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भीषण गर्मी के बीच नहीं रखी ये सावधानियां तो भुगतने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम

इंद्रप्रस्‍थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्‍टेंट डॉ. एमएस चौधरी के अनुसार वातावरण के बढ़ते तामपान के चलते लोगों में डीहाईड्रेशन (निर्जलीकरण) लू लगने का जोखिम, एलर्जी, संक्रमण और अन्य बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है. 

भीषण गर्मी के बीच नहीं रखी ये सावधानियां तो भुगतने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम
गर्मी में होने वाले संक्रमण से बचने के लिए कुछ खास बातों का ध्‍यान रखने की जरूरत है. (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: दिल्‍ली का पारा सोमवार को 48 डिग्री तक पहुंच गया. इस भीषण गर्मी के बीच आपको कुछ खास सावधानियां रखने की जरूरत है. इस मौसम में आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपको और आपके परिवार को गंभीर रूप से बीमार कर सकती है. इंद्रप्रस्‍थ अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्‍टेंट डॉ. एमएस चौधीर के अनुसार वातावरण के बढ़ते तामपान के चलते लोगों में डीहाईड्रेशन (निर्जलीकरण) लू लगने का जोखिम, एलर्जी, संक्रमण और अन्य बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है. 

डॉ. एमएस चौधरी ने बताया कि पूरे दिन हाइड्रेटेड रहिए. इसका कोई विकल्प नहीं है. गर्म तापमान शरीर का पानी सोख लेता है और हमारी ऊर्जा बहुत जल्दी खत्म हो जाती है. इसलिए तरल पदार्थों का सेवन और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा पर्याप्त बनाए रखना गर्मी का सामना करने के लिए आवश्यक है. प्राकृतिक तरल जैसे नारियल का पानी, फलों के रस, स्मूदी, मट्ठा आदि इस गर्मी में खुद को ठंडा रखने के लिए सर्वश्रेष्ठ है. हालांकि, सुनिश्चित कीजिए कि मीठे, कार्बोनेटेड पेय से दूर रहें क्योंकि ये स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं हैं.

गर्मी में स्‍वस्‍थ्‍य रहने के लिए खाएं फल और करें पर्याप्‍त मात्रा में भोजन
उन्‍होंने बताया कि गर्मी में ज्यादातर लोग कम खाने लगते हैं. हालांकि, तापमान बढ़ने-घटने से होने वाले मेटाबोलिक परिवर्तन से निपटने के लिए शरीर को ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है. ऐसे में खाने के लिए ठंडी चीजों को प्राथमिकता देना चाहिए. मौसमी फलों और सब्जियों का संतुलित भोजन ढेर सारे तरल पदार्थों के साथ गर्मियों में आदर्श होता है.  मौसमी फल जैसे आम, तरबूज, खरबूज, लीची,  बेर, चेरी आदि का नियमित सेवन करना चाहिए. इन फलों में जो पोषण उपलब्ध है वह शरीर के तापमान को सामान्य रखने और शरीर के मेटाबोलिज्म का समर्थन करने में बहुत मददगार है. 

कड़ी धूप में निकलना त्‍वचा के लिए हो सकता है घातक 
डॉ. चौधरी के अनुसार, विटामिन डी की खुराक के लिए धूप के संपर्क में रहना महत्वपूर्ण है पर गर्मी में तापमान इतना ज्यादा हो सकती है कि धूप में जाना त्वचा के लिए खतरनाक हो सकता है. जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है खासकर बुजुर्ग और बच्चे लू लगने और डीहाईड्रेशन के लिहाज से और खतरे में होते हैं. सलाह दी जाती है कि ज्यादा गर्मी हो तो घर में रहना चाहिए और बाहर निकलें तो आरामदेह सूती कपड़े पहनें. गर्मी में हों तो सिर को ढंक कर रखें और आंखों को भी सीधी धूप से बचाएं. इससे आंखें गर्म हवा, प्रदूषण, धूल और गर्म तापमान से बच जाएंगी. दिन में बाहर निकलते समय खुली त्वचा पर हमेशा सनस्क्रीन लगाएं ताकि सूर्य की पराबैंगनी किरणों से होने वाला नुकसान न्यूनतम रहे. 

गर्मी में होने वाले संक्रमण से बचने के लिए इन बातों का रखे ध्‍यान
डॉ. एमएस चौधरी ने बताया कि गर्मी में जल जनित बीमारियों जैसे जौनडिस, डायरिया, टायफायड का शिकार होने से बचें. गर्मी में इसके मामले काफी बढ़ जाते हैं. खाने की उन चीजों का सेवन कम कीजिए जो ताजे और घर के बने न हों. घर से बार निकलतधूप में जलने और मच्छरों के काटने से बचने के लिए जहां तक संभव हो, त्वचा को ढंककर रखिए.  जब जैसी आवश्यकता हो, मच्छर भगाने वाले जेल, पैचेज और एयर वैपोराइजर का उपयोग कीजिए. 

खेल कूद के दौरान बरतनी होंगी कुछ खास सावधानियां  
डॉ. एमएस चौधरी ने बताया कि गर्मी में क्रिकेट, फुटबॉल और बैडमिन्टन आदि जैसे आउटडोर खेल में हिस्सा लेना अमूमन सीमित हो जाता है. सनबर्न या सनस्ट्रोक से बचने के लिए व्यक्ति को ऐसी गतिविधियां सीमित करनी चाहिए और इसे सुबह में जल्दी या शाम में देर से रखा जा सकता है, जब धूप बहुत तेज न हो. सुनिश्चित कीजिए कि खुद को अच्छी तरह हाईड्रेटेड रखें और इसके लिए ढेर सारा पानी पीजिए और धूप में कम से कम निकलिए. 

अधिक तामपान बच्‍चों के लिए हो सकता है नुकसानदेह
अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर डॉ. एमएस चौधरी के अनुसार, गर्मी के उच्च तापमान के लिहाज से बच्चे ज्यादा संवेदनशील होते हैं. घर के अंदर भी तापमान ज्यादा रहे तो बच्चों के लिए नुकसानदेह हो सकता है. बच्चों को हाइड्रेटेड और ठंडा रखने के लिए उनकी लगातार निगरानी की जानी चाहिए. उनके आहार की जांच की जानी चाहिए और सुनिश्चित किया जाना चाहिए के वे पर्याप्त तरल पदार्थ लें. बच्चों के लिए गर्मियों में देखभाल करने वाला किट होने से वे जीवन रक्षक हो सकते हैं और इससे उनमें आत्म निर्भरता भी बढ़ती है. किट की आवश्यक चीजों में ग्लूकोज या ओआरएस की पुड़िया, पानी की बोतल, टोपी, धूप के चश्मे और गर्मी में क्या करें क्या न करें जैसे निर्देश साफ-साफ लिखे होने चाहिए.