'अर्थ' एक सांस्‍कृतिक पर्व है...ये अपनी जड़ों से जुड़ने का प्रयास है: श्रेयसी गोयनका

'अर्थ' की फाउंडर श्रेयसी गोयनका ने Zee News से बातचीत में कहा कि युवाओं को फोकस कर इस महोत्सव की नींव रखी गई है.

'अर्थ' एक सांस्‍कृतिक पर्व है...ये अपनी जड़ों से जुड़ने का प्रयास है: श्रेयसी गोयनका

नई दिल्‍ली: भारत की खोज, संस्‍कृति और परपंरा से एक बार फिर जुड़ने की मुहिम के तहत तीन दिवसीय सांस्‍कृतिक पर्व 'अर्थ: सांस्‍कृतिक महोत्‍सव' (Arth: A culture fest) का आगाज 21 फरवरी को हुआ. इस सिलसिले में 'अर्थ' की फाउंडर श्रेयसी गोयनका ने Zee News से बातचीत में कहा कि युवाओं को फोकस कर इस महोत्सव की नींव रखी गई है. इसका मकसद अपनी सांस्‍कृतिक जड़ों से जुड़ाव और गौरवशाली इतिहास, परंपरा और सभ्‍यता से रूबरू होना है. यह एक तरह से परंपरा और आधुनिकता के बीच संवाद है. इस महोत्‍सव के माध्यम से हम पिछले कई वर्षों से समाज को भारतीय संस्‍कृति से जोड़ने का काम कर रहे हैं. इस कार्यक्रम में हर क्षेत्र के लोग हिस्सा ले रहे हैं और हमें उम्मीद है कि देश का युवा अपनी पुरानी सभ्यता और संस्कृति को इस आधुनिकता के दौर में सहेज कर रखेगा.

इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए राज्यसभा सांसद डॉ सुभाष चंद्रा ने कहा कि यह भारतीय संस्कृति का मंच है और यहां कोई भी अपने विचार रख सकता है. इस सांस्‍कृतिक पर्व ने युवा मन में सभ्‍यता और संस्‍कृति के मन में जिज्ञासा उत्‍पन्‍न की है. मेरे विचार से संस्‍कृति मानव जाति के लिए सब कुछ है. प्राचीन ग्रंथों का जिक्र करते हुए कहा कि संस्‍कृति का अर्थ सिर्फ सरकार की परिभाषा से नहीं समझना चाहिए. प्राचीन ग्रंथों का अध्‍ययन किया जाए तो देखेंगे कि उनमें भी राजा यानी सरकार के कर्तव्‍य बताए गए हैं. उसमें बताया गया है कि राजा को किस तरह कर संग्रह करना चाहिए. आज की सरकारें उससे सीख ले सकती हैं.

#IndiaKaArth- हमारे जीवन का हर हिस्‍सा संस्कृति का हिस्सा है: सुभाष चंद्रा 

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उन्‍होंने कहा कि आज के युवा संस्‍कृति को लेकर कंफ्यूज हैं जबकि हमारे जीवन का हर हिस्‍सा संस्‍कृति का हिस्‍सा है. परंपरा और आधुनिकता के संदर्भ में कहा कि भारतीय संस्‍कृति की सोच पूरी तरह से वैज्ञानिक है. उन्‍होंने भारतीय सभ्‍यता में नमस्‍कार और पैर छूने जैसे अभिवादन के तरीके के पीछे जुड़ी वैज्ञानिक संकल्‍पना के बारे में बताया. इसके साथ ही कहा कि पिछले ढाई हजार वर्षों में हमारी संस्‍कृति पर कई स्‍तरों के माध्‍यम से कुठाराघात हुआ है. लेकिन इसके बावजूद भारतीय संस्‍कृति ही दुनिया की एकमात्र संस्‍कृति है कि जिसके पास दुनिया की समस्‍याओं का पूर्ण समाधान है.

उन्‍होंने कहा कि इस वक्‍त दुनिया की आबादी तकरीबन आठ अरब है लेकिन हर शख्‍स के जीवन में किसी न किसी चीज की कमी है. यानी इस दुनिया में एक चीज कॉमन है और वह है दुख (Suffering). इसके साथ ही जब आप भारतीय दर्शन को देखेंगे तो पाएंगे कि गौतम बुद्ध से लेकर हमारे संपूर्ण जातीय इतिहास में इसका समाधान खोजने का प्रयास किया गया है.

सुभाष चंद्रा ने कहा कि इस लिहाज से देखें तो दुनिया की संपूर्ण समस्‍याओं का हल खोजने का प्रयास हमारे मनीषियों ने किया है. हम भले ही अपनी कहानियों को मिथक, किवदंतियां कहें लेकिन उनके पीछे एक गहरी वैज्ञानिक सोच छुपी है. हमें उसको समझना चाहिए और गर्व करना चाहिए. इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा कि हमारी साढ़े तीन हाथ की काया में संपूर्ण ब्रह्मांड का रहस्‍य छुपा है.

उल्‍लेखनीय है कि 'अर्थ' का इस बार दूसरा सीजन आयोजित हो रहा है. दरअसल, 'अर्थ' एक सांस्‍कृतिक उत्सव है, जो हमारी संस्कृति के मायनों को जीवित रखता है. आज से शुरू हुआ यह फेस्टिवल साहित्य, संस्कृति, समाज, संगीत, परंपराओं, इतिहास और कला पर केंद्रित है. इस महोत्‍सव का आयोजन दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्‍टेडियम में हो रहा है. Arth- A Culture Fest तीन दिन (21, 22 और 23 फरवरी) तक चलेगा. इस तीन दिवसीय फेस्टिवल में आपको भारत की संस्‍कृति की झलक दिखेगी.