Rohingya Muslims को लेकर Jammu Kashmir प्रशासन का बड़ा फैसला, वेरिफिकेशन कैंपेन की शुरुआत

Rohingya Muslims in Jammu and Samba: प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच एमएएम स्टेडियम में रोहिंग्या मुसलमानों (Rohingya Muslims) का सत्यापन किया गया. अभियान में बायोमिट्रिक जानकारी समेत अन्य ब्योरा जुटाया जा रहा है.

Rohingya Muslims को लेकर Jammu Kashmir प्रशासन का बड़ा फैसला, वेरिफिकेशन कैंपेन की शुरुआत
जम्मू में रोहिंग्या मुस्लिमों की जानकारी जुटाई जा रही है. फोटो साभार: (PTI)

जम्मू: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) प्रशासन ने अहम फैसला लिया है. जम्मू में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों (Rohingya Muslims) की बायोमिट्रिक जानकारी (Biometrics details) समेत अन्य डिटेल जुटाने का काम शनिवार से शुरू कर दिया गया है. इस दौरान जम्मू में लगे कैंप में भारत में अवैध तरीके से रह रहे 155 रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान हुई है. इन्हें अब निर्धारित होल्डिंग सेंटर में भेजा गया है. रोहिंग्या मुसलमान अपने देश में प्रताड़ना और उत्पीड़न से परेशान होकर बांग्लादेश के रास्ते भारत में दाखिल होकर जम्मू समेत देश के कई हिस्सों में बस गए हैं.

कैंप में बड़ा खुलासा

शनिवार को 155 अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान हुई है. इनके पास देश में रहने या कहीं आने-जाने के वैध दस्तावेज नहीं थे. आरोपियों के खिलाफ पासपोर्ट एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की गई है. गृह मंत्रालय की निर्धारित प्रकिया के तहत अब इन्हें इनके देश भेजा जाएगा. फिलहाल सभी को कठुआ जिले (Kathua District) के हीरा नगर स्थित होल्डिंग सेंटर में भेजा गया है.

स्टेडियम में हो रही पड़ताल

अधिकारियों ने बताया कि कड़ी सुरक्षा के बीच एमएएम स्टेडियम में म्यांमार से आए रोहिंग्या मुसलमानों का सत्यापन किया गया. प्रशासन के मुताबिक इस प्रक्रिया के तहत रोहिंग्या समुदाय के लोगों की बायोमिट्रिक जानकारी, रहने का स्थान आदि सहित अन्य सूचनाएं जुटायी गईं हैं. आगे भी ये अभियान जारी रहेगा. इस दौरान गहराई से पड़ताल की जा रही है. 

'देश के लिए खतरा'

म्यांमार के नागरिक अब्दुल हनान ने पत्रकारों को बताया, ‘कोविड-19 की जांच के बाद हमने एक फॉर्म भरा. हमारे फिंगरप्रिंट लिए गए.’ उन्होंने बताया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह स्टेडियम से बाहर आ गए. इस बीच कुछ राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वो रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को फौरन उनके देश वापस भेजने की दिशा में कदम उठाएं.

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अपनी अपील में ये भी कहा गया है कि इस समुदाय की देश में उपस्थिति क्षेत्र की जनसांख्यिकी प्रकृति (Demographics Nature) में बदलाव की साजिश है. वहीं ये भी कहा जा रहा है कि बांग्लादेशियों और रोहिंग्या लोगों की बड़े पैमाने पर मौजूदगी, इन क्षेत्रों की शांति के लिए खतरा बन चुकी है.   

रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशी नागरिकों सहित 13,700 से ज्यादा विदेशी नागरिक जम्मू और साम्बा (Samba) जिलों में बसे हुए हैं. सरकारी आंकड़े के अनुसार, 2008 से 2016 के बीच उनकी जनसंख्या में 6,000 से ज्यादा की वृद्धि हुई है. रोहिंग्या, म्यांमार (Myanmar) के बांग्ला बोलने वाले अल्पसंख्यक मुसलमान हैं.

(इनपुट एजेंसी भाषा के साथ) 

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