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नए सेना प्रमुख बिपिन रावत की नियुक्ति पर सरकार ने दी ये 'दलील', कहा- मेरिट के आधार पर हुआ चयन

मोदी सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को अगला सेना अध्यक्ष घोषित कर दिया है। कांग्रेस और वाम दलों ने बिपिन रावत की नियुक्ति पर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने कहा है कि नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया। रावत की नियुक्ति का बचाव करते हुए सरकार ने जवाब दिया है कि निर्णय पूरी तरह से योग्यता के आधार पर लिया गया है। सरकार की तरफ से साथ ही कहा गया है कि नियुक्ति सुरक्षा हालातों और आवश्यकताओं के आधार पर की गई है।

नए सेना प्रमुख बिपिन रावत की नियुक्ति पर सरकार ने दी ये 'दलील', कहा- मेरिट के आधार पर हुआ चयन

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को अगला सेना अध्यक्ष घोषित कर दिया है। कांग्रेस और वाम दलों ने बिपिन रावत की नियुक्ति पर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने कहा है कि नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया। रावत की नियुक्ति का बचाव करते हुए सरकार ने जवाब दिया है कि निर्णय पूरी तरह से योग्यता के आधार पर लिया गया है। सरकार की तरफ से साथ ही कहा गया है कि नियुक्ति सुरक्षा हालातों और आवश्यकताओं के आधार पर की गई है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने दलील दी कि बिपिन रावत की नियुक्ति में पूरी तरह 'योग्यता' का पालन किया गया। उत्तर भारत में सैन्य बल के पुनर्गठन, पश्चिम से जारी आतंकवाद व छद्म युद्ध और पूर्वोत्तर में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बिपिन रावत सबसे सक्षम जनरल पाए गए। रावत का सैन्य ऑपरेशन में अनुभव और ‘सक्रियता’ उनके पक्ष में रही।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि नये सेना प्रमुख को पांच सबसे वरिष्ठ अधिकारियों के समूह में से चुना गया जो सभी सक्षम हैं और रावत की नियुक्ति को अन्य के खिलाफ नकारात्मक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विपक्षी पार्टी पर निशाना साधते हुए शर्मा ने कहा कि कांग्रेस द्वारा सेना प्रमुख की नियुक्ति का ‘राजनीतिकरण’ करना उसकी ‘हताशा’ को दिखाता है क्योंकि वह कई चुनावी हारों के बाद राष्ट्रीय राजनीति में ‘हाशिये’ पर आ गई है।

रक्षा मंत्रालय सूत्रों ने जोर दिया कि थलसेना प्रमुख का चयन सरकार का विशेषाधिकार है और यह पूरी तरह से गुण पर आधारित है। मंत्रालय ने शीर्ष पद पर ले. जनरल रावत के चयन के लिए वजहों में जम्मू कश्मीर में 19वें डिविजन के कमांडिंग अधिकारी के रूप में उनके ‘बेहतरीन’ रिकार्ड और रक्षा मंत्रालय तथा सेना मुख्यालय के कामकाज से उनके परिचय को बताया।

मंत्रालय सूत्रों ने कहा कि सेना कमांडरों के रैंक के अधिकारियों के पैनल में सभी अधिकारी सक्षम हैं और सर्वाधिक योग्य का चयन किया गया है। सूत्रों ने जोर दिया कि पैनल से सर्वाधिक योग्य का चयन करना सरकार का विशेषाधिकार होता है। उन्होंने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा स्थिति और भविष्य के परिदृश्य के आधार पर सर्वाधिक योग्य अधिकार के चयन का अंतिम फैसला करती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में, आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला अहम मुद्दे हैं।

तिवारी ने कहा कि ले. जनरल रावत जिन्हें थलसेनाध्यक्ष नियुक्त किया जा रहा है, के पास शायद सभी जरूरी योग्यताएं हों लेकिन तथ्य यह है कि पदानुक्रम के मामले में सजग इस संगठन में वरिष्ठता का सिद्धांत काफी पवित्र होता है। उन्होंने कहा कि तीन वरिष्ठ अधिकारियों, ले. जनरल प्रवीण बख्शी ले. पी एम हैरितज और शायद ले. जनरल बी एस नेगी की अनदेखी सांस्थानिक निष्ठा को लेकर बेहद गंभीर सवाल खडे करती है। हालांकि वरिष्ठ सेना अधिकारियों ने कहा कि सिर्फ सबसे वरिष्ठ कमांडर ले. जनरल बख्शी और ले. जनरल हैरिज की वरीयता को नजरअंदाज कर ले. जनरल रावत की नियुक्ति की गयी है।  

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद माने जाते हैं। दरसअल, पिछले साल म्यांमार में नगा आतंकियों के खिलाफ की गई सफल सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही वे पीएम की निगाहों में आ गए थे। पाक अधिकृत कश्मीर में की गई सर्जिकल स्टाइक में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। रावत 1978 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। अपने लंबे करियर में उन्होंने पाकिस्तान सीमा के साथ-साथ चीन सीमा पर भी लंबे समय तक कार्य किया है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)