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भारतीय वायुसेना का एक कदम और कारगिल युद्ध में हो जाती मुशर्रफ और शरीफ की मौत!

कारगिल युद्ध में दुश्मनों को धूल चटाने वाली भारतीय सेना वायु सेना का निशाना अगर सही लगा होता तो आज मुशर्रफ और नवाज शरीफ का नामो निशान मिट चुका होता. 

भारतीय वायुसेना का एक कदम और कारगिल युद्ध में हो जाती मुशर्रफ और शरीफ की मौत!
जिस वक्त भारतीय वायुसेना पाकिस्तान की सरजमीं पर जगुआर गिराने वाली थी, उस वक्त वहां पर नवाज और मुशर्रफ भी मौजूद थे. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली : भारत, पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध की आज 20वीं वर्षगांठ हैं. भारतीय सैनिकों की शहादत को देश का हर एक शख्स याद कर रहा है और सलाम कर रहा है. कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय और पाकिस्तान की सेना का जिक्र तो हर कोई करता है, लेकिन परवेज मुशर्रफ और नवाज शरीफ का जिक्र शायद ही कहीं पर होता है. कारगिल युद्ध में दुश्मनों को धूल चटाने वाली भारतीय सेना वायु सेना का सही निशाना सही लगा होता तो इन दोनों की लोगों के जीवन का सफर खत्म हो चुका होता.

थल सेना की वायुसेना भी कर रही थी मदद
भारत और पाकिस्तान का इतिहास भी इस बात का गवाह है कि जब-जब दोनों देश आमने-सामने आई हैं, हर बार पाकिस्तान को ही मुंह की खानी पड़ी है. कारगिल युद्ध पर 2016 में आई एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि भारतीय वायुसेना के युद्धक विमान का निशाना सही लगते, तो परवेज मुशर्रफ और नवाज शरीफ नहीं बचते. यह घटना 24 जून, 1999 को सुबह करीब 8.45 बजे घटती. दरअसल, ये वो दिन था जब कारगिल की लड़ाई में भारतीय सेना विजय का झंडा लहराने के लिए आगे बढ़ रही थी. थल सेना के साथ ही वायुसेना भी पाकिस्तान पर बम बरसाने का काम करने में लगी हुई थी. 

प्लानिंग के तहत की गई कार्रवाई के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अग्रिम मोर्चे को धाराशाही करने का फैसला किया और जुगआर लड़ाकू विमान से निशाना साधने की कोशिश की. भारतीय सेना के एक जगुआर ने “लेजर गाइडेड सिस्टम” को तबाह करने के लिए निशाना था. इसके पीछे ही एक और जगुआर को भेजा गया जो शिकार के बाद सरजमीं को पूरी तरह से तबाह कर दें. 

नवाज और मुशर्रफ की मौजूदगी से बेखबर थी सेना
जगुआर एसीएलडीएस ने प्वाइंट 4388 पर निशाना साधा, पायलट ने एलओसी के पार गुलटेरी को लेजर बॉस्केट में चिह्नित किया, लेकिन बम “लेजर बॉस्केट” से बाहर गिरा दिया, जिससे पाकिस्तानी ठिकाना बच गया. खबर के मुताबिक, अगर निशाना सही होता, तो उसमें पाकिस्तान के पूर्व जनरल परवेज मुशर्रफ और नवाज शरीफ भी मारे जा सकते थे. हालांकि भारतीय वायुसेना इस बात से अनजान थी कि नवाज और मुशर्रफ वहां पर मौजूद थे. 

बम नहीं गिराने का मिला निर्देश
भारत सरकार के इस दस्तावेज में मोटे अक्षरों में लिखा है, 'बाद में इस बात की पुष्टि हुई कि हमले के समय पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ उस समय गुलटेरी ठिकाने पर मौजूद थे.' दस्तावेज के अनुसार जब पहले जगुआर ने निशाना साधा तब तक ये खबर नहीं थी कि वहां पाकिस्तानी पीएम शरीफ और मुशर्रफ मौजूद हैं. हालांकि एक एयर कमाडोर जो उस समय एक उड़ान में थे, उन्होंने पायलट को बम नहीं गिराने का निर्देश दिया, जिसके बाद बम को एलओसी के निकट भारतीय इलाके में गिरा दिया गया. ऐसा इसलिए क्योंकि यह पाक सीमा के भीतर था और हमला नियम विरुद्ध होता.

पाक का अग्रिम ठिकाना था गुलटेरी
गौरतलब है कि कारगिल युद्ध के समय गुलटेरी पाक सेना का अग्रिम सैन्य ठिकाना था, जहां से सैन्य साजो-सामान पहुंचाया जा रहा था. गुलटेरी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एलओसी से नौ किलोमीटर अंदर है, जो भारत के द्रास सेक्टर के दूसरी तरफ स्थित है. पाकिस्तान मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक 24 जून को नवाज शरीफ परवेज मुशर्रफ के साथ इस सैन्य ठिकाने पर गए थे.