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कोविंद के नाम पर महागठबंधन में मतभेद, विपक्षी एकता में पड़ेगी दरार!

केन्द्र में सत्तारुढ़ NDA की ओर से बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा के साथ बिहार में सत्तारुढ़ जदयू-राजद-कांग्रेस महागठबंधन में मतभेद की सुगबुहाहट की उम्मीद जताई जा रही है.

कोविंद के नाम पर महागठबंधन में मतभेद, विपक्षी एकता में पड़ेगी दरार!
रामनाथ कोविंद के नाम पर महागठबंधन में मतभेद की उम्मीद जताई जा रही है

नई दिल्ली: केन्द्र में सत्तारुढ़ NDA की ओर से बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा के साथ बिहार में सत्तारुढ़ जदयू-राजद-कांग्रेस महागठबंधन में मतभेद की सुगबुहाहट की उम्मीद जताई जा रही है.

मीडिया सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार महागठबंधन में हैं लेकिन वो फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं. पिछली बार भी उन्होंने एनडीए गठबंधन से हटकर प्रणव मुखर्जी को समर्थन करने का फैसला किया था. उनके अनुसार रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल के साथ दलित चेहरा भी हैं लिहाजा नीतीश के लिए उनकी उम्मीदवारी को नकारना आसान नहीं होगा.

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उनके अनुसार फिलहाल यह कहना मुश्किल हैं कि उनके मन में क्या चल रहा हैं. पहले भी नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों को लेकर वो केंद्र सरकार का समर्थन कर चुके हैं.बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजभवन पहुंचकर उनसे मुलाकात की. नीतीश ने कोविंद से मुलाकात के बाद कहा, 'मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर यह प्रसन्नता की बात है कि बिहार के राज्यपाल देश के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित हुए हैं.'

यह पूछे जाने पर कि क्या रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर जेडीयू का समर्थन है, नीतीश ने कहा, 'इन प्रश्नों का उत्तर पूछना अभी मुनासिब नहीं है.' नीतीश ने कहा, 'हमारी लालू जी से भी बातचीत हुई है. सोनिया जी का भी फोन आया था. मैंने अपनी भावना से अवगत भी कराया है, लेकिन इन सब चीजों पर आगे भी बातचीत होगी.'

राजनीतिक गलियारे में नीतीश के बयान को रामनाथ कोविंद की उम्मीदवारी का स्पष्ट समर्थन के रूप में माना जा रहा है। राष्ट्रपति के पिछले चुनाव भी नीतीश कुमार ने राजग में रहते कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव मुखर्जी का समर्थन किया था। राजग की ओर से पीए संगम राष्ट्रपति के प्रत्याशी बने थे.

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नीतीश कुमार इसके पहले भी नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, कश्मीर में आतंकियों के खिलापफ हो रही सैन्य कार्रवाई सहित कई ज्वलंत मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार के साथ दिखे है.

वहीं मीडिया सूत्रों की मानें तो कहा जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को राष्ट्रपति प्रत्याशी बनाने पर जदयू बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद के साथ होंगे. राज्यपाल के रूप में रामनाथ कोविंद का मुख्यमंत्री से कभी टकराव नहीं हुआ. लोकायुक्त विधेयक को छोड़ उनके कार्यकाल मे राज्यपाल ने सभी विधेयकों पर सहमति दी. शराबबंदी को लेकर नये कानून से संबंधित विधेयक पर राज्यपाल ने सहमति दी.

रामनाथ कोविंद के नाम पर मायावती का स्टैंड है अलग

रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए जाने पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि 'अगर विपक्ष ने किसी बड़े दलित चेहरे को उम्मीदवार खड़ा नहीं किया तो उनकी पार्टी कोविंद के प्रति सकारात्मक रहेगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह और बेहतर होता जब बीजेपी किसी गैर राजनीतिक दलित चेहरे का नाम प्रस्तावित करती.'

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मायावती के इस बयान से लालू यादव और नीतीश कुमार को करारा झटका लग सकता है. खासकर लालू यादव को जो तमाम विपक्षी दलों को एकसाथ एक मंच पर लाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं. इस बीच कांग्रेस द्वारा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है. अगर ऐसा होता है तो मायावती को तय करना है कि उनकी नजर में रामनाथ कोविंद बड़े दलित नेता हैं या मीरा कुमार.

गौरतलब है कि सोमवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने रामनाथ कोविंद का नाम राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर किया है.