आईएनएक्‍स मीडिया केस: पी चिदंबरम को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

उनको 17 अक्‍टूबर को ईडी ने गिरफ्तार किया था.

आईएनएक्‍स मीडिया केस: पी चिदंबरम को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

नई दिल्‍ली: आईएनएक्‍स मीडिया केस (INX media case) में पी चिदंबरम को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े ईडी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. इस केस में चिदंबरम पर सीबीआई और ईडी ने अलग अलग दो FIR दर्ज की थी. चिदंबरम को 21 अगस्त को सीबीआई ने गिरफ़्तार किया था. 22 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के केस में चिदंबरम को ज़मानत दी थी, लेकिन इससे पहले ही ईडी ने 17 अक्‍टूबर को अपने केस में चिदंबरम को गिरफ़्तार कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने 2 लाख के बेल बांड और दो सिक्योरिटी पर जमानत दी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिना कहीं भी यात्रा नहीं कर सकेंगे. गवाहों के साथ किसी भी तरीके का संपर्क नहीं रखेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पी चिदंबरम इस केस के संबंध में किसी भी तरीके की सार्वजनिक बयानबाजी और प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे.

हालांकि इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस बात से सहमत है कि आर्थिक अपराध गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं लेकिन पी चिदंबरम को जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पी चिदंबरम को निर्देश दिया कि जब भी ईडी कहे तो उसकी जांच में वह सहयोग करें.

सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम को ज़मानत दिए जाने के आदेश में कहा कि चिदंबरम अब सत्ता में नहीं हैं और न ही सरकार में कोई ऐसे पद पर हैं जिसके जरिये वो जांच में दखल देने की स्थिति में हो. सिर्फ़ 'फेस वैल्यू' के आधार पर उनके खिलाफ ऐसे आरोप स्वीकार नहीं किये जा सकते. कोर्ट ने कहा कि अगर किसी गवाह ने चिदंबरम का सामना करने में असमर्थता जताई है तो इसके लिये चिंदबरम को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. खासतौर पर तब जबकि चिंदबरम या उनकी ओर से किसी और के, गवाहों को धमकाने के आरोप साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं है.

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इससे पहले 28 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान ED ने पी चिदंबरम की जमानत का विरोध किया था.सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि चिदंबरम की तरफ से कहा गया है कि मैं रंगा बिल्ला नहीं हूं, तो मुझे क्यों जेल में रखा जा रहा है, इसका जवाब ये है कि इस अपराध की गंभीरता समाज पर प्रभाव डालती है. इसके साथ ही तुषार मेहता ने कहा था कि क्या हम तभी कार्रवाई करेंगे जब अपराध करने वाला रंगा बिल्ला होगा.