जम्मू-कश्मीर में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल 2022 तक हो जाएगा पूरा

जम्मू-कश्मीर में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल (World's Highest Railway Bridge) अगले साल तक तैयार हो जाएगा. रियासी जिले (Reasi district) में चिनाब नदी पर बनाया जा रहा यह पुल एफिल टावर से लगभग 35 मीटर ऊंचा होगा.

जम्मू-कश्मीर में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल 2022 तक हो जाएगा पूरा
फोटो: WION

जम्मू: जम्मू-कश्मीर में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल (World's Highest Railway Bridge) अगले साल तक तैयार हो जाएगा. रियासी जिले (Reasi district) में चिनाब नदी पर बनाया जा रहा यह पुल एफिल टावर से लगभग 35 मीटर ऊंचा होगा. प्रोजेक्ट मैनेजर डिप्टी चीफ इंजीनियर आरआर मलिक (RR Malik) ने Zee News के सहयोगी चैनल WION को बताया कि निर्माण पूरा करने की डेडलाइन अगस्त, 2022 है. 

इस सवाल के जवाब में कि दुनिया के सबसे ऊंचे पुल का निर्माण कितना कठिन है? मलिक ने कहा, ‘इस तरह के इलाके में ऐसा पुल बनाना आसान काम नहीं है’. यह कश्मीर घाटी को कटरा और देश के बाकी हिस्से से जोड़ेगा. इसके तैयार होने के बाद जम्मू स्थित कटरा से श्रीनगर की यात्रा का समय 5-6 घंटे कम हो जाएगा.

वैष्णो देवी मंदिर के लिए प्रसिद्ध जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले को उम्मीद है कि पुल का निर्माण होने के बाद पर्यटन में तेजी देखने को मिलेगी.

रियासी के डिप्टी कमिश्नर इंदु कंवल चिब (Indu Kanwal Chib- KAS) ने बताया कि यह अपनी तरह का अकेला पुल है जिस पर इस पर हेलीपैड भी होगा. इससे दिल्ली से लोगों के लिए हेलिकॉप्टर से यहां आना संभव हो पाएगा. पुल स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के दरवाजे खोलेगा और अर्थव्यवस्था में भी मजबूती आएगी. डिप्टी कमिश्नर के मुताबिक, स्थानीय लोग बेसब्री से पुल के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. 

इस रेलवे पुल की कुल लंबाई 1.3 किमी लंबी है और यह रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक के तीव्रता वाले भूकंप को झेलने की क्षमता रखता है. कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा यह प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है और यह उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का हिस्सा है.

गौरतलब है कि सुरक्षा चिंताओं सहित कई मुद्दों के चलते इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पहले से ही काफी विलंब हो चुका है. हालांकि, अब उम्मीद की जा रही है कि प्रोजेक्ट 2022 में पूरा हो जाएगा. यह अपनी तरह का अनोखा रेलवे पुल होगा. विस्फोट एवं भूकंप रोधी गुणों के साथ ही इसमें एक यूनिक सिग्नल प्रणाली भी होगी, ताकि इतनी ऊंचाई पर तेज हवाओं का ट्रेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़े.

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