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सिख और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए पाकिस्तान कैसे बन रहा 'टॉर्चर फैक्टरी'

पाकिस्तान में सिख समुदाय और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसात्मक घटनाएं हो रही हैं.   

सिख और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए पाकिस्तान कैसे बन रहा 'टॉर्चर फैक्टरी'
पाकिस्तान में मुल्ला और मिलिट्री का गठजोड़ ही पाकिस्तान की असली सच्चाई है....

नई दिल्ली. ऐसे में जब पूरे दुनिया में सिख समुदाय बाबा गुरुनानक की 550वीं जयंती मना रहा है, तब पाकिस्तान अपनी जमीं पर सिख समुदाय को सुरक्षा नहीं दे पा रहा है. हाल ही में, पाकिस्तान में सिख समुदाय और अल्पसंख्यकों के खिलाफ दिलदहला देने वाली हिंसात्मक घटनाएं हुई हैं. ननकाना साहिब में सिख लड़की को अगवा कर उसका धर्मांतरण कर जबरन निकाह करवाया गया. इस घटना से एक बार फिर साफ हो गया कि पाकिस्तान में सिख और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित नहीं है. 

भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, करतारपुर वार्ता के पीछे पाकिस्तान सिखों के खिलाफ हो रहे अत्याचार के अपने असली चेहरे को छुपाने की कोशिश में है. पाकिस्तान में रह रहे सिख अपने धार्मिक कामकाज भी नहीं कर पा रहे हैं. फिर चाहे वे हजरा शिया हों या अहमदी या ईसाई या हिंदू हो या सिख हो, इनके खिलाफ लगातार हो रही हिंसात्मक वारदातों ने पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी है. पाकिस्तान के चरमपंथी समूह इन अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ जुल्म ढा रहे हैं. 

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सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में मुल्ला और मिलिट्री का गठजोड़ ही पाकिस्तान की असली सच्चाई है. इससे पहले, अगस्त में, पाकिस्तान के एक एनजीओ ने बताया था कि इस्लामाबाद में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अपने धार्मिक रीति-रिवाज भी पूरे नहीं कर पा रहे हैं. 

हाल ही में, इस मुद्दे को यूएन में उठाया गया. एनजीओ के प्रेसिडेंट नावेद वॉल्टर ने दावा किया कि उनके देश अल्पसंख्यकों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रहा है. ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ धार्मिक पाबंदी पर चिंता जाहिर की. वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं और भारत पर आरोप लगा रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. उनके प्रोपेगैंडा की पोल खुल चुकी है. पूरी दुनिया ने उनके दावे को खारिज कर दिया है.