स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कही राहत वाली बात, 'भारत में विकसित देशों जैसी तबाही नहीं मचाएगा कोरोना'

कोरोना महामारी (Coronavirus) के बढ़ते प्रकोप के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार को भरोसा दिलाया कि भारत में कुछ विकसित देशों जैसी स्थिति नहीं होगी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश खराब से खराब स्थिति का सामना करने के लिए भी तैयार है.

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कही राहत वाली बात, 'भारत में विकसित देशों जैसी तबाही नहीं मचाएगा कोरोना'
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन

नई दिल्ली: कोरोना महामारी (Coronavirus) के बढ़ते प्रकोप के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार को भरोसा दिलाया कि भारत में कुछ विकसित देशों जैसी स्थिति नहीं होगी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश खराब से खराब स्थिति का सामना करने के लिए भी तैयार है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में कोरोना के विकसित देशों जैसे तबाही मचाने की आशंका नहीं है. लेकिन फिर भी हमने इस तरह तैयारी की है कि बुरी से बुरी स्थिति का सामना कर सकें.

स्वास्थ्य मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से COVID-19 पर स्वास्थ्य मंत्रियों और पूर्वोत्तर राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए आगे कहा कि कोरोना से लड़ाई में भारत का रिकॉर्ड बेहतर हो रहा है. COVID-19 से होने वाली मृत्यु दर लगभग 3.3% बनी हुई है और ठीक होने की दर 29.9% तक बढ़ गई है, जो कि अच्छे संकेत हैं. उन्होंने आगे बताया कि पिछले तीन दिनों में कोरोना का डबलिंग रेट करीब 11 रहा है, इसी तरह यदि सात दिनों की बात करें, तो यह 9.9 दिन है.  

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डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि ‘हमारे पास COVID-19 मरीजों के उपचार के लिए विशेष रूप से 843 अस्पताल हैं, जिनमें लगभग 1,65,991 बिस्तर हैं. जबकि पूरे देश में 1, 991 COVID-19 स्वास्थ्य केंद्र हैं और वहां 1,35, 643 बेड की व्यवस्था है. इसमें आइसोलेशन के साथ-साथ आईसीयू बेड भी शामिल हैं’. उन्होंने आगे बताया कि देशभर में 7, 645 क्वारंटाइन सेंटर है. हमने 69 लाख N-95 मास्क वितरित किए हैं, साथ ही केंद्र द्वारा राज्य सरकारों को कुल 32.76 लाख PPE प्रदान की गई हैं. हमने पुणे की एक टेस्टिंग लैब से शुरुआत की थी अब देश में 453 से अधिक प्रयोगशालाएं हैं.  केंद्रीय मंत्री ने कहा, कल शाम हमने विभिन्न राज्यों के आंकड़ों का मूल्यांकन किया और पाया कि केवल 0.38 प्रतिशत मरीज वेंटिलेटर पर थे. 1.88 प्रतिशत को ऑक्सीजन की सहायता की आवश्यकता थी और 2.21 प्रतिशत आईसीयू बेड पर थे.  

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