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VIDEO:अगर आप हर 5 मिनट में अपना मोबाइल चेक करते हैं तो हो जाइए सावधान!

दुनिया में सबसे कम सोते हैं और 74% यूज़र्स फोन साथ लेकर सोने के आदि हैं.

VIDEO:अगर आप हर 5 मिनट में अपना मोबाइल चेक करते हैं तो हो जाइए सावधान!
आप लगातार अपने फोन पर मैसेज और नोटिफिकेशन को चेक करते हैं और इंटरनेट कवरेज से बाहर जाते ही आप चिड़चिड़े हो जाते हैं तो आप भी नोमो फोबिया के शिकार हो सकते हैं (प्रतिकात्मक तस्वीर)

नई दिल्लीः आपको जानकर हैरानी होगी कि मोबाइल फोन के बगैर ना रह पाने की आदत दुनिया की सबसे बड़ी महामारी बनती जा रही है.. और इस बीमारी का नाम है नोमो फोबिया (NomoPhobia) यानी नो मोबाइल फोबिया इसका मतलब है मोबाइल फोन पास न होने पर डर लगना अगर आप अपने फोन के बिना नहीं रह पाते है, मोबाइल की बैटरी खत्म होने पर आपको बेचैनी होने लगती है.

जी हां, आप लगातार अपने फोन पर मैसेज और नोटिफिकेशन को चेक करते हैं और इंटरनेट कवरेज से बाहर जाते ही आप चिड़चिड़े हो जाते हैं तो आप भी नोमो फोबिया के शिकार हो सकते हैं. चिंता की बात ये है कि पूरी दुनिया में बड़ी संख्या में लोग नोमो फोबिया के शिकार हो रहे हैं. एक रिसर्च में सामने आया कि हम भारतीय हर 4 से 6 मिनट में अपना मोबाइल फोन चैक करते हैं; दुनिया में सबसे कम सोते हैं और 74% यूज़र्स फोन साथ लेकर सोने के आदि हैं. जबकि 150 बार दिन में औसतन फोन का इस्तेमाल करते हैं.

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अगर आप भी मोबाइल फोन से चिपके रहने की आदत से परेशान हैं और इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो घबराइए मत, क्योंकि हमने आपके लिए एक डिजीटल डाइट प्लान तैयार किया है.भारत के लोग नोमो फोबिया का तेज़ी से शिकार हो रहे हैं यानी एक ऐसी बीमारी जब फोन के बगैर कुछ देर रहने पर भी बेचैनी होने लगती है.

Zee News ने जब दिल्ली की सड़कों पर नोमो फोबिया के शिकार लोगों की पहचान करने की कोशिश की तो ऐसा लगा कि ज्यादातर लोग नोमो फोबिया से ग्रस्त तो हैं लेकिन वो इसके बारे में जानते नहीं है. हमने दिल्ली के खत्री परिवार से बात की. परिवार में 4 सदस्य हैं माता-पिता और 2 बेटियां लेकिन सभी के सभी नोमो फोबिया का शिकार या तो हो चुके हैं या फिर होने के करीब हैं. परिवार के सदस्य भी मानते हैं कि मोबाइल फोन छोटे से लेकर बड़े तक सब की आदत बन चुके हैं

वैज्ञानिकों के मुताबिक ज्यादा देर तक स्क्रीन देखने से इंसानी दिमाग का फ्रंट लोब (Front lobe) हिस्सा प्रभावित होता है. फ्रंट लोब मोटर फंक्शन, भाषा, , फैसला लेने की क्षमता, और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करता है.

कैसे करें पहचान
आईए आपको बताते हैं कि आप नोमो फोबिया की पहचान कैसे कर सकते हैं, इसके लिए आपको इसके लक्षण पहचानने होंगे. अगर आप को भी जब फोन के बगैर रहने से घबराहट होने लगती है, फोन की बैटरी डाउन होने से बेचैनी होने लगती है, आप लगातार 5 मिनट भी फोन चेक किए बगैर नहीं रह पाते. तो बहुत मुमकिन है कि आप नोमोफोबिया के शिकार हो चुके हैं. 

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक मोबाइल पर 11 से 12 घंटे बिताने वाले लोगों को सावधान हो जाने की जरूरत है, क्योंकि दुनिया भर से अब ऐसे मामले सामने आने लगे हैं जब मोबाइल फोन के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल लोगों को अस्पताल पहुंचा रहा है 

अगर आप में भी नोमोफोबिया या FOMO के लक्षणों मौजूद हैं तो अपनी आदतों में सुधार कीजिए, हफ्ते में कम से कम एक दिन बिना मोबाइल के बिताने की आदत अपनाएं, छुट्टी पर सोशल अकाउंट्स, और मोबाइल फोन्स से दूरी बनाकर रखें, नियम बनाएं कि खाना खाते वक्त फोन को दूर रखेंगे, परिवार या दोस्तों के साथ वक्त बिताते हुए फोन का इस्तेमाल जरूर पड़ने पर ही करें. आप खाने पीने की आदतों की तरह ही डिजिटल आदतों को बदलकर स्वस्थ, सुखी और सुरक्षित जीवन बिता सकते हैं, बस आपको हिम्मत करके अपने जीवन का रीबोट (Reboot) वाला बटन दबाना होगा.