ISIS, लश्कर मुंबई हवाई अड्डे और नौसेना स्टेशन को निशाना बनाने की फिराक में थे

पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली के राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज पर हमले के लिए अल कायदा उससे संपर्क में था और तथा लश्कर-ए-तैयबा एवं आईएसआई मुंबई हवाई अड्डे, बार्क एवं नौसेना स्टेशन को निशाना बनाने की फिराक में थे।

ISIS, लश्कर मुंबई हवाई अड्डे और नौसेना स्टेशन को निशाना बनाने की फिराक में थे

मुंबई : पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली के राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज पर हमले के लिए अल कायदा उससे संपर्क में था और तथा लश्कर-ए-तैयबा एवं आईएसआई मुंबई हवाई अड्डे, बार्क एवं नौसेना स्टेशन को निशाना बनाने की फिराक में थे।

अमेरिका से वीडियो लिंक के जरिए गवाही देते हुए विशेष न्यायाधीश जी ए सनप को बताया कि उसने शिवसेना के किसी सदस्य के साथ निकट संबंध बनाने की कोशिश की क्योंकि उसे लगा था कि लश्कर की भविष्य में शिवसेना भवन पर हमला करने या उसके प्रमुख (दिवंगत बाल ठाकरे) की हत्या करने में रुचि होगी।

हेडली ने अपनी गवाही के चौथे दिन दावा किया कि उसने नौसेना स्टेशन और सिद्धिविनायक मंदिर पर हमले को लेकर लश्कर को मना किया क्योंकि इन स्थानों बहुत अधिक सुरक्षा व्यवस्था थी। उसने कहा, ‘मैंने हमले के लक्ष्य के तौर पर जिन स्थानों की रेकी की थी, उनमें से कुछ स्थानों को लेकर मेजर इकबाल ने असहमति जाहिर की थी। मुझे लगा कि मेजर इकबाल इसलिए नाखुश थे क्योंकि मुंबई हवाईअड्डे को नहीं चुना गया था और 26/11 हमलों के लक्ष्य के रूप में उसे शामिल नहीं किया गया था।’ 

इस आतंकी ने इस बारे में खुलासा किया कि मुंबई हमले के बाद अलकायदा भी भारत में हमले करने चाहता था। उसने कहा, ‘26/11 हमले के बाद फरवरी, 2009 में मैं अलकायदा के इलियास कश्मीरी से मिला और उसने मुझसे कहा कि मैं फिर से भारत का दौरा करूं क्योंकि वे भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना चाहते थे। उसने एनडीसी जैसे कुछ स्थानों का जिक्र किया था जो उनके मुख्य निशाने पर थे।’ हेडली ने कहा कि एनडीसी मुख्य निशाने पर था क्योंकि यहां पर ब्रिगेडियर से लेकर जनरल स्तर के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होते हैं।

हेडली ने कहा, ‘अब्दुल रहमान पाशा (अलकायदा सदस्य) ने बोला था कि अगर यह हमला सफल होता है तो हम अतीत में हुए भारत-पाकिस्तान युद्धों की तुलना में ब्रिगेडियर और जनरल स्तर के ज्यादा अधिकारियों को मार सकेंगे।’ उसने अदालत को बताया कि कश्मीरी के आदेश के अनुसार उसने पुष्कर, गोवा और पुणे चबाड हाउस का दौरा किया था क्योंकि वे भी आतंकी संगठन के निशाने पर थे।

हेडली ने कहा, ‘मैंने बीएआरसी का दौरा और वहां की वीडियोग्राफी भी की थी। मेजर इकबाल ने मुझसे कहा था कि भविष्य में मुझे बीएआरसी के किसी कर्मचारी को भर्ती करना चाहिए, जो हमें गोपनीय जानकारी दे सके और जो आईएसआई के लिए काम करने को तैयार हो।’ उसने कहा, ‘मैं दादर स्थित शिवसेना भवन में राजाराम रेगे (उद्धव ठाकरे के पीआरओ) से मिला था। मेरी दिलचस्पी उस वक्त भवन में पहुंच बनाने की थी और मैंने रेगे से निकट संबंध बनाने की कोशिश की क्योंकि मुझे लगा कि भविष्य में लश्कर शिवसेना भवन पर हमला और इसके प्रमुख की हत्या करना चाहेगा।’

उसने अजमल कसाब के तस्वीर की शिनाख्त की। कसाब उन 10 आतंकवादियों में शामिल था जिन्होंने हमला किया था। कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। हेडली ने अदालत से कहा, ‘यह अजमल कसाब रहमतुल्ला अलै हैं।’ यह कहने पर कि कसाब का पूरा नाम बताओ, तो हेडली ने कहा, ‘उसका नाम सिर्फ अजमल कसाब है, लेकिन रहमतुल्ला अलै का मतलब ईश्वर का उसका पर आशीर्वाद हो या उसकी रक्षा करे।’ 

