अग्नि 5 का सफल परीक्षण, 5,000 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम

अग्नि 5 तीन चरणों में मार करने वाली मिसाइल है जो 17 मीटर लंबी, दो मीटर चौड़ी है और 1.5 टन तक के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।. 

अग्नि 5 का सफल परीक्षण, 5,000 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम
परीक्षण के दौरान रडारों, ट्रैकिंग उपकरणों और अवलोकन केंद्रों के माध्यम से मिसाइल के उड़ान प्रदर्शन का पता लगाया गया एवं निगरानी की गई. (फोटो साभार - @DefenceMinIndia)

बालासोर (ओडिशा): भारत ने सोमवार को ओडिशा तट के पास डॉ अब्दुल कलाम द्वीप से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि 5 का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया. यह मिसाइल 5,000 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है. रक्षा सूत्रों ने बताया कि सतह से सतह पर मार करने वाली, स्वदेश में विकसित इस मिसाइल का यह सातवां परीक्षण है.

अग्नि 5 तीन चरणों में मार करने वाली मिसाइल है जो 17 मीटर लंबी, दो मीटर चौड़ी है और 1.5 टन तक के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. 

एक रक्षा सूत्र ने बताया,‘इस मिसाइल का परीक्षण सोमवार दोपहर बंगाल की खाड़ी के डॉ अब्दुल कलाम द्वीप पर इंटिग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) के लॉन्च पैड संख्या चार से एक मोबाइल लॉन्चर से किया गया.’ उन्होंने बताया, 'यह प्रयोगकर्ता से जुड़ा परीक्षण था. सामरिक बल कमान ने डीआरडीओ वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इसका परीक्षण किया.'  परीक्षण के दौरान रडारों, ट्रैकिंग उपकरणों और अवलोकन केंद्रों के माध्यम से मिसाइल के उड़ान प्रदर्शन का पता लगाया गया एवं निगरानी की गई.

भारत के शस्त्रागार में अग्नि मिसाइल श्रृंखला की चार मिसाइले हैं- 700 किलोमीटर तक लक्ष्य भेद सकने वाली अग्नि एक, 2,000 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि दो, 2,500 किलोमीटर से 3,500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज वाली अग्नि तीन एवं अग्नि चार मिसाइल है. अग्नि 5 मार्ग एवं दिशा-निर्देशन, विस्फोटक ले जाने वाले शीर्ष हिस्से और इंजन के लिहाज से सबसे उन्नत है.

एक अधिकारी ने बताया, 'मिसाइल में लगे तेज गति वाले कंप्यूटर और त्रुटि झेल सकने वाले सॉफ्टवेयर ने मजबूत एवं विश्वसनीय मोटरयान ने अग्नि 5 मिसाइल को परीक्षण के दौरान निर्देशित किया.' मिसाइल को इस तरीके से प्रोग्राम किया गया है कि प्रक्षेपण पथ के शीर्ष पर पहुंचने के बाद वह गुरुत्वाकर्ण बल के कारण और तेज गति से लक्ष्य तक पहुंचने के अपने सफर को जारी रखते हुए धरती की ओर मुड़ती है.