नागरिकता बिल पर बोले गृहमंत्री अमित शाह, 'गलत साबित कीजिए वापस ले लूंगा'

दोबारा शुरू हुई बहस में गृहमंत्री शाह ने विपक्षी नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा, 'मैं फिर से एक बार स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी पर अन्याय नहीं होगा, होगा तो न्याय ही होगा. 

नागरिकता बिल पर बोले गृहमंत्री अमित शाह, 'गलत साबित कीजिए वापस ले लूंगा'
नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 बिल पर गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं के सवालों का जवाब दिया.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 (Citizenship Amendment Bill 2019) पेश किया. विपक्षी दलों ने इसे बुनियादी तौर पर असंवैधानिक बताया और भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करार देते हुए विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई. निचले सदन में इसके पक्ष में 293, जबकि विपक्ष में कुल 82 मत पड़े. विधेयक के बारे में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने विपक्षी नेताओं के आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, 'मैं विश्वास दिलाता हूं कि विधेयक भारतीय संविधान के किसी भी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं करता है और किसी भी नागरिक को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा.'

'दूसरे देश से आए लोगों को भी सुविधा मिलनी चाहिए'
दोबारा शुरू हुई बहस में गृहमंत्री शाह ने विपक्षी नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा, 'मैं फिर से एक बार स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी पर अन्याय नहीं होगा, होगा तो न्याय ही होगा. अगर आप इस बिल को गलत साबित कर दें मैं इसे वापस ले लूंगा. राजनीतिक एजेंडा क्या होता है हम चुनाव में जाते हैं, हर पार्टी घोषणापत्र निकालती है, उसका प्रचार करते हैं. ये संवैधानिक प्रक्रिया है. किसके आधार पर चुनाव लड़ना चाहिए. मैं मानता हूं पार्टी की विचारधारा और घोषणापत्र के आधार पर लड़ना चाहिए. ये घोषणापत्र देश की जनता की भावनाओं का प्रतिनिधि होता है. 2014 और 2019 में दोनों घोषणापत्रों में हमने कहा था हम हमारे पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देंगे.

शाह ने कहा कि आप लोगों के मुंह से बहुत बार सुना है अल्पसंख्यकों को विशेष सुविधा मिलनी चाहिए, तो क्या बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को सुविधा नहीं मिलनी चाहिए. हमने ये भी कहा था पूर्वोत्तर के लोगों की भाषा, संस्कृति को बचाने का भी काम करेंगे. लाखों करोड़ों लोग देश छोड़कर यहां आए, कोई अपना गांव नहीं छोड़ता है. इतने सालों से उन्हें वोट, स्वास्थ्य, शिक्षा का अधिकार नहीं है. वह नरक की जिंदगी जी रहे हैं.

'घुसपैठियों से देश को बचाना हर सांसद का दायित्व'
गृहमंत्री ने कहा कि मेरी सबसे विनती है कि चर्चा को शांति से सुने, चर्चा में भाग लें. मैंने सबको सबको सुना, मैं भी सांसद हूं. 18 लाख लोगों ने मुझे भी चुना है. हमने ये बात कही है विविधिता में एकता हमारा मंत्र है. सहिष्णुता हमारा भ्रूण है. हमारी सेना ने कभी सीमाओं के बाहर आक्रमण नहीं किया. ये बिल इसी को परिलक्षित करता है. मैं फिर एक बार कहता हूं. हमारी संविधान सभा में पंथनिरपेक्षता की बात हुई. हमारी पार्टी इसको हृदय से स्वीकार करते हैं. किसी भी सरकार का ये तो कर्तव्य है सीमाओं की सुरक्षा करें. घुसपैठियों को रोकें.

उन्होंने कहा कि दुनिया में कौन सा ऐसा देश है जिसने नागरिकता देने का कानून नहीं बनाया है. लिबरल से लिबरल देश ने कानून बनाया है, हमने भी बनाया है. इस देश में आर्टिकल 14 के साथ भी बहुत बार ऐसा हुआ है. सन् 1947 में आए सभी शरणार्थियों को स्वीकार किया. इस देश में बड़े पदों पर भी वे बैठे हैं. उनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और लालकृष्ण आडवाणी भी हैं.

'बिना वीजा-पासपोर्ट के देश में आने वालों पर रोक लगाने की कोशिश'
शाह ने कहा कि 1965 में भी हुआ. 1971 में हमने दखल देकर बंग्लादेश की रचना की. किसी ने विरोध नहीं किया. युगांडा से आए भारतीयों को नागरिकता दी गई. श्रीलंका से आए लोगों को भी नागरिकता दी गई. 1985 में राजीव गांधी गांधी के समय में असम अकार्ड हुआ, हमनें कभी विरोध नहीं किया, हम समझते हैं कि अपने ये भारतीय लोग कहां जाएंगे. ये बिल अधिकार देने का बिल है किसी का अधिकार छीनने का बिल नहीं है. ये विधायक हमारे तीन पड़ोसी देश जिनसे हमारी सीमा छूती है. वहां से 6 धर्मों के लोग प्रताड़ना के बाद भाग कर यहां आए. नागरिकता अधिनियम 1955 2 (1) B में उल्लेख है कि भारत में बिना पासपोर्ट वीजा के घुसता है उसे अवैध बनाया जाएगा.

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गृहमंत्री ने कहा कि मैं असम की जनता से पूछना चाहता हूं कि असम अकार्ड के बाद अबतक किया. हम समाधान लेकर आ रहे हैं तो इसका विरोध किया जा रहा है. क्या आपने एनआरसी किया नहीं किया. मैं समग्र नॉर्थ ईस्ट के लोगों से कहना चाहता हूं इस बिल में आपकी सारी समस्याओं का समाधान हैं. किसी के बहकावे में मत आना कोई आंदोलन ना करना अब बहुत हो चुका.

अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि मैंने 119 घंटे तक कांग्रेस और बाकी कमेटियों से चर्चा की और उसी के सुझाव से मैंने बिल लाया है. आज तीनों देशों के हिंदू, सिक्ख, बौद्ध, जैन, क्रिश्चन और पारसी अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए प्रशस्त हो रहा है. मेरा दायित्व है कि मैं विपक्ष के भी सभी सांसदों के प्रश्नों का उत्तर दूं. जो अल्पसंख्यक यहां आए हैं उन्हें एक अर्जी लगाने से नागरिकता मिलेगी. बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों में जो अल्पसंख्यक हैं उन्हें मैं देश के गृहमंत्री के नाते कहता हूं आपके पास राशन कार्ड है या फिर नहीं हम फिर भी नागरिकता दूंगा.

ऐसे अल्पसंख्यक नागरिक के खिलाफ अगर कोई कार्रवाई चल रही है या चलने वाली है तो वह नागरिकता मिलने के साथ ही खत्म हो जाएगी. अगर उसपर केस चल रहा है फिर भी हो नागरिकता के लिए आवेदन करने का अधिकार रहेगा. अगर वह किसी प्रकार की छूट ले रहा है जैसे कोई मकान ले लिया तो उसे नागरिकता मिलने पर वंचित नहीं किया जाएगा. पूर्वोत्तर के मन में ढेर सारे लोग भय पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.