China-Pakistan पर भारत की नजर, Indian Navy के बेड़े में कल शामिल होगी खतरनाक INS Karanj पनडुब्बी
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China-Pakistan पर भारत की नजर, Indian Navy के बेड़े में कल शामिल होगी खतरनाक INS Karanj पनडुब्बी

भारत को घेरने की कोशिश कर रहे चीन-पाकिस्तान से मुकाबले के लिए नौसेना को कल बड़ा हथियार मिल जाएगा. भारतीय नौसेना में कल कलवरी क्लास की पनडुब्बी INS करंज (INS Karanj) शामिल हो जाएगी. 

China-Pakistan पर भारत की नजर, Indian Navy के बेड़े में कल शामिल होगी खतरनाक INS Karanj पनडुब्बी

नई दिल्ली: चीन की विस्तारवादी नीति से मुकाबले के लिए खुद को मजबूत करने में जुटी भारतीय नौसेना (Indian Navy) को कल एक खतरनाक हथियार मिलने जा रहा है. कलवरी क्लास की तीसरी पनडुब्बी INS करंज (INS Karanj)  10 मार्च को भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगी.

इस साल के अंत में INS वेला भी शामिल होगी

INS करंज से पहले INS कलवरी और INS खंडेरी भारतीय नौसेना (Indian Navy) में शामिल हो चुकी हैं. इस साल के अंत तक INS वेला और अगले साल INS वागीर के नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है. अंतिम सबमरीन INS वागशीर 2023 तक नौसेना में शामिल होगी. 

18 तारपीडो से लैस हैं पनडुब्बियां

ये सब पनडुब्बियां 67 मीटर लंबी हैं और 37 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 12000 किमी की दूरी तक जा सकती हैं. इनमें 18 तारपीडो या 30 समुद्री सुरंगें लगाई जा सकती हैं. ये बेहद खामोशी से समुद्र में चलती हैं. इन सबमरीन में समुद्र के अंदर देखने के लिए सबसे अच्छे सोनार सिस्टम लगाए गए हैं. इसमें 8 अफसर और 35 नौसैनिक रह सकते हैं. 

नेवी में हो जाएंगीं 18 सबमरीन

INS करंज के आने से भारतीय नौसेना (Indian Navy) में परंपरागत डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन की तादाद 15 हो जाएगी. इनके अलावा भारतीय बेड़े में रूस से लीज पर ली गई न्यूक्लियर सबमरीन INS चक्र और स्वदेशी न्यूक्लियर सबमरीन INS अरिहंत, INS अरिघात भी शामिल हैं.  

AIP सिस्टम बना रही है नेवी

भारतीय नौसेना की कोई भी डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन एआईपी सिस्टम यानि AIR INDEPENDENT PROPULSION SYSTEM (AIP) से लैस नहीं है. इसलिए सबमरीन (Submarine) को अपने इंजिन को जरूरी हवा देने के लिए हर रोज समुद्र की सतह पर आना होता है. इसी समय सबमरीन को दुश्मन ट्रेक करता है और तबाह कर सकता है. एआईपी के इस्तेमाल से सबमरीन को हफ्ते में केवल एक बार ही सतह पर आना होगा और इससे उसके सुरक्षित छिपे रहने की संभावना बढ़ जाती है.

सतह पर आने की नहीं होगी जरूरत

DRDO ने 8 मार्च को सफलतापूर्वक AIP सिस्टम का परीक्षण किया और अब ये सबमरीन में लगाए जाने के लिए तैयार है. सूत्रों के मुताबिक ये सिस्टम 14 दिनों तक समुद्र में डूबे रहने और 2 दिन तक मैक्सिमम पॉवर के साथ चलाने के दोनों मुख्य परीक्षणों पर खरा उतरा है. इस सिस्टम को 6 नई सबमरीन के प्रोजेक्ट 75I के तहत बनने वाली सबमरीन में लगाया जाएगा. इन पनडुब्बियों का निर्माण कलवरी क्लास की सबमरीन के बाद शुरू होगा. 

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कुल 24 पनडुब्बियों का निर्माण कर रही है नेवी

भारतीय नौसेना (Indian Navy) की योजना कुल 24 सबमरीन बनाने की है, जिनमें कलवरी क्लास की 6 सबमरीन के बाद 75I की 6 सबमरीन बनाई जाएंगी. इनके साथ ही बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस 6 SSBN और न्यूक्लियर ताकत से चलने वाली 6 SSN भी बनाई जाएंगी.  

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