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Project Kusha: एस-400 भी होगा 'नतमस्तक', चीन और PAK का काल साबित होगा; भारत का नया 'बाहुबली' रक्षक

Indian Air Force: ये खास डिफेंस प्रोजेक्ट भारत की मेक इन इंडिया और मेड फॉर इंडिया मुहिम में आत्मनिर्भरता का ऐसा नया और सुनहरा अध्याय है. जो चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन के किसी भी हवाई हमले में तेजी और सटीक तरीके से भारत की सुरक्षा करने के साथ दुश्मन के वार हवा में ही चूर चूर कर देगा.

Project Kusha: एस-400 भी होगा 'नतमस्तक', चीन और PAK का काल साबित होगा; भारत का नया 'बाहुबली' रक्षक

Air defence project Kush: आसमान से लेकर समंदर तक हिंदुस्तान अपनी ताकत मजबूत कर रहा है और डिफेंस सेक्टर में हिंदुस्तान की तैयारी देखकर LoC से लेकर LAC तक खलबली मची है. इसी कड़ी में भारत ने सुदर्शन चक्र के तहत अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम कुशा का परीक्षण किया है. भारत का ये नया स्वदेशी बाहुबली ना सिर्फ दुनिया के तमाम एयर डिफेंस से सिस्टम से एडवांस है बल्कि दुनिया के तमाम फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट और उनकी मिसाइलें भी इससे नहीं बच सकेंगी. ये सिस्टम चीन और पाकिस्तान के लिए काल साबित होगा. 

बीते कुछ सालों में भारत की डिफेंस और अटैक दोनों की ताकत में भारी इजाफा हुआ है. ये बात पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स को भी पता है वो टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं कि भारत के पास ऐसी ताकत आ गई है जिससे अमेरिकी F-35 का बचना नामुमकिन हो गया है. दावा किया जा रहा है कि चीन का J-35 भी अब नहीं बचेगा. 

मॉर्डन वॉरफेयर और एयर थ्रेट

ऐसे दावे इसलिए किए जा रहे हैं क्योंकि क्योंकि हिंद के नभ की निगेहबानी के लिए तैयार हो रहा है, एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम यानी ERADS कुशा. आसमान में किसी को भी चकमा देने की काबलियत रखने वाले फाइटर जेट अब हिंदुस्तान के आसमान पर गुपचुप परवाज नहीं भर पाएंगे. जिसने भी ये हिमाकत की वो फौरन वहीं ढेर हो जाएगा. हिंदुस्तान के खिलाफ हवाई साजिशों का दम भरने वाला पाकिस्तान मिशन सुदर्शन की एक मजबूत कड़ी कुशा की आहट से ही सकते में है. 

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मॉडर्न वॉरफेयर में एयर थ्रेट आम बात हो चुकी है. थल सेना की भूमिका सीमित हुई है. युद्ध जमीन के बजाय आसमान में लड़ा जा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के साथ रूस-यूक्रेन और इजरायल-ईरान टकराव में भी यही ट्रेंड दिखा. इसलिए दूसरे देशों के साथ-साथ भारत ने भी अपने एयर डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड यानी मजबूत करने की मुहिम तेज की है. जिसका सबूत है 'प्रोजेक्ट कुशा'. ताकि देश की हवाई सुरक्षा को दुश्मनों के लिए अभेद्य बनाकर किसी तरह के भी हवाई खतरे को आसमान में ही खत्म किया जा सके. 

क्या है प्रोजेक्ट कुशा?

प्रोजेक्ट कुशा हाइपरसोनिक एयर-डिफेंस सिस्टम है. जो मैक 5.5 यानी तकरीबन 6800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दुश्मन को टारगेट कर सकता है. कुशा सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम है. ये 350 किलोमीटर तक के थ्रेट को इंटरसेप्ट कर उसे तबाह करने में सक्षम है. सबसे खास बात ये कि इस प्रणाली को रूस की S-500 जैसी सुपर एडवांस सिस्टम के बराबर बताया जा रहा है. 

DRDO प्रोजेक्ट कुशा के तहत इंटरसेप्टर के 3 वेरिएंट M1, M2 और M3 को डेवलप कर रहा है. उसका टारगेट कुशा को हाइपरसोनिक एयर डिफेंस सिस्टम तक ले जाना है.

M1-2026 में M1 मिसाइल का परीक्षण होगा, ये 150 किमी तक दुश्मन के किसी भी जेट, मिसाइल और ड्रोन गिराने में सक्षम होगी. 
M2-2027 में M2 इंटरसेप्टर का परीक्षण होगा जिसकी रेंज होगी 250 किलोमीटर होगी.
M3-2028 में M3 इंटरसेप्टर का परीक्षण किया जाएगा जिसकी रेंज होगी 350 किलोमीटर होगी.

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शुरूआती जानकारी के मुताबिक प्रोजेक्ट कुशा के तहत डेवलप सिस्टम 4 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार से आती बैलिस्टिक मिसाइल को भी मार गिराने की क्षमता रखता है. कुशा को इस तरह डिजाइन किया है कि ये 2,500 से 3,000 किलोमीटर रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके री-एंट्री फेज में 4 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति पर भी इंटरसेप्ट कर सकेगी. ये इंटरसेप्शन 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक संभव है. इसकी एडवांस तकनीक से एफ-35 और एसयू-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हमलों को भी नाकाम किया जा सकेगा.

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Shwetank Ratnamber

श्वेतांक रत्नाम्बर पत्रकारिता जगत में 21 साल से ज्यादा का अनुभव रखते हैं. देश-दुनिया की ख़बरों को आसान भाषा में बताने में महारत रखने वाले श्वेतांक को राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ है...और पढ़ें

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