India Shelter to Iranian Warship News: ईरानी युद्धपोत IRIS DENA के अमेरिकी पनडुब्बी का निशाना बनने के बाद भारत ने ईरान के दूसरे युद्धपोत को डूबने से बचा लिया है. भारत ने IRIS LAVAN को अपने पोर्ट पर शरण दी, जिससे उसके 183 नौसैनिकों की जान बच गई है.
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India Gives Shelter to Iranian Warship: अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरान के युद्धपोत IRIS DENA को टॉरपीडो दागकर डुबो देने की घटना के बाद भारत ने तेज कार्रवाई करते हुए उसके दूसरे युद्धपोत IRIS LAVAN को जलसमाधि लेने से बचा लिया. उसने लावन को अपने पोर्ट में ठहरने की अनुमति दी. ऐसा करके उसने ईरान के 183 नौसैनिकों की जान बचा ली. सूत्रों के मुताबिक, ईरान के दोनों युद्धपोत भारत में हुए अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास मिलन में शामिल होने के लिए भारत आए हुए थे. ईरानी नौसेना को आशंका थी कि युद्धाभ्यास से लौटते समय अमेरिकी नौसेना उसके युद्धपोतों पर हमला कर सकती है. लिहाजा उसने श्रीलंका के दक्षिण में IRIS DENA को डुबाने की घटना से कुछ दिन पहले भारत से इस संबंध में अनुरोध किया.
ईरान ने कहा कि वह क्षेत्र में मौजूद ईरानी जहाज़ IRIS LAVAN को अपने यहां ठहरने की अनुमति दे. यह अनुरोध 28 फरवरी 2026 को प्राप्त हुआ था. जिसमें बताया गया था कि जहाज में तकनीकी समस्या आने के कारण उसे कोच्चि बंदरगाह पर तत्काल डॉकिंग की जरूरत है. इस अनुरोध को 1 मार्च को मंजूरी दी गई. इसके बाद IRIS LAVAN ने 4 मार्च को कोच्चि में डॉक किया. उसके 183 क्रू मेंबर फिलहाल कोच्चि में भारतीय नौसेना के आवासीय परिसर में ठहराए गए हैं.
बताते चलें कि ईरान के खिलाफ चल रहे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में अमेरिका उसके खिलाफ ताबड़तोड़ हमले कर रहा है. उसने अपनी परमाणु पनडुब्बी से टॉरपीडो दागकर ईरानी नौसेना के माउज-क्लास फ्रिगेट IRIS DENA को श्रीलंकाई जलसीमा के पास डुबो दिया था. उस पर यह हमला 4 मार्च को किया गया था.
घटना के समय IRIS DENA भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होकर वापस लौट रहा था. इस हमले के समय युद्धपोत पर करीब 180 लोग सवार थे. जिनमें से 87 के शव श्रीलंका नेवी ने बरामद किए, साथ ही 32 घायलों को भी बचाया गया. बाकी बचे नौसैनिकों की तलाश में भारतीय नौसेना और श्रीलंका नेवी सर्च ऑपरेशन चला रही हैं.
भारत में आयोजित हुए इस इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में IRIS DENA के साथ IRIS LAVAN ने भी भाग लिया था. यह ईरानी नौसेना का एम्फिबियस जहाज है, जो ट्रेनिंग और गुडविल विजिट के लिए इस्तेमाल होता है. फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए वह 25 से 28 फरवरी तक भारत की जलसीमा में रहा था. जब वापसी का समय आया तो इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के बादल छा गए.
इसी दौरान ईरान ने भारत से संपर्क करके बताया कि जहाज में तकनीकी समस्या आ गई है, जिसके लिए डॉकिंग जरूरी हो गई है. भारत ने उसके आग्रह को मानते हुए मानवीय आधार पर अनुमति दे दी. जिसके बाद से यह जहाज अब सुरक्षित रूप से कोच्चि में है.
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह फैसला शुद्ध तकनीकी आधार पर किया गया है. इस युद्ध में भारत किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं कर रहा है. भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत से समाधान निकालने की अपील की है.