DNA: AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी गाजा में इजरायल के अटैक में मारे गए मुस्लिमों के लिए लगभग रो पड़े. लेकिन ईरान के मुसलमानों के लिए इनके आंसू नहीं निकल रहे. देश की संसद में फिलिस्तीन जिंदाबाद के नारे लगाने वाले ओवैसी को ईरान की तस्वीर नहीं दिख रही है या वो देखना ही नहीं चाह रहे.
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DNA Analysis: भारत में भी गाजा के मुसलमानों की मौत पर इमोशनल होने वाले नेता और मौलाना आज खामोश हैं. अक्सर किसी शोक की स्थिति में दो मिनट का मौन रखा जाता है लेकिन लगता है ईरान में मुसलमानों के नरसंहार पर दो मिनट का नहीं, परमानेंट मौन रख लिया गया है. आज हम आपको कुछ समझाना चाह रहे हैं और इसलिए सुनाना चाह रहे हैं ताकि आप समझ सकें, जिन्हें ईरान के मुसलमान मुसलमान नहीं लगते पीड़ित नहीं लगते, वो गाजा के नाम पर कैसे आंसू बहाते रहे हैं.
AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी गाजा में इजरायल के अटैक में मारे गए मुस्लिमों के लिए लगभग रो पड़े. लेकिन ईरान के मुसलमानों के लिए इनके आंसू नहीं निकल रहे. देश की संसद में फिलिस्तीन जिंदाबाद के नारे लगाने वाले ओवैसी को ईरान की तस्वीर नहीं दिख रही है या वो देखना ही नहीं चाह रहे. जानते हैं क्यों, क्योंकि ईरान में जालिम भी मुस्लिम है और जुल्म सहने वाला भी मुस्लिम है. लेकिन गाजा में इनका विलेन एक गैर-इस्लामी शख्स और गैर-इस्लामी मुल्क है. ऐसी स्थिति में मुसलमानों से सहानुभूति का सारा नैरेटिव टूट जाता है.
ईरान हिंसा पर चुप क्यों?
आज हमने इस्लामिक स्कॉलर और धर्मगुरुओं से भी ये सवाल पूछा गाजा वाले आंसू ईरान की मौत पर कहां चले गए . क्यों ईरान में मुसलमानों की मौत पर कोई फतवा जारी नहीं हुआ. क्यों कोई रैली नहीं निकली, भारत में एक मुसलमान की मौत पर इस्लाम खतरे में आ जाता है लेकिन ईरान में जब मुसलमानों की लाशें गिर रही हैं तो इस्लाम सबको सुरक्षित क्यों लग रहा है. आज आपको उनको जवाब भी बहुत ध्यान से समझना चाहिए. मौलाना यासूब अब्बास और इमाम सैयद शहंशाह हुसैन जैदी मानते हैं. ईरान में सब शांति है कुछ गलत नहीं हो रहा.
मुसलमानों की हत्या
सैकड़ों मुसलमानों की मौत भारत में बैठे इस्लामिक स्कॉलर्स को दिख ही नहीं रही है. हमने शवों के वीडियो दिखाए, जिनके ये शव हैं उनके नाम बताए. ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री भी बता रहे हैं हिंसा से ईरान जल रहा है. लेकिन भारत के गाजा प्रेमी मुसलमानों ने आंखें बंद कर ली हैं. ईरान में इंटरनेट बंद है, इंटरेनशनल कॉल बंद है. लेकिन पता नहीं, इन्हें ईरान से कौन फोन करके बता रहा है कि यहां सब शांति है. यह उस वैचारिक चश्मे का कमाल है जिसे पहनने के बाद इजरायल और अमेरिका की गोलियां दिखती हैं लेकिन ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता की सत्ता को बचाने के लिए चली गोलियां और उससे मरने वाले मुसलमानों के शव नहीं दिखते.