INX मीडिया हेराफेरी: CBI केस में चिदंबरम की जमानत याचिका पर SC में सुनवाई आज

INX मीडिया हेराफेरी (INX Media case) के सीबीआई (CBI) केस में पी चिदंबरम (P Chidambaram) की जमानत याचिका (bail plea) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में मंगलवार को सुनवाई (hearing) होगी

INX मीडिया हेराफेरी: CBI केस में चिदंबरम की जमानत याचिका पर SC में सुनवाई आज
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: INX मीडिया हेराफेरी (INX Media case) के सीबीआई (CBI) केस में पी चिदंबरम (P Chidambaram) की जमानत याचिका (bail plea) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में मंगलवार को सुनवाई (hearing) होगी. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट (SC) ने सीबीआई (CBI) को नोटिस (notice) जारी कर जवाब मांगा था. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने चिदंबरम (Chidambaram) की जमानत याचिका (bail plea) खारिज कर दी थी. दरअसल, इसी केस में चिदंबरम (Chidambaram) दिल्ली (Delhi) की तिहाड़ जेल (Tihar Jail) में बंद हैं. चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में कहा था कि वह कभी भी इंद्राणी मुखर्जी (Indrani Mukherjee) से नहीं मिले. यहां तक कि सीबीआई कस्टडी (CBI Custody) के दौरान मुझसे कहा गया था कि पीटर हमसे मिले थे इंद्राणी नहीं. ये खुद पीटर ने अपने बयान में कहा था.

ऐसा एजेंसी के अधिकरियों ने कहा था कि इसके अलावा विजिटर्स बुक भी चेक कर सकते हैं कि इंद्राणी (Indrani) से हमारी मुलाकात नहीं हुई है. सीबीआई (CBI) का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने कहा था कि ये मनी लॉन्ड्रिंग केस (Money laundering case) का क्लासिक एक्सएम्पेल है. इसी केस को हाई कोर्ट (High Court) ने समझते हुए अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory bail petition) खारिज किया था. उन्होंने आगे कहा था कि पैसा एडवांटेज कंपनी में आया, आगे उसी की अन्य कंपनी ASCPL का इस्तेमाल किया गया, मोहन और राजेश जो कि ASCPL के डायरेक्टर हैं, कंपनी के 66% शेयर ट्रांसफर किए गए, ये दोनों चिदंबरम के फैमिली फ्रेंड हैं.

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गवाहों को प्रभावित किया जा रहा है, इसलिए याचिका (Petition) खारिज कर देनी चाहिए. सिर्फ इंद्राणी मुखर्जी (Indrani Mukherjee) ही मुख्य गवाह नहीं हैं, उसने मजिस्ट्रेट के सामने 164 में बयां दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि चिदंबरम (Chidambaram) का कहना था कि उन्हें सिर्फ एक बार जुलाई 2018 में जांच के लिए बुलाया. लेकिन चिदंबरम सहयोग नहीं कर रहे थे ये बात मानते हुए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उनको राहत नहीं दी. तुषार मेहता (Tushar Mehta) ने कहा था कि सीबीआई (CBI) का आरोप विज़िटर्स रजिस्टर से छेड़छाड़ हुई है. सबूतों को नष्ट का प्रयास किया गया.