बिना लॉकडाउन के इस देश ने पाया कोरोना पर काबू, जानिए इसके लिए क्या-क्या किया

चीन के बाद दक्षिण कोरिया कोरिया इस वायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित रहा है. लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में यहां सबसे कम नए केस दर्ज किए गए हैं. 

बिना लॉकडाउन के इस देश ने पाया कोरोना पर काबू, जानिए इसके लिए क्या-क्या किया
फोटो साभार: Reuters

सियोल: जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी से लड़ रही है और कई देशों को लॉकडाउन किया गया है. वहीं एक देश ऐसा भी है, जिसने बिना लॉकडाउन कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों पर नियंत्रण किया है. यहां कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए थर्मल इमेजिंग कैमरे लगाने से लेकर लोगों को दाएं की जगह बाएं हाथ से काम करना सिखाया गया. दक्षिण कोरिया में लगातार सेना की मदद से सड़कों को सैनिटाइज किया गया और धर्मगुरुओं से भी कहा गया कि वो अपने अनुयायियों का तापमान चेक करवाते रहें.

चीन के बाद दक्षिण कोरिया इस वायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित रहा है. लेकिन पिछले चार हफ्तों में यहां सबसे कम नए केस दर्ज किए गए हैं. यहां कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 9037 है. 129 लोगों की इस संक्रमण की वजह से मौत हो गई, लेकिन 3500 लोग ठीक भी हुए हैं. 8 से 9 मार्च के बीच यहां सं​क्रमितों की संख्या 8 हजार तक पहुंच गई थी, पर बीते दिनों में यहां सिर्फ 12 नए मामले सामने आए हैं. 

बाजारों को बंद नहीं किया गया

कोरोना वायरस के खिलाफ दक्षिण कोरिया की इस लड़ाई को पूरी दुनिया रोल मॉडल की तरह देख रही है. संक्रमितों के मामले में आज दक्षिण कोरिया 8वें नंबर पर है.लेकिन पहले मामले के मिलने से अब तक न तो कभी शहर को लॉकडाउन किया गया न ही यहां के बाजारों को बंद किया गया. दक्षिण कोरिया ने एक दिन के लिए बाजार बंद नहीं किया. मॉल, स्टोर, छोटी-बड़ी दुकानें नियमित रूप से खुलती रहीं. लोगों के बाहर निकलने और दूसरी गतिविधियों पर भी रोक नहीं लगाई गई.

जल्द टेस्ट और इलाज

यहां टेस्ट किट्स के प्रोडक्शन को भी बढ़ाया गया. जल्द टेस्ट करने और इलाज शुरू कर देने से मौत के मामले कम हुए और नए केसेज भी कम आए. 600 से ज्यादा टेस्टिंग सेंटर खोले गए और मुस्तैद होकर लोगों की स्क्रीनिंग की गई. शरीर के तापमान और गले की जांच दस मिनट कर ली जाती है और एक घंटे के भीतर इसकी रिपोर्ट ​मिल जाती ​है. यहां हर जगह लगे फोन बूथों को टेस्टिंग सेंटर में बदल दिया गया है. यहां 50 से ज्यादा ड्राइविंग स्टेशनों पर लोगों की स्क्रीनिंग की व्यवस्था भी की गई.

संक्रमण की जांच के लिए सरकार ने बड़ी इमारतों, होटलों, पार्किंग और सार्वजनिक स्थानों पर थर्मल इमेजिंग कैमरे लगाए. होटलों में आने वाले लोगों की जांच की गई. बुखार का टेस्ट होने के बाद ही लोगों को होटलों में जाने की अनुमति दी गई. 

बाएं हाथ का इस्तेमाल

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने संक्रमण से बचने के लिए दाएं हाथ की जगह बाएं हाथ का इस्तेमाल करने की सलाह दी. वहीं जो बाएं हाथ से काम करते हैं, उन्हें दाएं ​हाथ से काम करने के लिए कहा गया. लोगों को मोबाइल चलाने, दरवाजे का हैंडल पकड़ने और रोजमर्रा के हर काम के लिए बाएं हाथ का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि, लोग रोज के कामों के लिए अपने दाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं और वही हाथ चेहरे पर भी ले जाते हैं.

टेस्टिंग किट का उत्पादन बढ़ाया

जनवरी में पहला मामला सामने आने के बाद सबसे पहले टेस्टिंग किट का उत्पादन बढ़ाया गया. दो हफ्तों में जब संक्रमण के मामले बढ़े, तो तेजी से हर जगह टेस्टिंग किट की उपलब्धता सुनिश्चित की गई. आज दक्षिण कोरिया में रोजाना 1 लाख टेस्टिंग किट बन रही हैं. अब 17 देशों में इनका निर्यात भी शुरू होने जा रहा है.

अनुभवों से ली सीख

साल 2015 में भी दक्षिण कोरिया में (मर्स मिडिल ईस्ट रेस्पारेट्री सिंड्रोम) फैला था. उस वक्त भी लोगों ने इसका डटकर मुकाबला किया था. कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लोगों को सूचना पहुंचाने वाले कानून में बदलाव किया गया. इसके तहत किसी रिहायशी इलाके में कोरोना मरीज के पाए जाने पर लोगों को फोन पर अलर्ट भेजा जाता है. धार्मिक नेताओं से कहा गया है कि वह अपने अनुयायियों का तापमान चेक करवाते रहें.