INX मीडिया हेराफेरी: पी. चिदंबरम को मिलेगी जमानत या रहेंगे जेल, फैसला कल

INX मीडिया हेराफेरी से जुड़े ईडी केस में पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम (P. Chidambaram)की अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को फैसला सुनाएगा. 

INX मीडिया हेराफेरी: पी. चिदंबरम को मिलेगी जमानत या रहेंगे जेल, फैसला कल
.(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: INX मीडिया हेराफेरी से जुड़े ईडी केस में पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम (P. Chidambaram) की अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को फैसला सुनाएगा. जस्टिस भानुमति और जस्टिस बोपन्ना की खंडपीठ सुबह 10:30 बजे फैसला सुनाएगी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में ईडी की ओर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चिदंबरम (P. Chidambaram) की अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि अगर चिदंबरम (P. Chidambaram) को अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट देता है तो उसके विनाशकारी परिणाम होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि इसका सीधा असर विजय माल्या, मेहुल चौकसी, नीरव मोदी, शारदा चिटफंड, टेरर फंडिंग जैसे मामले पर पड़ेगा.

तुषार मेहता ने सबूत दिखाकर बिना गिरफ्तारी पूछताछ की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि जांच कैसे हो, एजेंसी ज़िम्मेदारी से इसका फैसला लेती है. जो आरोपी आज़ाद घूम रहा है, उसे सबूत दिखाने का मतलब है बचे हुए सबूत मिटाने का न्योता देना. 

तुषार मेहता ने कहा था कि जांच को कैसा बढ़ाया जाए, ये पूरी तरह से एजेंसी का अधिकार है. केस के लिहाज से एजेंसी तय करती है कि किस स्टेज पर किन सबूतों को जाहिर किया जाए और किन को नहीं. अगर गिरफ्तार करने से पहले ही सारे सबूतों, गवाहों को आरोपी के सामने रख दिया जाएगा तो ये तो आरोपी को सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और मनी ट्रेल को ख़त्म करने का मौक़ा देगा.

उन्‍होंने कहा  था कि पी चिदंबरम (P. Chidambaram)के वकील कपिल सिब्बल का कहना है कि अपराध की गंभीरता 'सब्जेक्टिव टर्म' है. PMLA के तहत मामले उनके लिहाज से गंभीर नहीं होंगे, पर हकीकत ये है कि इस देश की अदालतें आर्थिक अपराध को गंभीर मानती रही हैं. 

दरअसल, इससे पहले सिब्बल ने कहा था कि 7 साल से कम तक की सज़ा के प्रावधान वाले अपराध को CRPC के मुताबिक कम गंभीर माना जाता है. तुषार मेहता ने कहा था कि इस मामले में अपराध देश की अर्थव्यवस्था के खिलाफ है. ऐसे मामलों में सज़ा का प्रावधान चाहे कुछ भी हो, सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक अपराध को हमेशा गंभीर अपराध माना है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि अगर ये मामला सेक्शन 45 PMLA के अंतर्गत भी नहीं आता हो तब भी ये मामला CrPC के सेक्शन 438 के अंतर्गत जरूर आता है, जिससे हमें गिरफ्तारी का हक़ मिलता है. इसके साथ ही तुषार मेहता ने सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दी और कहा था कि कोर्ट अगर चाहे तो इसको खोल सकता है. इसके साथ ही तुषार मेहता ने अपनी बहस पूरी कर ली थी. 

चिंदबरम को लेकर कल का दिन अहम-
सुप्रीम कोर्ट से रॉउज एवेन्यु कोर्ट में कई अर्जी पर आदेश आएगा/सुनवाई होगी. कल ये भी तय होगा कि चिंदबरम को तिहाड़ जाना होगा या नहीं:-
*ED केस में अग्रिम ज़मानत मांग चिंदबरम की अर्जी पर कल सुप्रीम कोर्ट आदेश सुनायेगा.
*इसके अलावा सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी और रिमांड पर भेजे जाने के आदेश के खिलाफ दायर अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा.
*दिलचस्प ये है कि अभी तक जेल जाने से किसी तरह बच रहे चिंदबरम की सीबीआई कस्टड़ी भी कल खत्म हो रही है. उन्हें कल सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा. कल रॉउज एवेन्यु कोर्ट में अंतरिम ज़मानत अर्जी पर भी सुनवाई होनी है..नियम के मुताबिक सीबीआई कस्टड़ी के कल 14 दिन पूरे हो जायेगे.निचली अदालत अब आगे कस्टड़ी नहीं बढ़ा पाएगी. अगर कल निचली अदालत से अंतरिम ज़मानत नहीं मिलती तो चिंदबरम को जेल जाना होगा.

इनपुट: महेश गुप्‍ता