लिंगायत मुद्दा: कर्नाटक सरकार की सिफारिश पर विचार करेगा केंद्रीय गृह मंत्रालय

केंद्रीय गृह मंत्रालय लिंगायत और वीरशैव लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने की कर्नाटक सरकार की सिफारिश प्राप्त होने पर व्यापक रूप से विचार करेगा.

लिंगायत मुद्दा: कर्नाटक सरकार की सिफारिश पर विचार करेगा केंद्रीय गृह मंत्रालय
केंद्रीय गृह मंत्रालय लिंगायत मुद्दे पर कर्नाटक सरकार की सिफारिश पर विचार करेगा. (प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्लीः केंद्रीय गृह मंत्रालय लिंगायत और वीरशैव लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने की कर्नाटक सरकार की सिफारिश प्राप्त होने पर व्यापक रूप से विचार करेगा. एक अधिकारी ने मंगलवार (20 मार्च) को यह जानकारी दी. दरअसल, चुनावी राज्य कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने संख्या बल में मजबूत और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लिंगायत एवं वीरशैव लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने की सिफारिश करने का एक दिन पहले ही फैसला किया है. इसके बाद केंद्र सरकार की यह प्रतिक्रिया आई है.

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यहां कहा कि कर्नाटक सरकार से मंत्रालय को प्रस्ताव प्राप्त होने पर इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय से यह प्रस्ताव विस्तृत जांच और सुझावों के लिए महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय को भेजे जाने की उम्मीद है.

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गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने इस मुद्दे पर गठित एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिश प्राप्त होने के बाद यह फैसला किया. समिति के मुताबिक लिंगायत और वीरशैव लिंगायत वे लोग हैं जो 12 वीं सदी के समाज सुधारक संत बासव के दर्शन में यकीन रखते हैं. लिंगायत/वीरशैव संप्रदायों को एक ही समुदाय के तौर पर पेश किए जाने को लेकर इनमें असंतोष के बीच इन्हें एक अलग धार्मिक दर्जा दिए जाने की मांग की गई.

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कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एचएन नागमोहन दास की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय एक समिति गठित की थी, जिसने 2 मार्च को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. लिंगायत/वीरशैव समुदाय की कर्नाटक में, खासतौर पर राज्य के उत्तरी हिस्से में अच्छी खासी आबादी है. बीजेपी और हिंदू समुदाय के कई धड़ों ने इस मुद्दे पर सावधानी भरा रूख अपनाया है और लिंगायत/वीरशैव को अलग धार्मिक दर्जा दिए जाने के कदम से दूरी बना रखी है. उन्होंने सिद्धारमैया सरकार पर अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक फायदा उठाने को लेकर समाज को बांटने का आरोप लगाया है.

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