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बालाकोट एयर स्ट्राइक से सदमे में पाकिस्तान, साल में सिर्फ दो बार हुई घुसपैठ की कोशिश

पाकिस्तान की सीमा के अंदर लगभग 17 ऐसे लॉन्चिंग पैड्स हैं जहां से आतकंवादियों को कश्मीर में धकेला जाता है. बालाकोट पर हमले के बाद लॉन्च पैड्स बंद कर दिए गए थे. 

बालाकोट एयर स्ट्राइक से सदमे में पाकिस्तान, साल में सिर्फ दो बार हुई घुसपैठ की कोशिश
(प्रतीकात्मक फोटो)

नई दिल्ली: पाकिस्तान ने मंगलवार की रात गुरेज सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश की और इस कोशिश में उसके दो आतंकवादी मारे गए. सीमापार से पाकिस्तानी गोलाबारी में एक महिला की भी मौत हो गई. लेकिन ख़ास बात ये है कि घुसपैठ की कोशिश एक लंबे अरसे के बाद हुई थी. 

इस साल अब तक केवल एक बार और पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की कोशिश की गई थी जब 22 मई को पाकिस्तान की तरफ से गोलाबारी का आड़ में आतंकवादियों ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी. बहुत सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि पाकिस्तान ने इतने लंबे अरसे तक किसी आतंकवादी को कश्मीर में धकेलने की कोशिश न की हो. 

पाक सीमा के अंदर हैं 17 लॉन्चिंग पैड
पाकिस्तान की सीमा के अंदर लगभग 17 ऐसे लॉन्चिंग पैड्स हैं जहां से आतकंवादियों को कश्मीर में धकेला जाता है. इन आतंकवादियों को एक या दो दिन पहले ही उनके ट्रेनिंग कैंप्स से इन लॉन्च पैड पर लाया जाता है और पाकिस्तानी सेना की फ़ायरिंग की आड़ में उन्हें लाइन ऑफ कंट्रोल के पार धकेल दिया जाता है.

घुसपैठ की ये वारदातें आमतौर पर मार्च के आखिर में शुरू होती है जब पहाड़ों से बर्फ पिघल जाती है और रास्ते और दर्रे आने-जाने लायक हो जाते हैं. घुसपैठ का ये सीजन अक्टूबर की शुरुआत तक चलता है, इसके बाद बर्फबारी के कारण पहाड़ों के रास्ते बंद होना शुरू हो जाते हैं. 

लेकिन इस साल फ़रवरी में पुलवामा में सीआरपीएफ पर हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैंप में हवाई हमले किए जिसमें बड़ी तादाद में आतंकवादी मारे गए. '

बालाकोट हमले के बाद लॉन्च पैड कर दिए गए थे बंद
एक वरिष्ठ सैनिक अधिकारी ने बताया, 'बालाकोट पर हमले के बाद लॉन्च पैड्स बंद कर दिए गए और ट्रेनिंग कैंप एलओसी से काफ़ी पीछे चले गए. पाकिस्तान की सेना ने उन्हें अपनी हरकतें रोकने के लिए कहा था कि कहीं भारत को एक और कार्रवाई का मौका न मिल जाए.'

दूसरी वजह ये थी कि बालाकोट हमले के बाद पाकिस्तान दुनिया की नज़रों में खुद को पाक-साफ दिखाना चाहता था. FATF की तरफ से किसी और सख्ती को पाकिस्तान की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था बर्दाश्त करने की हालात में नहीं है. इमरान ख़ान को अमेरिका से मदद मांगने के लिए भी जाना था. इसलिए पाकिस्तान नहीं चाहता था कि भारत को कोई आरोप लगाने का मौका मिले और कोशिश कर रहा था कि सीमा पर शांति रहे. 'अब उसके पास अक्टूबर तक का मौका है जब FATF दोबारा पाकिस्तान की समीक्षा करेगी. इन्हीं दो महीनों में वो घुसपैठ की सारी कोशिश करेगा, ' एक खुफ़िया अधिकारी ने कहा.