वह हेलीकॉप्‍टर जिसे दुश्मन नहीं हरा सकता, वो क्रैश कैसे हुआ?
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वह हेलीकॉप्‍टर जिसे दुश्मन नहीं हरा सकता, वो क्रैश कैसे हुआ?

बुधवार को देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत का प्लेन क्रैश में निधन हो गया. जनरल बिपिन रावत जिस हेलीकॉप्टर में सवार थे, वो कोई पुरानी पीढ़ी का हेलीकॉप्टर नहीं है. आज की तारीख में दुनिया के 60 देश इस सीरीज के 12 हजार से ज्यादा हेलीकॉप्टर इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें चाइना, श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे देश भी हैं. क्योंकि इसकी गिनती दुनिया के सबसे एड्वांस्ड हेलीकॉप्टर में होती है.

वह हेलीकॉप्‍टर जिसे दुश्मन नहीं हरा सकता, वो क्रैश कैसे हुआ?

नई दिल्ली: बुधवार को देश के पहले CDS जनरल बिपिन रावत का प्लेन क्रैश में निधन हो गया. जनरल बिपिन रावत जिस हेलीकॉप्टर में सवार थे, वो कोई पुरानी पीढ़ी का हेलीकॉप्टर नहीं है. आज की तारीख में दुनिया के 60 देश इस सीरीज के 12 हजार से ज्यादा हेलीकॉप्टर इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें चाइना, श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे देश भी हैं. क्योंकि इसकी गिनती दुनिया के सबसे एड्वांस्ड हेलीकॉप्टर में होती है.

VVIP हेलीकॉप्टर हुआ क्रैश

अधिकतम 250 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ने वाला ये हेलीकॉप्टर मुश्किल परिस्थितियों और खराब मौसम में भी ऑपरेट कर सकता है. इसे लैंडिंग के लिए हैलिपेड की जरूरत नहीं होती. ये ऊबड़-खाबड़ जगहों पर आसानी से उतर सकता है और वहां मदद भी पहुंचा सकता है. इसका इस्तेमाल ट्रांस्पोर्टेशन, रेस्क्यू ऑपरेशन, तलाशी अभियान और VVIP आवागमन के लिए किया जाता है और इसमें एक बार में 3 Crew Members के अलावा 36 लोग बैठ सकते हैं. इसके अलावा ये हेलीकॉप्टर अधिकतम 13 हजार किलोग्राम का वजन उठा सकता है.

आधुनिक है ये हेलीकॉप्टर

आसान शब्दों में समझें तो ये हेलीकॉप्टर इतना आधुनिक है कि इसका इस्तेमाल आंखें बंद करके किया जा सकता है और ऐसा होता भी है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी घरेलू उड़ान के लिए इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा सेना में भी VVIP मूवमेंट के लिए ये हेलीकॉप्टर प्रयोग में लाया जाता है. रूस द्वारा निर्मित MI सीरीज के 150 हेलीकॉप्टर इस समय भारत के पास हैं और ये हेलीकॉप्टर ज्यादा पुराने नहीं है. भारत को 2011 से 2018 के बाद ये सारे हेलीकॉप्टर मिले हैं. लेकिन सोचिए ये कितने बड़े अपमान का विषय है कि भारत के इतिहास का पहले CDS की उसके ही हेलीकॉप्टर में मृत्यु हो जाती है.

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भारतीय सेना में विमान क्रैश की इतनी ज्यादा घटनाएं क्यों होती हैं?

वर्ष 1948 से 2021 के बीच यानी पिछले 73 वर्षों में सेना के 1751 एयरक्राफ्टस और हेलीकॉप्टर क्रैश हो चुके हैं. यानी इस हिसाब से हर वर्ष औसतन 24 और हर महीने सेना के 2 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं. अगर बात सिर्फ वर्ष 1994 से 2014 के बीच की करें तो इस दौरान भारतीय सेना के 394 एयरक्राफ्टस और हेलीकॉप्टर क्रैश हुए हैं. यानी इस दौरान हर साल औसतन 20 विमान दुर्घटना का शिकार हो गए.

