VIDEO: जब भारत में निर्मित लड़ाकू विमान 'तेजस' में हवा में भरा गया ईंधन

वायुसेना (आईएएफ) ने बताया कि उसने स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में पहली बार सफलतापूर्वक हवा में ही ईंधन भरा.

VIDEO: जब भारत में निर्मित लड़ाकू विमान 'तेजस' में हवा में भरा गया ईंधन
फाइल फोटो

नई दिल्ली: वायुसेना (आईएएफ) ने बताया कि उसने स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में पहली बार सफलतापूर्वक हवा में ही ईंधन भरा. यह उसके विकासक्रम में एक मील का पत्थर है. रूस निर्मित आईएल-78 एमकेआई टैंकर ने मंगलवार तेजस एमके आई के एक विमान में ईंधन भरा. आईएएफ ने कहा, ‘‘यह टैंकर आगरा में वायुसेना अड्डे से भेजा गया था, जबकि लड़ाकू विमान ने ग्वालियर से उड़ान भरा था. विशेष रूप से निर्मित तेजस विमान ने टैंकर के साथ ‘ड्राई कॉन्टैक्ट’ सहित कई परीक्षणों को पूरा किया.’’ इसने बताया कि इस अभ्यास पर करीब से नजर रखने के लिये एक अन्य तेजस विमान को भी तैनात किया गया था.

 

 

तेजस है दुनिया का नंबर वन फाइटर जेट
तेजस को आप हिंदुस्तान के दुश्मनों के सिर पर 13 मीटर लंबी आफत भी कह सकते हैं. दुनिया का सबसे छोटा और सबसे हल्का फ़ाइटर प्लेन तेजस दुनिया का नंबर वन फाइटर जेट है. लेकिन इसकी खूबियां भारी-भरकम हैं. बहरैन में गुरुवार को Bahrain International Airshow की शुरूआत हुई है जहां भारत के हल्के फ़ाइटर प्लेन तेजस का मुक़ाबला पाकिस्तान के लड़ाकू विमान thunder से था लेकिन तेजस के तेज के आगे पाकिस्तान का Thunder, ठंडा पड़ गया.

- पाकिस्तान का थंडर JF-17 2039 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है जबकि तेजस उससे ज़्यादा यानी 2300 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर सकता है.
- थंडर की ईंधन क्षमता सिर्फ 2300 किलोग्राम है जबकि तेजस की ईंधन क्षमता 2500 किलोग्राम है यानी ईंधन क्षमता के मामले में भी तेजस थंडर से आगे है.
- थंडर में हवा में ईंधन भरना यानी मिड एयर रिफ्यूलिंग नामुमकिन है जबकि तेजस उस तकनीक से लैस है जिसके ज़रिए उसमें हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है.
- थंडर को हवा में पहुंचने के लिए 600 मीटर लंबा रनवे चाहिए जबकि तेजस सिर्फ 460 मीटर के रनवे पर दौड़कर उड़ान भर सकता है.
- थंडर एल्यूमीनियम और स्टील से बना है जबकि तेजस में कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया गया है. इसका मतलब ये है कि तेजस पाकिस्तानी लड़ाकू विमान से काफी हल्का और प्रभावी है.
- भारी धातु से बने थंडर को रेडार की मदद से आसानी से पकड़कर निशाना बनाया जा सकता है लेकिन तेजस के साथ ऐसा करना नामुमकिन है.
- तेजस का डिज़ाइन भारतीय वैज्ञानिकों ने तैयार किया है जबकि पाकिस्तानी थंडर का डिज़ाइन, रूस के पुराने विमानों से चुराया हुआ है.
- ख़राब मौसम में भी तेजस अपना नियंत्रण नहीं खोता जबकि थंडर ख़राब मौसम में लड़खड़ाने लगता है.
- तेजस को पायलट लंबे वक्त तक लगातार उड़ा सकते हैं जबकि थंडर को उड़ाने वाले पायलट जल्दी थक जाते हैं.
- तेजस का रेडार सिस्टम 100 किलोमीटर के दायरे के पार भी देख सकता है जबकि थंडर का रेडार 75 किलोमीटर से ज़्यादा दूरी की गतिविधि को नहीं पकड़ सकता.
- वर्ष 1983 में भारत सरकार ने तेजस योजना को मंजूरी दी थी और 25 हज़ार करोड़ रुपये के खर्च से तैयार तेजस ने जनवरी 2001 में पहली बार आसमान में अपने पंख फैलाए थे.
- सबसे बड़ी बात ये है कि तेजस को भारत ने खुद विकसित किया है और ये क़रीब 65 फीसदी स्वदेशी है.
- तेजस का वजन करीब साढ़े 6 हजार किलोग्राम है.
- तेजस साढ़े तीन टन विस्फोटक लेकर उड़ान भर सकता है.
- तेजस को हवा से हवा में मार करने वाली आर-73 मिसाइलों, 23 एमएम गनों, रॉकेटों और बमों से लैस किया गया है.
- तेजस के रडार में Advanced कैमरे लगे हैं. इन कैमरों से मिसाइलों और बमों के टारगेट और रास्ते पर नजर रखी जाती है.
- तेजस दिन या रात कभी भी उड़ान भर सकता है.
- तेजस 17 डिग्री के एंगल पर टर्न ले सकता है.
- तेजस हर तरीके से दुनिया के Fourth Generation फाइटर जेट्स के साथ खड़ा हुआ दिखता है और इसकी तेजी के आगे अच्छे-अच्छे थंडर्स के पसीने छूटने तय हैं.

(इनपुट भाषा से भी)