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Indo-US Defense Deal: क्या अब ठंडा होगा तनाव का तवा? अमेरिका से भारत ने कर ली 113 जेट इंजन की बड़ी डील, समझें मायने

HAL-GE BIG Defense Deal: भारत की अमेरिका के साथ हुई इस डील को पिछले कुछ समय से चल रही ट्रेड टैरिफ के बढ़ते हुए तनाव के बावजूद हुई इस डील को लेकर ये माना जा सकता है कि दोनों देशों के बीच डिफेंस डील जैसे अहम मुद्दों को ग्लोबल पॉलिटिक्स के ऊपर रखते हैं. 

Indo-US Defense Deal: क्या अब ठंडा होगा तनाव का तवा? अमेरिका से भारत ने कर ली 113 जेट इंजन की बड़ी डील, समझें मायने

Indo-US Deal: साल 2014 में भारत की सत्ता संभालते ही मोदी सरकार ने भारत के डिफेंस की मजबूती की ओर जोरदार फोकस किया है. मोदी सरकार ने भारत के डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ी. इसका उदाहरण हम हॉल के सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देख चुके हैं. अब भारत ने अमेरिका के साथ टैरिफ ट्रेड को लेकर बढ़ते तनाव के बीच भी अमेरिका के साथ अपने स्वदेशी तेजस हल्के लड़ाकू विमानों के लिए 113 इंजनों के खरीद की डील पर मुहर लगाई है. यह डील भारतीय तेजस विमानों को और भी ताकत देंगे. यह समझौता करीब एक बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 8,870 करोड़ रुपये) का है. यह डील भारत-अमेरिका के बीच अब तक की सबसे बड़ी एयरोस्पेस डील्स में से एक मानी जा रही है.

भारत अपनी स्वदेशी रूप से निर्मित हल्की लड़ाकू विमान तेजस के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से 113 इंजन खरीद रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने इस संबंध में शुक्रवार (7 नवंबर) को जनरल इलेक्ट्रिक के साथ एक समझौता किया. भारत की अमेरिका के साथ हुई इस डील को पिछले कुछ समय से चल रही ट्रेड टैरिफ के बढ़ते हुए तनाव के बावजूद हुई इस डील को लेकर ये माना जा सकता है कि दोनों देशों के बीच डिफेंस डील जैसे अहम मुद्दों को ग्लोबल पॉलिटिक्स के ऊपर रखते हैं और इसके साथ ही दोनों के बीच ट्रेड टैरिफ को लेकर आए तनाव को कम करने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है. 

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ये डील? 
भारत के नीले आसमान में गरजने वाला तेजस हल्का लड़ाकू विमान (LCA Tejas) देश की तकनीकी शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। यह विमान पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है. दुश्मन के इलाके में घुसकर एयर डिफेंस और स्ट्राइक मिशन को अंजाम देना. हाल ही में तेजस के इंजन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है. भारत ने अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस के साथ समझौता किया है, जिसके तहत GE F404-GE-IN20 इंजन की आपूर्ति की जाएगी। ये इंजन 2027 से 2032 के बीच भारत को मिलेंगे. दिलचस्प बात यह है कि यही इंजन पहले से LCA Tejas Mk1A जेट्स में इस्तेमाल हो रहा है. 

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भारत - अमेरिका के बीच HAL-GE डील क्यों है इतनी खास?
यह इंजन तेजस को न सिर्फ और अधिक गति देता है, बल्कि उसे ऊंचाई पर दुश्मन से मुकाबले में और भी सक्षम बनाता है. हालांकि इसके पहले भी साल 2021 में भारत के ऑर्डर किए गए 99 इंजनों की डिलीवरी में काफी देरी हुई. इस देरी की वजह से फाइटर जेट्स के रोलआउट की स्पीड में काफी कमी आई है. रॉयटर्स के मुताबिक जनरल इलेक्ट्रिक ने बताया कि इस डिलीवरी में देरी के पीछे COVID-19 के बाद सप्लाई चेन मुद्दों की वजह से हुई. अब तक इस डील में महज चार इंजन ही आ पाए हैं.

यह भी पढ़ेंः तेजस Mk-1A पर 'संकट'! हथियार परीक्षण में देरी के कारण HAL ने रोका प्रोडक्शन

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Ravindra Singh

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