DNA: सिडनी के हमलावरों का कनेक्शन पाकिस्तान से है. इसका मतलब क्या हुआ? क्या यहूदियों के दुश्मनों को दुनिया के कोने-कोने में तलाश करके मारने वाला इजरायल पाकिस्तान के खिलाफ भी एक्शन ले सकता है या फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और पाकिस्तान की आतंकी सेना के चीफ आसिम मुनीर के मजबूत होते संबंध दुनिया में आतंकवाद की सबसे बड़ी फैक्ट्री पाकिस्तान को बचा लेंगे.
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DNA Analysis: अब दुनिया में ये बहस भी शुरू हो गई है. आज आपको भी इसकी वजह जाननी चाहिए. ये बहस इसलिए हो रही है क्योंकि, इज़रायल जैसा साफ बात करने वाला देश भी आतंकवादियों का पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आने के बावजूद इसका ठीकरा ईरान पर फोड़ रहा है. इजरायल की मीडिया सिडनी में आतंकी हमले के पीछे ईरान का हाथ होने का शक जाहिर कर रही है. आज आपको इजरायल की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को भी बहुत ध्यान से पढ़ना चाहिए. इजरायली चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक मोसाद ने हमले से करीब एक महीना पहले ऑस्ट्रेलियाई खुफिया एजेंसियों को हमले की चेतावनी दी थी. जिसमें बताया गया था ईरान समर्थित आतंकी नेटवर्क ऑस्ट्रेलिया में यहूदी ठिकानों पर हमले की योजना बना रहे हैं. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि ईरानी आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया ने नष्ट कर दिया था. इजरायली मीडिया के मुताबिक अब जांच हो रही है बॉन्डी बीच पर हमला उसी ईरान समर्थित नेटवर्क का हिस्सा था या नहीं. इसके अलावा इजरायल के कई अखबारों ने भी इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने की आशंका जाहिर की. लेकिन आतंकियों के पाकिस्तानी होने के बावजूद पाकिस्तान को अब तक सीधे कटघरे में खड़ा नहीं किया गया.
इजरायल के निशाने पर ईरान
इजरायल के अखबारों ने खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया है हाल के महीनों में ईरान ने दुनियाभर में यहूदी और इजरायली ठिकानों पर हमले करवाने की कोशिशें तेज की हैं. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड यानि IRGC को आतंकी संगठन घोषित किया था और ईरानी राजदूत को देश से निष्कासित कर दिया गया था. इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर ईरान समर्थक कुछ अकाउंट्स की ओर से अटैक की तारीफ की गई है. जिससे हमले का शक ईरान की तरफ जा रहा है. हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने हमले के बाद फौरन सिडनी टेरर अटैक की निंदा कर दी और दुनिया के किसी भी कोने में होने वाले आतंकी हमले के खिलाफ खड़े होने की बात कही. लेकिन इसके बावजूद इजरायल का शक ईरान पर है. इसी वजह से सवाल उठ रहा है क्या इजरायल के पास वाकई कोई खुफिया सूचना मौजूद है या फिर ट्रंप के दबाव में पाकिस्तान को बचाने की कोशिश की जा रही है और ईरान पर फिर से किसी हमले की तैयारी हो रही है. आस्ट्रेलिया के सिडनी में यहूदियों पर पर हुए आतंकी हमले के बाद दुनिया में एक सवाल और उठ रहा है. क्या फिलिस्तीन के समर्थन में झंडे उठाने वाले बंदूकें उठाकर गोलियां भी चला सकते हैं?
भारत को रहना होगा सावधान
सिडनी के बॉन्डी बीच पर हुए नरसंहार के बाद आस्ट्रेलिया की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं. जिस बांडी बीच पर साजिद और नवीद ने यहूदियों पर गोलियां बरसाईं उसी बांडी बीच पर कुछ दिनों पहले एक शख्स फिलिस्तीन का झंडा लेकर घोड़ा दौड़ाता नजर आया था. इससे आस्ट्रेलियाई पुलिस ने बात भी की थी लेकिन कोई आपत्ति जाहिर नहीं की थी. हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी ऑस्ट्रेलिया पर आरोप लगाया. कि वहां सरकार यहूदी विरोधी भावनाओं को बढ़ने का मौका दे रही है. आस्ट्रेलिया में कुछ दिनों पहले फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली हुई थी. जिसमें लगभग 50 हजार लोग इकट्ठे हुए थे. इसमें फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल के विरोध में नारे लगाए गए थे. ऐसी ही रैलियों में यहूदियों पर गोली बरसाने वाले साजिद और नवीद भी हिस्सा लेते थे. ऐसे में आशंका जाहिर की जा रही है आस्ट्रेलिया में फिलिस्तीन का झंडा उठाने वाले 50 हजार लोगों में कुछ और साजिद और नवीद जैसे आतंकी निकले तो आस्ट्रेलिया में मौजूद यहूदियों का क्या होगा ? वैसे हमारे देश में भी कई बार फिलिस्तीन का झंडे दिखाई पड़े हैं. ऐसे में सतर्कता भारत को भी बरतनी होगी.
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