अंबाला में पुनर्जीवित हुई गोल्डेन एरो स्क्वाड्रन, अगले महीने मिलेगी रफाल की पहली खेप

अंबाला एयरबेस में मंगलवार को वायुसेना ने अपनी गोल्डेन एरो स्क्वाड्रन को रफाल फ़ाइटर जेट की पहली स्क्वाड्रन के लिए तैयार करना शुरू किया. 

अंबाला में पुनर्जीवित हुई गोल्डेन एरो स्क्वाड्रन, अगले महीने मिलेगी रफाल की पहली खेप
वायुसेना की 17 नंबर स्क्वाड्रन यानी गोल्डेन एरो को देश में रफाल की पहली स्क्वाड्रन होने का गौरव मिलेगा.

अंबाला: अंबाला एयरबेस में मंगलवार को वायुसेना (IAF) ने अपनी गोल्डेन एरो स्क्वाड्रन (Golden Arrows Squadron) को रफाल फ़ाइटर जेट (Rafale fighter jet) की पहली स्क्वाड्रन के लिए तैयार करना शुरू किया. अंबाला एयरबेस पर रेज़रेक्शन सेरेमनी में वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा ने ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह को एक मेमोंटो भेंट दिया. वायुसेना की 17 नंबर स्क्वाड्रन यानी गोल्डेन एरो को देश में रफाल की पहली स्क्वाड्रन होने का गौरव मिलेगा. 

संभावना है कि अक्टूबर में वायुसेना को रफाल की पहली खेप फ्रांस में मिलेगी. चर्चा है कि ये समारोह 8 अक्टूबर को होगा जोकि वायुसेना दिवस भी है और दशहरा भी. वायुसेना को कुल 36 रफाल फ़ाइटर एयरक्राफ्ट मिलेंगे जिनसे दो स्क्वाड्रन बनाई जाएंगी. पहली स्क्वाड्रन अंबाला में और दूसरी को पूर्व में हाशीमारा एयरबेस पर तैनात करने की संभावना है.

गोल्डेन एरो स्क्वाड्रन को 1951 में अंबाला में ही तैयार किया गया था. उस समय इसे हार्वर्ड एयरक्राफ्ट से लैस किया गया था. बाद में इसे वैंपायर और हंटर एयरक्राफ्ट दिए गए. 1975 में इसे उस समय के सबसे आधुनिक मिग-21 एयरक्राफ्ट दिए गए जो अब तक इस स्क्वाड्रन की शान रहे. गोल्डेन एरो ने 1965 और 1971 के युद्धों में अपने जौहर दिखाए थे. 1999 में कारगिल के युद्ध के दौरान ये स्क्वाड्रन भटिंडा में तैनात थी . वायुसेना ने कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन सफेद सागर लांच कर दिया. 

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गोल्डेन एरो सबसे पहले लड़ाई में शामिल होने वाली स्क्वाड्रनों में थी. 27 मई को बटालिक में इस पाकिस्तानी घुसपैठियों के अड्डों को तबाह करने गए स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का मिग 21 एयरक्राफ्ट घुसपैठियों की मिसाइल का शिकार हो गया. उनका विमान पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में गिरा और उन्हें पाकिस्तानी सेना ने ज़िंदा पकड़ लिया. उन्हें यातनाएं दी गईं और मार दिया गया . लेकिन स्क्वाड्रन ने घुसपैठियों पर अपने हमले जारी रखे और उनकी कमर तोड़ दी. वर्तमान वायुसेनाध्य़क्ष एयर चीफ मार्शल धनोवा उस समय इस स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर थे.

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अंबाला में रफाल के लिए ज़रूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर की निर्माण शुरू हो चुका है. इस स्क्वाड्रन के अफसर फ्रांस में रफाल के साथ ट्रेनिंग करना शुरू करने वाले हैं. रफाल को भारत लाने से पहले उसपर पायलटों और ग्राउंड स्टाफ की लंबी ट्रेनिंग होनी है ताकि वो इसकी तकनीक से परिचित हो जाएं. संभावना है कि रफाल अगले साल मई तक भारत पहुंच जाएंगे.