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समंदर में पाकिस्तान को दफन करेगा 'साइलेंट किलर', भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत

भारत ने नौसेना के दम पर अपनी समुद्री सीमा को किले में तब्दील कर दिया है.

समंदर में पाकिस्तान को दफन करेगा 'साइलेंट किलर', भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत
INS खंडेरी की हिंद महासागर में मौजूदगी हिन्दुस्तान की जीत और चीन-पाकिस्तान की हार है.

नई दिल्ली: देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath singh) ने रविवार को INS खंडेरी (INS Khanderi) को भारतीय नौसेना (Indian Navy) को समर्पित कर दिया है. INS खंडेरी की हिंद महासागर में मौजूदगी हिन्दुस्तान की जीत और चीन-पाकिस्तान की हार है. भारत ने नौसेना के दम पर अपनी समुद्री सीमा को किले में तब्दील कर दिया है. खुद रक्षा मंत्री ने परमाणु हमले की धमकी देने वाले पड़ोसियों को चेतावनी दी कि समुद्री सीमा पर निगाह डाली ख़ात्मा पक्का है. समंदर के जिहादियों और दुश्मन के खिलाफ कैसे पुख्ता रणनीति बनाई है. आपको बताते हैं कि देश ने पिछले कुछ वर्षों में समुद्री सरहदों को सुरक्षित करने के लिए क्या क्या किया है.

14 दिसंबर 2017 को INS कलवरी जो कि एक न्यूक्यिलर सबमरीन है, उसे भारतीय नेवी में शामिल किया गया. अगस्त 2016 में INS अरिहंत भारतीय नेवी में शामिल किया गया, जिससे भारतीय नौसेना को नई ताकत मिली. अप्रैल 2017 में बंगाल की खाड़ी में ब्रह्रमोस का सफल परीक्षण किया गया अक्टूबर 2018 भारत ने समंदर में DSRV यानी डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल तैनात किया. समुद्र में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान DSRV का इस्तेमाल होता है. DSRV सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के पास ही है. 

इसके अलावा कोस्ट गार्ड को 10 नॉटिकल मील की दूरी तक देखने वाले कैमरे मिले. 7500 km लंबी समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए 38 ऱडार स्टेशन बनाए गए. यानी भारतीय नौसेना की ताकत दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ी. INS खंडेरी जिसकी मिसाल है. भारतीय नौसेना तेजी से गहरे पानी की ताकत यानी ब्लू वॉटर नेवी बनने की तरफ आगे बढ़ रही है और स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन खंडेरी नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी क्योंकि समंदर में INS खंडेरी भारत का वो किला है, जो अभेद्य है और पल भर में अपने शिकार का खात्मा करने में सक्षम है. 

रक्षा विशेषज्ञ कोमोडोर (रिटा.) जी जे सिंह का कहना है कि INS खंडेरी का इंटरनल डिज़ाइन DCNS से लिया गया है पूरी तरह से ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ है. उसमें सबसे जरूरी फीचर है खंडेरी का आगे का हिस्सा जिसमें हथियार लगे होते हैं. इसमें लेटेस्ट सोनार है जो संपूर्ण स्वदेशी है. 

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समुद्र की सतह से लेकर गहराई तक भारतीय नौसेना ने ऐसा समुद्र मंथन किया है कि बुरी नज़र रखने वालों को समंदर में कब्र बनना तय है. INS खंडेरी को ये नाम वीर शिवाजी के खंडेरी किले के नाम पर दिया गया है. मेक इन इंडिया के साथ-साथ इसमें लगे करीब 90 फीसदी उपकरण देश में विकसित किए गए है. स्कोर्पियन सीरिज की इस दूसरी सबमरीन के नौसेना के बेडे में शामिल होने से एक नए अध्याय की शुरूआत हो रही है

हिंद महासागर में अगर भारतीय नौसेना को अपना दबदबा बनाए रखना है तो सबमरीन की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी. INS कलवरी और INS खंडेरी तो महज़ शुरुआत है. भारतीय नौसेना की योजनाओं में फ़िलहाल स्कॉर्पीन क्लास की बाक़ी 4 सबमरीन का निर्माण प्राथमिकता है.  2020 तक स्कॉर्पीन क्लास की सभी पनडुब्बियां दुश्मनों की चीरने के लिए तैयार होने की उम्मीद है. कहा जाता है कि समुद्र बेरहम होता है, और समुद्र में दुश्मन का वार उससे भी ज्यादा बेरहम है. कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दलबीर सिंह का कहना है कि भारत समुद्र में दुश्मन की किसी भी नापाक चाल का जवाब देने के लिये पूरी तरह से तैयार है क्योंकि भारत के पास जो सबमरीन हैं वो दुश्मन के लिए साक्षात यमराज है.