नौसेना को जल्द मिलेगा खंडेरी सबमरीन और स्टेल्थ फ्रिगेट का तोहफा, दुश्मन के जंगी जहाजों की खैर नहीं

भारत में निर्मित कलवरी क्लास की दूसरी सबमरीन आईएनएस खंडेरी (INS KHANDERI) को नौसेना में शामिल किया जाएगा और एक स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट को समुद्र में उतारा जाएगा. 

नौसेना को जल्द मिलेगा खंडेरी सबमरीन और स्टेल्थ फ्रिगेट का तोहफा, दुश्मन के जंगी जहाजों की खैर नहीं
भारतीय नौसेना को 28 सितंबर को दो नए हथियार मिलेंगे.

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना को 28 सितंबर को दो नए हथियार मिलेंगे. भारत में निर्मित कलवरी क्लास की दूसरी सबमरीन आईएनएस खंडेरी (INS KHANDERI) को नौसेना में शामिल किया जाएगा और एक स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट को समुद्र में उतारा जाएगा. ये फ्रिगेट शिवलिक क्लास फ्रिगेट के फॉलोऑन ऑर्डर में पहला है. इस तरह के कुल 7 फ्रिगेट बनाए जाएंगे जिनमें 4 को मुंबई स्थित मझगांव डॉक में और 3 को कोलकाता के GREC में बनाया जाएगा.

कलवरी क्लास की पहली सबमरीन INS KALVARI को 14 दिसंबर 2017 में नौसेना में शामिल किया गया था. इस तरह की कुल 6 सबमरीन मुंबई के मझगांव डॉक लिमिटेड में बनाई जानी है. ये सबमरीन फ्रांस के सहयोग से बन रही है और इनकी गिनती दुनिया की बेहतरीन सबमरीन में की जाती है. ये समुद्र के अंदर 37 किलोमीटर प्रति घंटे (20 नॉटिकल माइल) और सतह पर 20 किलोमीटर (11 नॉटिकल माइल) की रफ्तार से चल सकती हैं. 

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ये एक बार में 12000 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती हैं. ये समुद्र के अंदर किसी सबमरीन को तबाह कर सकती है. समुद्र की सतह पर जंगी जहाज़ों को निशाना बना सकती है. इसके अलावा इनके ज़रिये खुफिया जानकारियों एकत्र करना, समुद्र पर नज़र रखना और दुश्मन के जहाज़ों के लिए समुद्र में सुरंगे लगाने का काम कर सकती है. इनसे तारपीडो और समुद्र में मौजूद जहाज़ों को तबाह करने के लिए एंटी शिप मिसाइलें दागी जा सकती हैं. 

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भारत ने शिवालिक क्लास स्टेथ फ्रिगेट का प्रोग्राम 2000 में शुरू किया था और 2010 से लेकर 2012 तक इस तरह के तीन फ्रिगेट नौसेना में शामिल किए गए थे. ये सारे फ्रिगेट स्टेल्थ तकनीक से लैस हैं यानि दुश्मन के रडारों के  लिए इन्हें देख पाना संभव नहीं होगा. इनमें दुश्मन के हमलों से बचने के लिए बराक मिसाइलें के अलावा ब्रह्मोस मिसाइलें भी लगी हैं जिनसे दुश्मन के जहाज़ों के अलावा ज़मीन पर दुश्मन के ठिकानों पर भी सटीक हमला किया जा सकता है. ये फ्रिगेट 52 किलोमीटर प्रतिघंटे यानी 28 नॉटिकल माइल की रफ्तार से चल सकते हैं और एक बार में लगभग 10000 किलोमीटर की दूरी तय कर सकते हैं. इनमें 2 हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं.