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VIDEO: जब असम रेजिमेंट के इस खास गाने पर झूमे अमेरिका के सैनिक

भारत-अमेरिकी सेनाओं के बीच लेविस मेकॉर्ड में युद्धाभ्यास चल रहा है.

VIDEO: जब असम रेजिमेंट के इस खास गाने पर झूमे अमेरिका के सैनिक
भारत-अमेरिका के सैनिक एक-दूसरे से सीख रहे हैं युद्ध कौशल.

नई दिल्ली: भारत (India) और अमेरिका (America) की सेनाएं इस समय अमेरिकी सैनिक अड्डे लेविस मेकॉर्ड (LEWIS McCHORD) में साझा युद्धाभ्यास कर रही हैं. यह अभ्यास 5 सितंबर से शुरू हुआ है, जो 18 सितंबर तक चलेगा. यह भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा सैनिक अभ्यास है और ये एक साल अमेरिका में, दूसरे साल भारत में आयोजित किया जाता है. युद्धभ्यास के दौरान की तरफ से जारी एक वीडियो में दोनों देशों के सैनिक असम रेजिमेंट के मार्चिंग सॉन्ग ''बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है'' पर थिरकते नजर आए.

न्यूज एजेंसी एएनआई की ओर से जारी वीडियो में भारत और अमेरिका के सैनिक एक साथ तालियां बजाते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका के संयुक्त बेस लेविस, मैककॉर्ड में ''बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है... पर हमको उसका राशन मिलता है'' गाते नजर आ रहे हैं.

''बदलू-राम का बदन ज़मीन के नीचे हैं, पर हमको उसका राशन मिलता है..'' इस गीत के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. ये गीत Assam Regiment का Regimental Song है. जो असम रेजिमेंट के ही सैनिक 'बदलू-राम' पर आधारित है. बदलू-राम दूसरे विश्व युद्ध (Second World War) के दौरान असम रेजिमेंट का हिस्सा थे. Second World War के दौरान ही वर्ष 1944 में 'कोहिमा की लड़ाई' हुई थी, जिसमें भारत और जापान के बीच युद्ध हुआ था. इसी युद्ध में बदलू-राम शहीद हो गए थे.

बहादुर बदलू-राम को उनकी शहादत के लिए तो याद किया ही जाता है, लेकिन उन्होंने शहीद होने के बाद भी कई सैनिकों की जान बचाकर मिसाल कायम कर दी. क्योंकि बदलू-राम के शहीद होने के बाद भी उनकी रेजीमेंट के रसद प्रबंधक उनके नाम का राशन लेते रहे. ये सिलसिला कुछ महीनों तक चलता रहा. जब जापान की सेना ने भारतीय सेना के दस्ते को घेर लिया, तब राशन आना बंद हो गया. उस वक्त बदलू-राम के नाम से जमा करके रखा गया राशन ही, सैन्य दस्ते के काम आया और कई जवानों की जान बच गई. बस इसी घटना पर एक सैन्य अधिकारी ने गीत लिख दिया और आज हर समारोह में उस अहसान को गा-गाकर बताया जाता है.

यह इस अभ्यास की 15वीं कड़ी है. इससे भारत और अमेरिका के बीच सैनिक संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं. भारत और अमेरिका एक-दूसरे के सैनिक अड्डों के साझा इस्तेमाल के लिए भी एक संधि कर चुके हैं. भारत और अमेरिका की नौसेना मालाबार साझा नौसैनिक अभ्यास करती हैं.

ऐसे साझा सैनिक अभ्यासों से दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे से रणनीति के गुर सीखते हैं. साथ ही ऐसे अभ्यासों से सेनाओं को साझा कमान के अंदर काम करने के लिए भी तैयार किया जाता है. युद्धाभ्यास में भारतीय और अमेरिकी सैनिक एक-दूसरे के हथियारों से भी परिचित हो रहे हैं.