समुद्र ही नहीं पर्यावरण की भी रक्षा करेगी नौसेना, बायोडीजल और सोलर पावर को बनाएगी 'हथियार'

INECR के तहत नौसेना ने अपने हर कार्यकलाप में पर्यावरण की सुरक्षा को शामिल किया है. नौसेना अपने बजट का 1.5 फ़ीसदी इसके लिए खर्च करेगी.

समुद्र ही नहीं पर्यावरण की भी रक्षा करेगी नौसेना, बायोडीजल और सोलर पावर को बनाएगी 'हथियार'
Photo: joinindiannavy.gov.in

नई दिल्‍ली: भारतीय नौसेना ने पर्यावरण की रक्षा के लिए की जाने वाली कोशिशों के लिए अपने बजट का 1.5 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल करने का फैसला किया है. Indian navy environment conservation roadmap यानि INECR के तहत नौसेना ने अपने हर कार्यकलाप में पर्यावरण की सुरक्षा को शामिल किया है. अलग-अलग नौसैनिक बेस में 24 मेगावाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं. नौसेना ने अपनी गाड़ियों को बायोडीज़ल से चलाने के क़दम उठाने शुरू कर दिए हैं.

बेसों में सोलर पैनल और हवा के ज़रिए बिजली पैदा करने से न केवल कार्बन फुटप्रिंट में कमी आएगी बल्कि इससे भविष्य में नौसेना बिजली के मामले में काफ़ी हद तक आत्मनिर्भर हो जाएगी. नौसेना ने एक और बड़ा फैसला अपनी गाड़ियों में बायोडीज़ल के इस्तेमाल का लिया है. नौसेना साल भर में 6300 किलोलीटर हाई स्पीड डीज़ल का इस्तेमाल करती है. अब इसमें B5 ब्लेंड हाई स्पीड डीज़ल का इस्तेमाल किया जाएगा. इस क़दम से सालाना डीज़ल की ख़पत में 5 फ़ीसदी की कमी आएगी और 315 किलो लीटर हाई स्पीड डीज़ल की बचत  होगी.

हाई स्पीड डीज़ल में B5 की ब्लेडिंग का प्रोजेक्ट इसी साल विशाखापट्टनम में शुरू होने की संभावना है. नौसैनिक अड्डों और जहाज़ों में ऊर्जा की ख़पत को कम करने के लिए कमरों में खास तरह के सेंसर्स, बैटरी से चलने वाली गाड़ियां, सोलर स्ट्रीट लाइट, एलईडी लाइट लगाने की शुरुआत कर दी गई है. पानी की बचत के लिए ड्रिप इरीगेशन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और पानी को साफ़ करने से निकलने वाले ख़राब पानी के इस्तेमाल के लिए तैयारियां की गई हैं.

कचरे को सही ढंग से निबटाने के लिए अंडमान के पोर्ट ब्लेयर में Segregated Waste Collection Centre की शुरुआत की गई है. नौ सैनिक अड्डों में कचरे को फ़ायदेमंद ढंग से निबटाने के लिए बायोगैस प्लांट्स, कंपोस्ट पिट्स, वर्मी कल्चर, पेपर रिसाइक्लिंग मशीन और कंपोस्टर मशीनें लगाकर रसोई में इस्तेमाल होने वाली गैस में बचत करने की तैयारी है. समुद्रों और बंदरगाहों को साफ़ रखने पर भी जो़र दिया जा रहा है. जहाज़ों और बंदरगाहों से निकलने वाले ज़हरीले पानी को समुद्र में मिलने से पहले साफ़ करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट्स लगाए जा रहे हैं.