेस की तरफ से बाला साहेब थोराट उपमुख्यमंत्री बन सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, पहले ढाई साल एनसीपी का सीएम हो सकता है. सुप्रिया सुले पहली पसंद हैं. साझा सरकार में शिवसेना के 16 तो एनसीपी के 15 मंत्री हो सकते हैं. कांग्रेस को 12 मंत्रियों के साथ स्पीकर और डिप्टी सीएम की कुर्सी मिल सकती है. महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना सेक्युलर बनने के लिए तैयार है. कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में सेक्युलर रहने की बात पर उद्धव राजी हैं. बड़ा सवाल- क्या अब हिंदुत्व की विचारधारा से भी करेगी समझौता? 
 
महाराष्ट्र में सत्ता के लिए सिद्धांत की 'आहूति'?
बीजेपी नेता शाहनवाज़ हुसैन ने कांग्रेस-शिवसेना के गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा, "कांग्रेस को जवाब देना होगा कि वो जय भवानी जय शिवाजी बोलेंगे या नहीं, वीर सावरकर को भारत रत्न मानेंगे या नहीं, वो बाला साहेब और उद्धव ठाकरे के विचार से सहमत रहेंगे या नहीं." उधर, मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने गठबंधन पर अपनी ही पार्टी को घेरते हुए कहा, "ये जो सरकार होगी ये लूली-लंगड़ी सरकार होगी. इसके भविष्य की गारंटी भगवान भी नहीं ले सकते और ऐसे में जब शिवसेना ने एक राजनीतिक अस्थिरता निर्माण करने का पाप किया है तो उस पाप की सज़ा कांग्रेस क्यों भोगे, ये सवाल मेरे मन में है." 

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नीति, नीयत, सिद्धांत पर भारी, मतलब की यारी?
मुंबई बीजेपी नेता राम कदम ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "जनादेश का अपमान हो रहा है, शिवाजी महाराज का शिव आता है, भगवान शंकर जी का शिव आता है, तो पहले ही दिन से यदि ये शिव नाम को छोड़ना चाहते हैं तो ये तीनों दल मिलकर के किस ओर जा रहे हैं हम समझ सकते हैं." उधर, शिवसेना नेता संजय राउत ने गठबंधन का बचाव करते हुए कहा, "इस देश का संविधान सेक्यूलर शब्द से ही जुड़ा है. इस देश में जो भी काम होता है आज भी वो जाति और धर्म को देखकर नहीं कोई काम करता। जो इस देश का नागरिक है वो सभी देश के हिस्सेदार है ये हम सब मानते हैं."