दुश्मन देशों से मुकाबले के लिए फिर तैयार हो रहा INS बेतवा, 2019 की तीसरी तिमाही में चीरेगा समुद्र का सीना

बता दें भविष्य में भारतीय नौसेना को और मजबूत बनाने के लिए भारतीय नौसेना ने रूस से समझौते की योजना बनाई है. भारत रूस की नौसेना के साथ साजो सामान मदद के लिए यह समझौता करना चाहता है.

दुश्मन देशों से मुकाबले के लिए फिर तैयार हो रहा INS बेतवा, 2019 की तीसरी तिमाही में चीरेगा समुद्र का सीना
फोटो साभारः twitter/@Indiannavy

मुंबईः साल 2016 में मुंबई के नौसैन्य डॉकयार्ड में दुर्घटनाग्रस्त हुए आईएनएस बेतवा की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा ने बताया कि 'INS बेतवा सुधरी हुई क्षमताओं के साथ 2019 की तीसरी तिमाही में नौसेना के बेड़े में फिर शामिल हो सकता है. पश्चिमी नौसैन्य कमान के प्रमुख जंगी जहाजों में से एक 3,850 टन के भार वाले और 126 मीटर लंबे इस युद्धपोत में यूरेन जहाज विरोधी मिसाइलें (निर्देशित मिसाइलें जिनके जरिए जहाजों या बड़ी नौकाओं को निशाना बनाया जाता है), बराक 1 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और टॉरपीडो (जल की सतह से ऊपर या नीचे दागे जाने वाला प्रक्षेपास्त्रों) से लैस है.'

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नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर वाइस एडमिरल लूथरा ने संवाददाताओं से कहा, “आईएनएस बेतवा की फिर से मरम्मत की जा रही है और इसकी क्षमताओं को भी सुधारा जा रहा है. मशीनों के साथ ही अन्य उपकरणों की भी मरम्मत की जा रही है. यह जहाज 2019 की तीसरी तिमाही तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा.” वहीं दूसरी ओर भारतीय नौसेना एडमिरल सुनील लांबा ने बताया कि 'भारतीय नौसेना रूस की नौसेना के साथ साजो सामान मदद के लिए एक समझौता करना चाहती है. इससे एक-दूसरे (दोनों नौसेनाओं) की परिसंपत्ति और बेस का इस्तेमाल हो सकेगा और संयुक्त अभियान में भी सहायता मिलेगी.

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नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि रूस के साथ साजो सामान मदद समझौते का एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है और जल्द इसे रूस के साथ साझा किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे यहां से आगे ले जाएंगे.’’ वर्तमान में भारत का अमेरिका और सिंगापुर के साथ साजो सामान मदद का समझौता है. अधिकारियों ने कहा कि समझौते से दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग प्रगाढ़ होगा. साथ ही समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में भागीदारी बढ़ेगी.