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Explainer: पढ़े-लिखे प्रोफेशनल कैसे बने कट्टरपंथ का हिस्सा? ऐसे बेनकाब हुआ व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल

White Collar Terror Module: भारत में घरेलू आतंकवाद एक बार फिर से चिंता का विषय बनता जा रहा है. इस बार खतरा और भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि नए आतंकी मॉड्यूल न सिर्फ देश के अंदर छिपे हुए हैं, बल्कि पड़ोसी देशों और वैश्विक जिहादी समूहों से भी प्रेरणा और मदद ले रहे हैं.

 

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White Collar Terror Module: भारत में घरेलू आतंकवाद एक बार फिर सिर उठा रहा है. इस बार खतरा पहले से कहीं अधिक ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि नए आतंकी मॉड्यूल न सिर्फ भारत में छिपे हुए हैं, बल्कि पड़ोसी देशों और वैश्विक जिहादी समूहों से भी प्रेरणा और मदद ले रहे हैं. बता दें, 2011 तक इंडियन मुजाहिदीन (IM) भारत का सबसे बड़ा घरेलू आतंकवादी संगठन माना जाता था. इसने दिल्ली समेत भारत के कई शहरों में बम धमाके किए. 2013 में यासीन भटकल और 2018 में अब्दुल सुभान कुरैशी की गिरफ्तारी के बाद यह नेटवर्क लगभग खत्म हो गया था जिसके बाद कुछ सालों तक देश में बड़े आतंकी हमले नहीं हुए, सिवाय उरी (2016), पुलवामा (2019) और 2025 के पहलगाम हमले के जो सभी पाकिस्तान आधारित समूहों से जुड़े थे.

कौन हैं ये नए घरेलू आतंकवादी ?

अब सामने आने वाले मॉड्यूल पहले जैसे नहीं हैं. इनके सदस्य डॉक्टर, इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ, शिक्षक और विश्वविद्यालय के छात्र हैं यानी सफेदपोश आतंकवादी. ये लोग किसी बड़े संगठन का हिस्सा नहीं होते, बल्कि अपने छोटे-छोटे स्लीपर सेल बनाकर काम करते हैं. इनका कट्टरपंथ ISIS और अल-कायदा की विचारधारा से प्रेरित होता है और लगभग पूरी तरह ऑनलाइन होता है. ये नए आतंकी व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, डार्क वेब और क्लोन ऐप्स के जरिए संचार करते हैं. फंडिंग भी हवाला, छोटे ऑनलाइन दान और क्रिप्टोकरेंसी से होती है. कई जांचों में पाकिस्तान और तुर्किये में बैठे संचालकों के साथ इनके संपर्क की बात सामने आई है.

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जांच में पता चला है कि इन समूहों की गतिविधियां पूरे देश में फैली हुई हैं. जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के डॉक्टर और आईटी पेशेवरों पर युवाओं की भर्ती और IED बनाने का आरोप है. कर्नाटक के बेल्लारी में आईएसआईएस से जुड़ा मॉड्यूल मिला, जिसके पास विस्फोटक और हथियार बरामद हुए है. हैदराबाद से एक संदिग्ध जो पहले राइसिन जहर बनाने के मामले में जांच का सामना कर चुका था, फिर से पकड़ा गया है. चेन्नई से भी आईएसआईएस के लिए युवाओं की ऑनलाइन भर्ती करने वाला आरोपी गिरफ्तार हुआ है. आंध्र प्रदेश में भी नेपाल सीमा से हथियार मंगाने का नेटवर्क पकड़ा गया. कुछ आरोपी इंडोनेशिया जैसे देशों में छिपे पाए गए, जिससे इन समूहों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का पता चला है.

दिल्ली विस्फोट ने खोली नई परतें

10 नवंबर 2025 को लाल किला इलाके में एक विस्फोट हुआ. जांच में पता चला कि आरोपी डॉ. उमर उन नबी फरीदाबाद के एक विश्वविद्यालय में काम करता था. वह एक कश्मीरी व्हाइट-कॉलर मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसका संबंध जैश-ए-मोहम्मद से बताया गया. यह समूह पिछले तीन साल से दिल्ली में बड़े पैमाने पर सीरियल ब्लास्ट की योजना बना रहा था.  कुछ सदस्य ड्रोन और क्रूड रॉकेट बनाने का प्रयोग कर रहे थे. इस घटना ने दिखा दिया कि नया खतरा कितना संगठित और खतरनाक है.

विश्वविद्यालय भी बने ऑपरेशन सेंटर

पुराने समय में आतंकवादी अक्सर मदरसों या संगठित नेटवर्क के जरिए भर्ती होते थे. अब कई नए मॉड्यूल विश्वविद्यालय परिसरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है. पहले आतंकी संगठनों का ढांचा स्पष्ट होता था और उनकी पाकिस्तान से सीधी ट्रेनिंग मिलती थी. अब के मॉड्यूल विकेन्द्रीकृत, तकनीकी रूप से सक्षम और डिजिटल दुनिया में छिपे रहते हैं. इनका प्रोफाइल भी बदल गया है अब गुस्साए युवाओं की जगह शिक्षित, पेशेवर और संपन्न लोग शामिल हो रहे हैं. भारत में घरेलू आतंकवाद खत्म नहीं हुआ उसने अपना रूप बदल लिया है. अब यह अधिक आधुनिक, बिखरा हुआ, तकनीक आधारित और वैश्विक तौर पर जुड़ा हुआ है. दिल्ली विस्फोट जैसे मामले बताते हैं कि खतरा बड़ा है और सुरक्षा एजेंसियों को अब डिजिटल कट्टरपंथ और सफेदपोश आतंकवाद की नई चुनौती का सामना करना होगा.

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Shashank Shekhar Mishra

ज़ी न्यूज में बतौर सब एडिटर कार्यरत. देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करते हैं. पत्रकारिता में 5 वर्षों का अनुभव है. इससे पहले टाइम्स नाउ नवभारत, जागरण...और पढ़ें

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