क्या कांग्रेस के 'हाथ' में बन गई है हार की लकीर?

यूपी में वर्ष 2017 में जब अखिलेश यादव ने यूपी में गठबंधन करके कांग्रेस को 110 सीटें ऑफर की थीं तो राहुल गांधी बुरा मान गये थे. कांग्रेस ने कहा था कि राष्ट्रीय पार्टी के साथ ऐसा कोई करता है क्या, कुछ तो सम्मान रखिये.

क्या कांग्रेस के 'हाथ' में बन गई है हार की लकीर?

नई दिल्ली: यूपी में वर्ष 2017 में जब अखिलेश यादव ने यूपी में गठबंधन करके कांग्रेस को 110 सीटें ऑफर की थीं तो राहुल गांधी बुरा मान गये थे. कांग्रेस ने कहा था कि राष्ट्रीय पार्टी के साथ ऐसा कोई करता है क्या, कुछ तो सम्मान रखिये. इसके बाद यूपी में चले मोदी मैजिक और योगी लहर ने अखिलेश का भी सूपड़ा साफ कर दिया.

कांग्रेस ने साइकल पंक्चर करने के बाद लालटेन बुझवा दी!
कुछ ऐसा ही हाल मंगलवार को बिहार में भी हुआ. RJD ने बिहार में कांग्रेस को 70 सीटें दी. लेकिन कांग्रेस केवल 19 सीटें जीत पाई और 51 हार गईं. कांग्रेस ने पहले साइकिल पंचर की, फिर लालटेन बुझवा दी. इसीलिये अब कांग्रेस निशाने पर है. सवाल उठने लगे हैं कि कैसी कांग्रेस, काहे की राष्ट्रीय पार्टी? विपक्ष कह रहा है कि मोदी से लड़ना है तो अब कांग्रेस को छोड़कर आगे बढ़ना होगा. लेकिन ये क्या वाकई इतना आसान है. 

क्या तेजस्वी की हार के लिए राहुल जिम्मेदार हैं?
सवाल उठ रहे हैं कि तेजस्वी की हार के लिए क्या राहुल जिम्मेदार हैं?, क्या कांग्रेस के 'हाथ' में हार की लकीर बन गई है?, क्या कांग्रेस से रिश्ते का मतलब अब हार से नाता हो गया है? क्या कांग्रेस अब 'राष्ट्रीय विकल्प' नहीं रह गई है? क्या ब्रांड मोदी के मुकाबले अब कोई सामने नहीं है?

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