चीन मीडिया ने कहा- भारत अब भी 1962 जैसा, नेहरू वाली गलती न करें मोदी

'ग्लोबल टाइम्स' के संपादक हू शी जिन (HU XIJIN) ने अपने वीडियो संदेश में डोकलाम विवाद पर भारत को गीदड़भभकी दी है. 1 मिनट 42 सेकेंड के इस वीडियो में हू शी जिन ने कहा है कि "भारत अगर लगातार चीन की चेतावनी को लगातार दरकिनार करता रहा तो निश्चित ही युद्ध होकर रहेगा.नई दिल्ली आज भी 1962 के जवाहर लाल नेहरू की तरह अनुभवहीन है." 

चीन मीडिया ने कहा- भारत अब भी 1962 जैसा, नेहरू वाली गलती न करें मोदी
चीनी सरकार के मुखपत्र ने फिर दी भारत को धमकी (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः डोकलाम को लेकर भारत-चीन सीमा पर विवाद जारी है. चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. वहीं दूसरी तरफ भारत भी किसी भी तरह से पीछे हटने को तैयार नहीं है. चीनी मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो दोनों देशों के बीच पिछले कई दिनों से जारी तनातनी किसी भी समय जंग का रूप ले सकती है. हालांकि दोनों देशों की सरकारों ने मानें तो दोनों शांति से मामले को सुलझाने की ओर अग्रसर है. लेकिन चीनी सरकार का मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' (GLOBAL TIMES) लगातार भारत को साल 1962 की याद दिला रहा है. ग्लोबल टाइम्स कई बार अपने संपादकीय में 1962 में भारत-चीन युद्ध के बारे में लिखकर भारत के सब्र का इम्तिहान ले रहा है. इसी की ताजा कड़ी में 'ग्लोबल टाइम्स' ने एक बार फिर बार भारत की क्षमता को कमतर आंकते हुए चेताया है.

'ग्लोबल टाइम्स' के संपादक हू शी जिन (HU XIJIN) ने अपने वीडियो संदेश में डोकलाम विवाद पर भारत को गीदड़भभकी दी है. 1 मिनट 42 सेकेंड के इस वीडियो में हू शी जिन ने कहा है कि "भारत अगर लगातार चीन की चेतावनी को लगातार दरकिनार करता रहा तो निश्चित ही युद्ध होकर रहेगा.नई दिल्ली आज भी 1962 के जवाहर लाल नेहरू की तरह अनुभवहीन है." वीडियो में कहा गया है कि भारत खुद को विपरीत हालात से निपटने के लिए तैयार नहीं कर रहा है बल्कि देश की जनता को सब कुछ ठीक होने की दिलासा दे रहा है.  

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वीडियो में एक भारतीय अखबार का हवाला भी दिया गया है जिसमें कहा गया है कि चीन कभी भारत पर हमला नहीं कर सकता. यहां तक कि हल्की सैन्य कार्रवाई का रिस्क भी नहीं लेगा. इसके जवाब में ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है कि चीन भी युद्ध नहीं बल्कि शांति की बहाली चाहता है और साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहता है. लेकिन अगर भारतीय सेना लगातार चीन की धरती मंडराएगी तो स्थितियां अलग हो सकती हैं. 

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ग्लोबल टाइम्स के वीडियो में कहा गया है कि अगर भारत चालाकी करेगा तो युद्ध को रोकना मुश्किल है और भारत लगातार चीन की चेतावनी को अनसुना करता रहा तो युद्ध ही एक मात्र विकल्प बचेगा. 1962 में भी नेहरू को लगा था कि चीन हमला नहीं करेगा लेकिन भारत अब भी उसी तरह की अनुभवहीनता दिखा रहा है.चीन के सरकारी मीडिया का बौखलाहट से भरा ये वीडियो ऐसे समय में जारी किया है जब भारत की ओर से कूटनीतिक तौर पर मुद्दे को सुलझाने की कोशिशें जारी हैं.

भारत अगर यह सोच रहा है कि डोकलाम में चल रहे सीमा विवाद को लेकर भड़काने के बावजूद चीन कोई प्रतिक्रिया नहीं करेगा तो वह 1962 की तरह एकबार फिर भ्रम में है. चीन के एक दैनिक समाचार पत्र में मंगलवार (8 अगस्त) को प्रकाशित स्तंभ में यह बात कही गई है. सरकारी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि अगर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'चीन की धमकियों' को नजरअंदाज करते रहे तो चीन की ओर से सैन्य कार्रवाई की संभावना को टाला नहीं जा सकता.

ग्लोबल टाइम्स का यह संपादकीय भारत से आई उस खबर के जवाब में है, जिसमें कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों को विश्वास है कि चीन, भारत के साथ युद्ध का जोखिम नहीं लेगा. ग्लोबल टाइम्स इससे पहले भी 1962 के युद्ध का उदाहरण पेश कर चुका है. मंगलवार को प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है, "भारत ने 1962 में भी भारत और चीन सीमा पर लगातार भड़काने का काम किया था. उस समय जवाहरलाल नेहरू की सरकार को पूरा भरोसा था कि चीन दोबारा हमला नहीं करेगा. हालांकि नेहरू सरकार ने घरेलू एवं कूटनीतिक स्तर पर जूझ रही चीन सरकार की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर दृढ़ता को कमतर करके आंका था."

संपादकीय में आगे कहा गया है, "55 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन भारत सरकार हमेशा की तरह अब भी भ्रम में है. 1962 के युद्ध से मिला सबक वे आधी सदी तक भी याद नहीं रख पाए. अगर नरेंद्र मोदी की सरकार नियंत्रण से बाहर जा रही स्थिति को लेकर दी जा रही चेतावनी के प्रति बेखबर रही, तो चीन को प्रतिक्रिया में कार्रवाई करने से रोकना संभव नहीं हो सकेगा." सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में करीब दो महीने से बनी तनाव की स्थिति में जरा भी कमी नहीं आई है और दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध जारी है. चीन की सरकार, चीनी मीडिया और चीन के शीर्ष वैचारिक संगठन लगातार भारत को युद्ध की धमकी देने में लगे हुए हैं.