हेडली ने आगे खुलासे करते हुए कहा कि मुंबई की रेकी करने के बाद उसने पाकिस्तान में मेजर इकबाल और लश्कर के नेता जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबु खफा एवं अब्दुल रहमान पाशा के साथ कई बैठकें की थीं। हेडली ने कहा कि 26/11 हमलों से पहले जुलाई 2008 में उसके मुंबई के अंतिम दौरे के दौरान, उसने दक्षिण मुंबई स्थित चबाड हाउस का सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की थी। उसने कहा, ‘मैं नहीं जानता कि वहां कौन रह रहा था। साजिद मीर और पाशा ने मुझे इस स्थान का सर्वेक्षण करने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि यह एक अंतरराष्ट्रीय ठिकाना है क्योंकि वहां यहूदी और इस्राइली लोग रहते हैं।’ 

हेडली ने कहा कि उसने नौसैन्य वायु स्टेशन और सिद्धिविनायक मंदिर को हमले के लक्ष्य के तौर पर शामिल न करने के लिए कहा था। हेडली ने कहा, ‘मैंने हमले के लिए नौसेना वायु स्टेशन और सिद्धिविनायक मंदिर का चयन लक्ष्य के तौर पर करने के लिए लश्कर को हतोत्साहित किया क्योंकि तब 10 हमलावरों को केवल उन्हीं लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा।’ 

हेडली ने यह भी कहा कि अपनी आखिरी यात्रा में उसने ताज होटल में एक दुकान से पांच किताबें खरीदी थीं। उसने कहा, ‘उसी यात्रा के दौरान मैं ताज होटल के भीतर स्थित नालंदा बुक स्टोर भी गया था जहां से मैंने पांच किताबें खरीदीं। इनमें से एक किताब ‘इंडियन आर्मी विजन 2020’ थी। मैं भारतीय सेना की भविष्य में प्रगति के बारे में जानना चाहता था।’ 

जब न्यायाधीश जी ए सनप ने हेडली से पूछा कि उसने अन्य चार किताबें क्यों खरीदी थीं, उसने कहा, ‘अन्य किताबें चित्रात्मक थीं और वे देखने में अच्छी थीं, इसलिए मैंने उन्हें खरीदा। उन्हें खरीदने को लेकर कोई भी गलत इरादा नहीं थी। पहली किताब को लेकर गलत इरादा था।’

हेडली ने अदालत को बताया कि उसने कफ परेड में बधवार पार्क को चुना था जहां 10 हमलावर कदम रखेंगे क्योंकि यह इलाके मुख्य सड़क की ओर से झुग्गी-झोपड़ियां से घिरा था और इसलिए उसे लगा था कि इससे आतंकवादियों को रणनीतिक लाभ मिलेगा। उसने कहा, ‘मैं मई 2008 में अमेरिका गया था। मैं तहव्वुर राणा (हेडली के कारोबारी साझीदार) से नहीं मिल पाया था लेकिन मैंने उससे फोन पर बात की थी। मैंने कहा था कि मैं भारत गया था और मैंने (आतंकवादियों के) लैंडिंग साइट का चयन कर लिया है।’ 

हेडली ने कहा कि लश्कर का कमांडर जकी उर रहमान 10 आतंकवादियों के लैंडिंग साइट के रूप में गेटवे ऑफ इंडिया का चयन करना चाहता था क्योंकि यह जगह ताज होटल से काफी निकट थी। उसने कहा, ‘हालांकि मैंने कहा कि यह अच्छा विचार नहीं है क्योंकि हमलावरों को नौसेना अधिष्ठान को पार करके गेटवे ऑफ इंडिया से होकर गुजरना पड़ेगा और वे पकड़े जा सकते हैं। जकी साहिब और अन्य ने मेरी सलाह से सहमति जताई।’ 

हेडली ने कहा, ‘जब जकी साहिब ने हमले के उन लक्ष्यों को देखा जो मैंने चुने हैं, तो उन्होंने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है और इसे उचित ढंग से किया जाना होगा। जकी साहिब ने कहा कि हमलों के लिए निरीक्षण उचित ढंग से किया जाना चाहिए। जकी साहिब ने मुझे शुभकामनाएं दीं।’ 

उसने अदालत को बताया कि पाकिस्तान में हुई बैठकों में से एक बैठक में 10 आतंकवादियों को विभिन्न समूहों में बांटने के विचार पर भी चर्चा की गई थी। हेडली मुंबई हमलों में संलिप्तता के मामले में अमेरिका में 35 वर्ष कारावास की सजा काट रहा है। मुंबई में हुए हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।