कम नहीं हो रहीं विमान क्रैश होने की घटनाएं

इसका मतलब ये है कि भारत में विमानों के क्रैश होने का सिलसिला अब भी नहीं बदला है. आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में भी इसी तरह सेना के विमान दुर्घटनाग्रस्त होते थे और अब आधुनिकता के इस दौर में भी ये दुर्घटनाएं रुकी नहीं है. जबकि दूसरे देशों में ऐसा नहीं है. उदाहरण के लिए भारत, रूस और चीन तीनों देश सुखाई लड़ाकू विमान का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन सोचने वाली बात ये है कि भारत में वर्ष 2009 से 2015 के बीच ये विमान 6 बार क्रैश हुआ, जबकि इसी समय अवधि में रूस और चीन में इस विमान के क्रैश होने की 1-2 ही घटनाएं सामने आईं. जबकि इन दोनों देशों के पास भारत से ज्यादा सुखोई लड़ाकू विमान हैं.

जो कहीं क्रैश नहीं हुआ, वो भारत में हुआ

कुछ वर्षों पहले भारत ने दुनिया का सबसे आधुनिक और सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट विमान C130-J सुपर हरक्यूल्स खरीदा था. उस समय अमेरिका से ऐसे कुल 6 विमान खरीदे गए थे, जिनकी कीमत 7 हजार करोड़ रुपये थी. यानी एक विमान लगभग 1150 करोड़ रुपये का था. इन विमानों की खासियत ये थी कि इन्हें लैंडिंग के लिए हवाई पट्टी की भी जरूरत नहीं पड़ती और ये हर मौसम में ऑपरेट कर सकता है. अमेरिका की जिस कंपनी ने इस विमान को विकसित किया है, वो ये कहती है कि इस विमान को इस तरह से डिजाइन किया गया है, ताकि ये मुश्किल हालात में भी क्रैश होने से खुद को बचा ले और भारत को छोड़ कर जिन देशों में ये एयरक्राफ्ट इस्तेमाल होता है, वहां इसके क्रैश होने की घटना नहीं हुई हैं. लेकिन भारत के मामलों में तस्वीर अलग है. भारत में वर्ष 2014 में ही एक C-130J सुपर हरक्यूल्स विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में 5 लोगों की मृत्यु हुई थी और भारत सरकार ने अपनी जांच रिपोर्ट में ये माना था कि ये हादसा पायलट की गलती की वजह से हुआ, क्योंकि उसकी ट्रेनिंग में कुछ कमियां थीं. वर्ष 2017 में भी इसी सीरीज का एक और विमान गड़बड़ी की वजह से लैडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. सोचिए, जो विमान दूसरे देशों में क्रैश नहीं हुआ, वो भारत में क्रैश हो गया.

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सेना विमान ही ज्यादा होते हैं क्रैश

भारत में प्रति दिन 4 से 5 हजार यात्री विमान उड़ान भरते हैं, जिनमें लाखों यात्री एक जगह से दूसरी जगह सफर करते हैं. जबकि एक अनुमान के मुताबिक सेना में प्रति दिन ट्रेनिंग और दूसरे कामों के लिए केवल 200 विमान ही उड़ान भरते हैं. हालांकि ये संख्या कम और ज्यादा भी हो सकती है. लेकिन इसके बावजूद यात्री विमानों की तुलना में सेना के विमान ज्यादा क्रैश होते हैं. वर्ष 1945 से 2021 के बीच पिछले 76 वर्षों में 95 यात्री विमान ही क्रैश हुए हैं. जबकि इसी अवधि में सेना के 1751 विमान क्रैश हो चुके हैं.

क्रैश विमानों की सीरीज का क्या होता है?

किसी भी देश में जब कोई यात्री विमान क्रैश होता है तो उस विमान में तकनीकी खामियों की तुरंत जांच होती है और कई मामलों में जांच होने तक उस सीरीज के यात्री विमान के इस्तेमाल पर बैन भी लगा दिया जाता है. जैसे वर्ष 2018 में Boeing 737 Max सीरीज के 2 यात्री विमान क्रैश हो गए थे, जिसके बाद भारत समेत ज्यादातर देशों ने इनके इस्तेमाल पर बैन लगा दिया था. लगभग 1.5 साल तक ये विमान रनवे पर खड़े रहे थे. लेकिन सेना में इस प्रक्रिया को नहीं अपनाया जाता. उदाहरण के लिए, भारत में वर्ष 2012 तक मिग सीरीज के 872 में से 482 विमान क्रैश हुए. यानी आधे से ज्यादा समय के साथ दुर्घटनाग्रस्त ही हो गए. लेकिन इसके बावजूद इन विमानों का इस्तेमाल कई दशकों तक हुआ.

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