जांलधर की लेदर फैक्टरियां फिलहाल रहेंगी बंद, हाईकोर्ट ने जताई असंतुष्टि

 प्रदूषण फैलाने के कारण पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा जालंधर लेदर कॉम्पलैक्स में स्थित लेदर टैनरीज (लेदर फैक्टरियों) को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. 

जांलधर की लेदर फैक्टरियां फिलहाल रहेंगी बंद, हाईकोर्ट ने जताई असंतुष्टि
फिलहाल लेदर टैनरीज बंद रहेंगी.

चंडीगढ़: प्रदूषण फैलाने के कारण पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा जालंधर लेदर कॉम्पलैक्स में स्थित लेदर टैनरीज (लेदर फैक्टरियों) को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है और फिलहाल ये लेदर टैनरीज बंद रहेंगी. लेदर फैक्टरियों के मालिकों ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की अनुपालना करने को लेकर हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग दी, जिसपर जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस हरिन्दर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने असंतुष्टि जताई. जस्टिस राजीव शर्मा ने कहा कि टैनरीज की तरफ से इस तरह कंडीश्नल अंडरटेकिंग देने की उम्मीद नहीं थी. 

हाईकोर्ट ने कहा कि सभी यूनिट अल्ग अल्ग अंडरटेकिंग दें जिसमें हर नियम की पालना उस यूनिट द्वारा कितने समय में की जाएगी उसकी पूरी जानकारी दी जाए. कोर्ट ने कहा इस तरह सभी यूनिट द्वारा एक ही हल्फनामा दाखिल करने से भविष्य में नियमों की पालना को लेकर कन्फयूज़न रहेगी . क्योंकि इन लेदर टैनरीज में ड्राई और वेट दोनों शामिल हैं. हाईकोर्ट ने कहा जब तक सभी यूनिट अल्ग अल्ग अंडरटेकिंग नहीं देते, तब तक फैक्टरियों में काम शूरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

पंजाब एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सोसायटी फॉर टैनरीज से संबंधित मामले में हाईकोर्ट में हल्फनामा दाखिल किया गया जिस पर जस्टिस राजीव शर्मा ने सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा पंजाब एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सोसायटी से एफिडेविट मांगा ही नहीं गया तो वो अपने आप हलफनामा लेकर क्यों आ गए. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पंजाब सरकार वैसे तो सोती रहती है किसी मामले में 10-10 बार रिप्लाई या हलफनामा मांगने पर भी जबाब नहीं आता लेकिन इस मामले में बिना मांगे हल्फनामा दाखिल क्यों किया जा रहा है. 

हाईकोर्ट ने कहा हमने सिर्फ प्रतिवादियों को हल्फनामा दाखिल करने के लिए कहा था और किसी को नहीं. हाईकोर्ट ने पंजाब एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सोसायटी फॉर टैनरीज द्वारा दिए हलफनामे को ऑन रिकॉर्ड नहीं लिया. हालांकि सोसायटी के वकील ने बताया कि मॉनिटरिंग कमेटी के हेड डीसी हैं और कई कामों को करवाने की ज़िम्मेदारी हमारी है उसको लेकर ही एफिडेविट दाखिल किया जा रहा है जिसपर कोर्ट ने कहा कि पहले यूनिट अलग-अलग अंडरटेकिंग तो दें.

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान टैनरीज की तरफ से पेश हुए सीनियर वकीलों ने काफी दलीलें दी और ये तक कहा कि सभी फैक्टरीयों की तरफ से दिया ये हलफनामा बेहतर है क्योंकि इसमें सभी फैक्टरीयां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिए दिशा-निर्देशों की पालना करने को लेकर अंडरटेकिंग दे रहीं है. जस्टिस राजीव शर्मा ने कहा ये हलफनामा कैसे बेहतर माना जा सकता है. न इसमें हर नियम पर कब तक काम किया जाएगा उसकी जानकारी है और कौन सा नियम किस यूनिट पर लागू होगा न इसकी जानकारी है. ऐसे में इस हलफनामे को मंजूर नहीं किया जा सकता. फैक्टरियों की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील अक्षय बान ने कहा कि स्यूइंग यूनिट चलाने की अनुमति दी जाए क्योकिं काम पूरी तरह से ठप पड़ा है हाईकोर्ट ने इस अपील को भी नहीं माना और लेदर फैक्टरीयां चलाने वाले मालिकों को कोई राहत नहीं दी गई.

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर के आदेशों में प्रदूषण नियंत्रण पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1974 और जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम, 1974 के नियमों का उल्लंघन करने के लिए जालंधर के लेदर कॉम्पलैक्स में स्थित टैनरीज को बंद करने के आदेश दे दिए थे जिसके बाद से 61 लेदर फैक्टरियों को बंद करवा दिया गया था. हाईकोर्ट ने यह आदेश पंजाब एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सोसायटी फॉर टैनरीज और अन्यों द्वारा दायर याचिका पर आए थे जिसमें लेदर फैडरेशन के सदस्यों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगाए गए थे और कहा गया था कि लेदर कॉम्पलैक्स में चल रही लेदर फैक्टरियों से काला संघिया ड्रेन में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है.

आपको बता दें है कि काला संघिया में जल प्रदूषण को कम करने के लिए हाईकोर्ट ने इससे पहले भी सीवरेज डिस्पोजल बोर्ड, पीएसआईईसी के चीफ इंजीनियर और जालंधर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त को ऐसा तरीका ढूंढने को कहा था जिससे जालंधर की फैक्टरियों और बूचड़खानों से निकलने वाले द्रव्य कचरे को सीवरेज लाइन में डाले जाने से पहले शोधित किया जा सके.